Jane Street पर सेबी के बैन से ऑप्शंस सेलर्स के लौट सकते हैं अच्छे दिन

इंडिया में जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों को लेकर तब विवाद शुरू हुआ था, जब 18 अप्रैल, 2024 के बाद से मार्केट्स में अप्रत्याशित उतारचढ़ाव शुरू हुआ जिससे इंडियन ऑप्शंस ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा। मार्केट में अचानक ज्यादा उतारचढ़ाव सामान्य नहीं था

अपडेटेड Jul 04, 2025 पर 11:40 AM
सेबी के अंतरिम फैसले में जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों को तीन महीने या कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी में जो भी पहले हो, पर अपनी पोजीशंस क्लोज या स्केवयर ऑफ करने को भी कहा गया है।

सेबी के जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों पर बैन लगा देने से ऑप्शंस सेलर्स ने राहत की सांस ली है। कई ट्रेडर्स को जेन स्ट्रीट से शिकायत थी। उनका मानना रहा है कि जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों की ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी और मार्केट में मैनिपुलेशन से उन्हें नुकसान हुआ। इंडिया में जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों को लेकर तब विवाद शुरू हुआ था, जब 18 अप्रैल, 2024 के बाद से मार्केट्स में अप्रत्याशित उतारचढ़ाव शुरू हुआ जिससे इंडियन ऑप्शंस ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा।

ऑप्शंस सेलर्स को हो रहा था नुकसान

मार्केट में अचानक ज्यादा उतारचढ़ाव सामान्य नहीं था। इसकी वजह मैनिपुलेशन थी। आम तौर पर ऑप्शंस सेलर्स को ऑप्शंस कीमतों में समय के साथ आने वाली गिरावट से प्रॉफिट होता है। लेकिन, अचानक कीमतों में उछाल से स्टॉपलॉस ऑर्डर्स ट्रिगर होने लगे जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। कई ट्रेडर्स और ब्रोकर्स ने इसकी शिकायत SEBI से की। इसके बाद रेगुलेटर ने जेन स्ट्रीट की सिंगापुर की एक कंपनी के खिलाफ जांच की। लेकिन, जांच के बाद कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई।


एनएसई की जांच से मार्केट पार्टिसिपेंट्स नाखुश

एनएसई की जांच के नतीजों से मार्केट पार्टिसिपेंट्स खुश नहीं थे। उनका कहना था कि कई कंपनियों के मिलकर मार्केट मैनिपुलेट करने का संदेह था। लेकिन, एनएसई ने सिर्फ एक कंपनी के खिलाफ जांच की। इस जांच में व्यापक दायरे में मैनिपुलेशन की जांच नहीं की गई। लेकिन, 3 जुलाई के SEBI के फैसले के बाद यह पूरा मामला व्यापक जांच के दायरे में आ गया है। सेबी ने अपने आदेश में गलत तरीके से हुए 4,843 रुयये के प्रॉफिट को वापस करने को भी कहा है। यह पैसा जेन स्ट्रीट को एस्क्रॉ बैंक अकाउंट में डिपॉजिट करना होगा।

जेन स्ट्रीट को अपने कॉन्ट्रैक्ट्स क्लोज करने के आदेश

सेबी के अंतरिम फैसले में जेन स्ट्रीट ग्रुप की कंपनियों को तीन महीने या कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी में जो भी पहले हो, पर अपनी पोजीशंस क्लोज या स्केवयर ऑफ करने को भी कहा गया है। इन पोजीशंस के क्लोज होने से मार्केट में सामान्य प्राइस डिस्कवरी देखने को मिल सकती है। इस मैनिपुलेशंस से खासकर ऑप्शंस ट्रेडर्स को बहुत नुकसान होता था, जिनका फोकस एक्सपायरी डे पर होता था। कीमतों में गिरावट से उन्हें प्रॉफिट कमाने का मौका मिलता है। लेकिन, अचानक कीमतों में उतारचढ़ाव से प्रॉफिट की जगह उन्हें लॉस होता था।

सेबी के बैन से ऑप्शंस सेलर्स का भरोसा लौटेगा

ऑप्शंस ट्रेडर्स को नुकसान इतना ज्यादा होने लगा कि कई ट्रेडर्स और ट्रेडिंग हाउसेज को अपना ऑपरेशंस बंद तक करने को मजबूर होना पड़ा। सेबी के एक हफ्ते में सिर्फ दो दिन एक्सपायरी ट्रेडिंग के आदेश के बात तो हालात और मुश्किल हो गए। इससे एक्सपायरी डे ट्रेडर्स के लिए बिजनेस को जारी रखना मुश्किल हो गया। उम्मीद है कि सेबी के जेन स्ट्रीट पर बैन लगाने से ऑप्शंस ट्रेडर्स का भरोसा लौटेगा। सेबी को यह भी ध्यान रखना होगा कि आगे इस तरह के मैनिपुलेशन को जल्द पकड़ा जाए।

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ऑप्शंस मार्केट आर्किटेक्चर की कमियां दूर करनी होगी

हालांकि, क्यूसी अल्फा के फाउंडर और सीईओ तन्मय कुरकोटी की इस बारे में अलग राय है। उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। इससे एक्सपायरी डे के दौरान इंडियन ऑप्शंस मार्केट आर्किटेक्चर की कमजोरी उजागर होती है। इससे सर्विलांस के मामले में रिफॉर्म की जरूरत का भी पता चलता है। जेन स्ट्रीट ने मौजूदा मार्केट स्ट्रक्चर की कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश की थी। जेन स्ट्रीट ने टेक्नोलॉजी आधारित ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी अपनाई, जिसके लिए रिटेल पार्टिसिपेंट्स तैयार नहीं थे।

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