SEBI का बड़ा एक्शन, इस कंपनी के ₹15.15 लाख करोड़ रेवेन्यू में गड़बड़ी का आरोप; चेयरमैन पर लगाया ट्रेडिंग बैन
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। कंपनी पर वित्तीय आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और फंड ट्रांसफर में अनियमितता के आरोप हैं। चेयरमैन राजेश मेहता पर ट्रेडिंग बैन भी लगाया गया है। समझिए पूरा मामला।
राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर बुधवार को लगभग 3% बढ़कर ₹109.99 पर बंद हुए।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उसके चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है। SEBI ने कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों में गड़बड़ी, फंड के गलत इस्तेमाल और जांच में सहयोग नहीं करने के शुरुआती आरोप लगाए हैं।
SEBI का दावा है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया। यह रकम इस अवधि में कंपनी के दिखाए गए कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का करीब 99.8% हिस्सा थी।
SEBI को क्या मिला?
109 पन्नों के आदेश में SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कंपनी कई सालों तक ऐसे लेनदेन दिखाती रही, जिनकी वास्तविकता पर सवाल हैं। साथ ही गलत अकाउंटिंग तरीके अपनाए गए। कंपनी के पैसे को निजी खातों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं के जरिए घुमाया गया और निवेशकों को पूरी जानकारी नहीं दी गई।
SEBI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान कंपनी के खातों में कई ऐसे लेनदेन दर्ज किए गए, जिन्हें सत्यापित नहीं किया जा सका। SEBI का आरोप है कि कंपनी ने अपनी और सहयोगी कंपनियों के आंकड़ों को इस तरह पेश किया कि कारोबार और कमाई असल से ज्यादा बड़ी दिखाई दे।
रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप
SEBI का आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों और बाजार के सामने अपने कारोबार और वित्तीय स्थिति की असल तस्वीर नहीं रखी।
रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनी ने करीब 15,15,385 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू गलत तरीके से दिखाया। इसके अलावा वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के दौरान 12,557 करोड़ रुपये के स्टैंडअलोन रेवेन्यू को भी गलत तरीके से पेश किया गया।
निजी ट्रेडिंग को कारोबार दिखाने का आरोप
SEBI के अनुसार, राजेश मेहता के निजी डेरिवेटिव सौदों को कंपनी की बिक्री और खरीद के रूप में दर्ज किया गया।
इसके अलावा 867 करोड़ रुपये और 716 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव को क्रमशः रेवेन्यू और खरीद के रूप में दिखाया गया। म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट से मिले 204 करोड़ रुपये के ब्याज को भी कंपनी ने ऑपरेशन से हुई आय के रूप में दर्ज किया।
अफ्रीका की गोल्ड माइन में निवेश के दावे पर सवाल
SEBI ने कहा कि कंपनी ने अफ्रीका में सोने की खान में निवेश होने का दावा किया था, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। कंपनी अफ्रीका की गोल्ड माइन में निवेश का दावा करती रही, लेकिन जांच में इस दावे को साबित करने वाले दस्तावेज नहीं मिले।
SEBI का आरोप है कि कंपनी के फंड राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के निजी बैंक खातों के जरिए भेजे गए। इन लेनदेन को संबंधित पक्षों के लेनदेन के रूप में नहीं बताया गया और न ही इनके लिए बोर्ड या ऑडिट कमेटी की मंजूरी ली गई।
अब आगे क्या होगा?
SEBI ने कंपनी के ऑडिटरों की भूमिका की जांच के लिए मामले को National Financial Reporting Authority (NFRA) के पास भी भेजा है। साथ ही राजेश एक्सपोर्ट्स को जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने, मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने और सही वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।
SEBI ने अगले आदेश तक राजेश मेहता को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों की खरीद-बिक्री से रोक दिया है। इसके अलावा कंपनी का नया फोरेंसिक ऑडिट कराने का भी आदेश दिया गया है।
राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों का हाल
राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर बुधवार को लगभग 3% बढ़कर ₹109.99 पर बंद हुए। हालांकि, 2026 में अब तक शेयर में 38% से अधिक की गिरावट आई है। पिछले 5 साल में यह स्टॉक करीब 80% क्रैश हुआ है। इसका मार्केट कैप 3.25 हजार करोड़ रुपये है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।