Saurabh Mukherjea Top picks: मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सौरभ मुखर्जी ने हाल ही में बताया कि वह इन दिनों 5 शेयरों को लेकर बुलिश हैं। इन शेयरों में एशियन पेंट्स और डिविज लैबोरेटरीज भी शामिल है, जो उनका ऑलटाइम फेवरेट स्टॉक भी हैं। इन कंपनियों को पंसद करने का मुख्य कारण यह है कि ये अपने-अपने क्षेत्र में असंगठित खिलाड़ियों को चुनौती दे रही हैं। इसके अलावा 'चीन+1' थीम से कुछ कंपनियों को फायदा होता दिख रहा है। आइए जानते हैं कि सौरभ मुखर्जी ने किन शेयरों पर और क्यों दांव लगाया है।
सौरभ मुखर्जी ने कहा कि कंज्यूमर्स के बीच स्टेनलेस स्टील सिंक की जगह इन दिनों क्वार्ट्ज सिंक की मांग बढ़ रही है, जिसे कैरीसिल बनाती है। शुरुआत में कैरीसिल ने IKEA के लिए इन सिंक का उत्पादन किया था, लेकिन अब देश में भी इनकी मांग बढ़ रही है। मुखर्जी ने बताया, "स्टेनलेस स्टील सिंक की तुलना में क्वार्ट्ज सिंक महंगे होते हैं, लेकिन इनमें खरोंच या दाग नहीं लगता हैं, और वे किचन की खूबसूरती को भी बढ़ाते हैं।" मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारत में अब पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बैंक खाते में अधिक पैसे हैं, जो क्वार्ट्ज रसोई सिंक जैसे उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दे सकता है।
मुखर्जी ने कहा कि एप्पल को अपने आईफोन से सालाना करीब 200 बिलियन डॉलर की कमाई होती है। भारत में, आईफोन का उत्पादन 3 साल में 10 गुना बढ़ चुका है और अभी इसे और बढ़ाने की योजना है। उन्होंने कहा कि एपल के शेयर भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन कंपोनेंट्स सप्लायर्स के जरिए इस थीम पर दांव खेला जा सकता है। इसका एक उदाहरण इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) है, जो आईफोन के बाहरी कास्ट बनाने में इस्तेमाल होने वाली धातु का उत्पादन करती है।
3. नारायण हृदयालय (Narayana Hrudayalaya)
इस हॉस्पिटल चेन ने हाल ही में एक किफायती हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट लॉन्च किया है। यह मरीजों को सालाना सब्सक्रिप्शन फीस के साथ हॉस्पिटल सेवाएं मुहैया कराता है। मुखर्जी ने कहा कि मरीजों में अक्सर यह डर रहता है कि डॉक्टर बिल बढ़ाने के लिए बिल में अनावश्यक आइटम जोड़ सकते हैं। हालांकि इस प्रोडक्ट के साथ यह जोखिम भी खत्म हो जाता है। फंड मैनेजर ने कहा, "इन-हाउस ओपीडी, दवाओं और जांच के साथ, हितों का यह सारा टकराव दूर हो जाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे इस स्कीम को अच्छी तरह से बढ़ाने में कामयाब रहते हैं, तो आगे चलकर हॉस्पिटल इंडस्ट्रीज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
4. डिविज लैबोरेटरीज (Divis Laboratories)
मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका API मैन्युफैक्चरिंग के मामले में चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए काम कर रहा है। इससे डिविज लैब्स जैसी भारतीय फार्मा कंपनियों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल लेवल पर API का मार्केट 170 से 180 अरब डॉलर है। इसमें चीन अकेले करीब 100 अरब डॉलर की वैल्यू के बराबर API का उत्पादन करता है। वहीं भारत में API का उत्पादन अभी 10 अरब डॉलर के करीब है। अगर भारत चीन से सिर्फ 10 प्रतिशत मार्केट शेयर भी छीन लेता है, तो भारतीय API इंडस्ट्रीज का साइज 3 साल के भीतर दोगुना हो सकता है।
मुखर्जी ने अमेरिका में कंट्रास्ट मीडिया, मेडिकल इमेजिंग में इस्तेमाल की जाने वाली डाई की कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि बड़ी फार्मा कंपनियां अपनी कंट्रास्ट मीडिया जरूरतों के लिए जल्द ही डिविज लैबोरेटरीज की ओर रुख कर सकती हैं। साथ ही डिविज ने पिछली तीन तिमाहियों में बताया कि उसके काकीनाडा प्लांट्स को लगातार कंट्रास्ट मीडिया के ऑर्डर मिल रहे हैं।
5. एशियन पेंट्स (Asian Paints)
कंपनी की शानदार मैनेजमेंट लीडरशिप और पर्याप्त फ्री कैश फ्लो की क्षमता को देखते हुए मुखर्जी कंपनी के होम-डेकोर स्पेस में विस्तार को लेकर बुलिश हैं। उन्होंने कहा कि एशियन पेंट्स का होम-डेकोर मॉडल पारंपरिक तरीकों से बेहतर है। एशियन पेंट्स अपने प्रोजेक्ट्स के के समय पर पूरा होने की गारंटी देती है। मुखर्जी ने कहा कि यह सेगमेंट कंपनी के लिए असंगठित सेगमेंट को भुनाने के साथ ग्रोथ का एक नया मौका भी देता है।
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