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Jio Platforms IPO में आए विदेशी पैसे ने दिया बूस्टर डोज, 6 महीने के हाई पर पहुंचा रुपया

इस महीने की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर को तोड़ने की कगार पर पहुंच गया था। लेकिन आरबीआई के फैसलों के बाद से रुपए में 2% से अधिक की रिकवरी देखने को मिली है। रुपए में यह उछाल केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कई नीतिगत कदमों की वजह से आया है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Oct 21, 2026 पर 1:19 PM
Jio Platforms IPO में आए विदेशी पैसे ने दिया बूस्टर डोज, 6 महीने के हाई पर पहुंचा रुपया
Dollar vs Rupee : HSBC के एनालिस्ट्स ने एक नोट में कहा है कि उन्हें लगता है कि USD-INR (डॉलर-रुपया) विनिमय दर में फिर से हल्की तेजी देखने को मिलेगी

बुधवार को भारतीय रुपया छह हफ्तों के अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ने रुपये की उस रिकवरी को और आगे बढ़ाने में मदद की है जो पिछले हफ्ते कई नीतिगत उपायों के चलते शुरू हुई थी। आज रुपया इंट्राडे में 94.4925 के हाई लेवल तक पहुंचा, जिसके बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह 94.56 पर कारोबार करता दिखा। आज रुपए में 0.4% की बढ़त देखने को मिली है।

इस महीने की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर को तोड़ने की कगार पर पहुंच गया था। लेकिन आरबीआई के फैसलों के बाद से रुपए में 2% से अधिक की रिकवरी देखने को मिली है। रुपए में यह उछाल केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कई नीतिगत कदमों की वजह से आया है। इन कदमों में तेल से जुड़ी डॉलर की मांग को स्पॉट मार्केट से हटाने और कुछ आयातकों के लिए हेजिंग की लागत बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के बाजार में किए गए हस्तक्षेपों ने विदेशी निवेश के साथ मिलकर इन उपायों के प्रभाव को और मज़बूत किया है। एक सरकारी बैंक के ट्रेडर ने कहा कि विदेशी बैंक USD/INR की बिकवाली कर रहे हैं और इस पेयर के लिए अगला सपोर्ट लेवल 94.30 के आसपास हो सकता है।

हालांकि हाल के दिनो में डॉलर के मुकाबले रुपए ने कुछ मजबूती हासिल की है,लेकिन ट्रेडर्स अभी भी तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े जोखिम को लेकर सतर्क हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें एक बड़ी आर्थिक चुनौती हैं।

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