बाजार में तेजी चाहते हैं तो एक महीने के लिए IPO, QIP में नहीं करें निवेश, दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने बताई वजह

हेलियोस कैपिटल के फाउंडर और दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने कहा कि बीते 1.5 से 2 साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इसकी एक बड़ी वजह पेपर्स (शेयरों) की जरूरत से ज्यादा सप्लाई है

अपडेटेड Sep 02, 2026 पर 11:46 AM
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बीते कई महीनों में बाजार में तेजी टिक नहीं पा रही है। हर रिकवरी के बाद गिरावट शुरू हो जाती है।

हेलियोस कैपिटल के फाउंडर और दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने एक खास सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि म्यूचुअल फंड्स को हर आईपीओ से अगले 30 दिनों तक दूर रहना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजारों में हालात बदलने में मदद मिलेगी। पिछले 1.5 से 2 साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इसकी एक बड़ी वजह पेपर्स (शेयरों) की जरूरत से ज्यादा सप्लाई है।

सिर्फ आईपीओ नहीं बल्कि क्यूआईपी से भी दूर रहने की जरूरत

उन्होंने कहा, "इसके बाद हम अपने बाजार के प्रदर्शन को देखेंगे। फिर 30 दिनों तक आप बेच सकते हैं। फिर 30 दिनों के लिए हम निवेश करना रोक देंगे।" उनका मानना है कि न सिर्फ आईपीओ बल्कि क्यूआईपी और शेयरों के प्लेसमेंट्स से भी अगले 30 दिन तक दूर रहने की जरूरत है। उन्होंने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में यह कहा।


बाजार के खराब प्रदर्शन की वजह फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली नहीं

अरोड़ा का मानना है कि शेयर बाजार की प्रॉब्लम फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली नहीं है। वे बीते दो महीनों से भारतीय शेयर बाजारों में खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन, नए इश्यू की बाजार में बाढ़ दिख रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी असल वैल्यूएशंस उतनी नहीं है, जितनी बताई जा रही है।

आईपीओ पेश करने वाली कई कंपनियों के शेयर की कीमतें गिर जाएंगी

हाल में आईपीओ पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों के बारे में उन्होंने कहा कि इनमें से कई शेयरों की कीमत कुछ ही हफ्तों में काफी नीचे आ जाएंगी। अगस्त में 15 कंपनियों के आईपीओ लॉन्च हुए। इनमें से कई कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से औसतन 30 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। शुरुआत में इनमें तेजी दिखती है। लेकिन, 30 दिन बाद छोटे बेयर मार्केट में पता चलेगा कि इनमें से कई 30-40 फीसदी तक गिरते हैं।

वे कंपनियां भी अब आईपीओ पेश कर रही हैं, जो पहले संकोच कर रही थीं

यह पूछने पर कि क्या यह असल में वॉल्यूम प्रॉब्लम है, उन्होंने कहा कि कुछ हद तक ऐसा है। लेकिन, उन्होंने यह भी कहा कि आईपीओ साइकिल मैच्योर पर कमजोर कंपनियां अब आगे आ रही है, जो पहले संकोच कर रही थीं। उन्होंने कहा, "कुछ अच्छी कंपनियों में तो वॉल्यूम ठीक लग रहा है। लेकिन, नए आईपीओ में से कुछ असल में खराब हैं। यह बताता है कि हर कंपनी जो पहले पीछे रह गई थी, अब आईपीओ पेश करना चाहती है।"

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1999 और 2007 में भी पेपर्स की ज्यादा सप्लाई से तेजी थम गई थी

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति खुद में सुधार करने का मौका देती है। उन्होंने बताया कि जब 1999 और 2007 में जब मार्केट पीक पर था तो सिर्फ नए पेपर्स की सप्लाई ने बाजार की तेजी पर रोक लगा दी थी। इसमें विदेशी निवेशकों का कोई हाथ नहीं था। इस बार भी बाजार में पेपर्स की बहुत ज्यादा सप्लाई दिख रही है।

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