इनवेस्टर्स ने रेलवे से जुड़ी जिन कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी दिखाई है, उनमें Rail Vikas Nigam Ltd (RVNL) शामिल है। दरअसल, रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश और रेल सेवाओं को फायदेमंद बनाने की सरकार की कोशिशों की वजह से रेलवे से जुड़े शेयरों में दिलचस्पी बढ़ी है। सरकार रेलवे से माल दुलाई के लिए नई लाइने बना रही है। मौजूदा सिंगल लाइनों को डबल किया जा रहा है। इलेक्ट्रिफिकेशंस पर जोर दिया जा रहा है। इससे रेलवे से जुड़ी कंपनियों को काफी ऑर्डर मिल रहे हैं।
रेलवे के क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश के बावजूद RVNL का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। मार्च तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 11 फीसदी गिरकर 5,719.8 करोड़ रुपये रहा। नेट प्रॉफिट 5 फीसदी घटकर 359.2 करोड़ रुपये रहा। EBITDA में साल दर साल आधार पर 8 फीसदी गिरावट आई। EBITDA मार्जिन 6.5 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 6.3 फीसदी था।
पिछले तीन साल में 500 फीसदी रिटर्न
वेंचुरा सिक्योरिटीज के हेड ऑफ रिसर्च विनित बोलिजकर ने कहा कि कंपनी के नेट प्रॉफिट में गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें मैटेरियल और सर्विसेज की ज्यादा कॉस्ट, प्रोजेक्ट्स पर चल रहे काम में देरी और सरकार से पेमेंट मिलने में देरी शामिल हैं। मजेदार बात यह है कि इस कंपनी के शेयरों में घरेलू संस्थागत निवेशक और पब्लिक शेयरहोल्डर्स जून 2020 से लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। तब से यह शेयर 500 फीसदी चढ़ चुका है।
महंगा है आरवीएनएल का शेयर
वैल्यूएशन के लिहाज से देखा जाए तो आरवीएनएल का शेयर महंगा है। बोलिजकर ने कहा कि कंपनी का पीई 17.6 गुना है। यह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के पीई के मुकाबले ज्यादा है। हालंकि कंपनी का पीई अब भी उसके 20 गुना के उसके हिस्टोरिकल एवरेज से कम है। इस शेयर में उसकी बुक वैल्यू के 1.53 गुना प्रीमियम पर कारोबार हो रहा है। कंपनी के शानदार ऑर्डर बुक को देखने पर यह प्रीमियम सही लगता है।
इस कंपनी की ऑर्डर बुक 56,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसमें से 36,977 करोड़ रुपये का ऑर्डर रेलवे से मिला है। कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर बोली लगाकर हासिल किए हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस ऑर्डर बुक की वजह से अगले कुछ सालों तक कंपनी की कमाई को लेकर तस्वीर साफ है। RVNL का शेयर 1 जून को 1.5 फीसदी की कमजोरी के साथ 118.20 रुपये पर बंद हुआ।