बुधवार को भारतीय रुपया छह हफ्तों के अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ने रुपये की उस रिकवरी को और आगे बढ़ाने में मदद की है जो पिछले हफ्ते कई नीतिगत उपायों के चलते शुरू हुई थी। आज रुपया इंट्राडे में 94.4925 के हाई लेवल तक पहुंचा, जिसके बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह 94.56 पर कारोबार करता दिखा। आज रुपए में 0.4% की बढ़त देखने को मिली है।
इस महीने की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर को तोड़ने की कगार पर पहुंच गया था। लेकिन आरबीआई के फैसलों के बाद से रुपए में 2% से अधिक की रिकवरी देखने को मिली है। रुपए में यह उछाल केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कई नीतिगत कदमों की वजह से आया है। इन कदमों में तेल से जुड़ी डॉलर की मांग को स्पॉट मार्केट से हटाने और कुछ आयातकों के लिए हेजिंग की लागत बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के बाजार में किए गए हस्तक्षेपों ने विदेशी निवेश के साथ मिलकर इन उपायों के प्रभाव को और मज़बूत किया है। एक सरकारी बैंक के ट्रेडर ने कहा कि विदेशी बैंक USD/INR की बिकवाली कर रहे हैं और इस पेयर के लिए अगला सपोर्ट लेवल 94.30 के आसपास हो सकता है।
हालांकि हाल के दिनो में डॉलर के मुकाबले रुपए ने कुछ मजबूती हासिल की है,लेकिन ट्रेडर्स अभी भी तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े जोखिम को लेकर सतर्क हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें एक बड़ी आर्थिक चुनौती हैं।
HSBC के एनालिस्ट्स ने एक नोट में कहा है कि उन्हें लगता है कि USD-INR (डॉलर-रुपया) विनिमय दर में फिर से हल्की तेजी देखने को मिलेगी। इसमें भारत के चालू खाता घाटे (current account deficit), दूसरे देशों की तुलना में अधिक महंगाई और RBI की बड़ी 'शॉर्ट FX फॉरवर्ड' पोजीशन जैसे कारणों का योगदान हो सकता है।
आज ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1% से अधिक बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई में बाधा आने की आशंका बनी हुई है। ईरानी मीडिया आउटलेट 'नूरन्यूज' ने मंगलवार को जाकारी दी कि ईरान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी।
एशियाई मुद्राओं में काफी हद तक एक सीमित दायरे में कारोबार हो रहा। डॉलर इंडेक्स 101.8 के स्तर पर लगभग सपाट बना हुआ है।
आगे बाजार नजरें इस महीने की शुरुआत में हुई RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा के मिनट्स (बैठक का विवरण) पर रहेंगी। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्टूबर को चार साल में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि आगे और भी बढ़ोतरी हो सकती है।
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