'रिश्ते में हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है SEBI', जानिए कैसे सेबी के शिकंजे में फंसा केतन पारेख

सेबी के होल-टाइम डायरेक्टर कमलेश वार्ष्णेय ने 2 जनवरी को इस घोटाले में अंतरिम ऑर्डर पारित किया। इस आदेश में शामिल बातें किसी जासूसी उपन्यास का अहसास कराती हैं। सेबी ने यह बताया है कि पारेख पर किस तरह शिंकजा कसा गया और उस तक पहुंचने के लिए मार्केट रेगुलेटर ने किस तरह प्लानिंग की

अपडेटेड Jan 03, 2025 पर 3:12 PM
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सेबी ने उस फ्रंट-रनिंग शेयर घोटाले का खुलासा कर दिया है, जिसका सरगना केतन पारेख था।

अपराधी चाहे लाख चालाकी कर ले, वह कुछ न कुछ सुराग छोड़ ही देता है। यह सु्राग उस तक पहुंचने में पुलिस की मदद करता है। हम बात कर रहे हैं शेयर घोटाला करने वाले केतन पारेख की। उस तक सेबी के पहुंचने की कहानी किसी चोर तक पुलिस के पहुंचने की कहानी से ज्यादा दिलचस्प है। पारेख ने शेयर घोटाले को अंजाम देने में खूब चालाकी की। लेकिन, वह सेबी की पकड़ में आने से नहीं बच सका। सेबी ने उस फ्रंट-रनिंग शेयर घोटाले का खुलासा कर दिया है, जिसका सरगना केतन पारेख था।

सेबी ने 2 जनवरी को अंतरिम ऑर्डर दिया

सेबी  के होल-टाइम डायरेक्टर कमलेश वार्ष्णेय ने 2 जनवरी को इस घोटाले में अंतरिम ऑर्डर पारित किया। इस आदेश में शामिल बातें किसी जासूसी उपन्यास का अहसास कराती हैं। सेबी ने यह बताया है कि पारेख पर किस तरह शिंकजा कसा गया और उस तक पहुंचने के लिए मार्केट रेगुलेटर ने किस तरह प्लानिंग की। कैसे उन कई मोबाइल नंबरों के तार केतन पारेख से जुड़े होने के सबूत इकट्ठे किए गए, जिनका इस्तेमाल उसने फ्रंट रनिंग घोटाले को अंजाम दने के लिए किए थे।


कई ठिकानों पर मारे गए छापों में मोबाइल हैंडसेट्स मिले थे

सेबी (SEBI) को फ्रंट-रनिंग घाटाले से जुड़े सर्च और सीजर ऑपरेशन में कई मोबाइल मिले थे। इनमें लगे सिम के आधार पर इन मोबाइल नंबरों की जांच की गई। पता चला कि इन मोबाइल में ऐसे कई नंबर थे, जिन्हें जैक, जॉन, भाई और व्हिसलब्लोअर जैसे फर्जी नामों से सेव किया गया था। सेबी के सामने इन नंबरों और केतन पारेख के बीच संबंध स्थापित करने का चैलेंज था। पहले फोन के IMEI नंबरों के जरिए इन फोन नंबरों को ट्रैक किया गया।

कुछ हैंडसेट का इस्तेमाल अलग-अलग सिम नंबर के लिए किया गया था

पारेख पकड़े जाने से बचने के लिए अक्सर सिम कार्ड बदल लेता था। लेकिन, वह हैंडसेट ज्यादा नहीं बदलता था। यही उसकी बड़ी भूल साबित हुई। सेबी ने जांच में यह पाया कि फ्रंट-रनर्स को बार-बार निर्देश देने के लिए कुछ खास IMEI नंबर वाले हैंडसेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उदाहरण के लिए पारेख ने ऐसा मोबाइल नंबर सब्मिट किया था जिसके अंतिम चार अंक 8243 थे। यह नंबर वैसे तो उसकी पत्नी का था, लेकिन इसका इस्तेमाल वह करता था। इस नंबर का इस्तेमाल जिस हैंडसेट से किया जा रहा था, उसी IMEI वाले हैंडसेट का इस्तेमाल एक दूसरे नंबर के लिए किया गया था, जिसके आखिरी चार अंक 9917 थे।

पारेख ने जो हैंडसेट सौंपे थे उनका इस्तेमाल दूसरे सिम के लिए भी किया गया

पारेख ने सेबी को दिए बयान में कहा था कि अंतिम चार अंक 2996 वाला मोबाइल नंबर उसका है। उसके साथी रोहित सालगांवकर ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह नंबर पारेख का है। लेकिन, जांच में यह पाया गया कि इस नंबर के जिस IMEI वाले हैंडसेट का इस्तेमाल किया गया था, उसी का इस्तेमाल एक दूसरे नंबर के लिए भी किया गया था जिसके चार आखिरी अंक 1068 थे। इसके बाद सेबी ने ऐसे सभी नंबरों की कॉल-रिकॉर्ड डिटेल निकलवाई। इससे पता चला कि किन-किन जगहों से इन नंबरों का इस्तेमाल रात 9 बजे से लेकर सुबह 6 बजे के बीच कॉल करने के लिए किया गया था।

खास नंबरों से की गई कॉल की लोकेशन का मिलान पारेख की ट्रैवल हिस्ट्री से किया गया

सेबी की जांच में यह साफ हो गया कि ज्यादातर समय इन नबंरों का इस्तेमाल केतन के घर के पते से कॉल करने के लिए किया गया था। उसके बाद सेबी इन नंबरों के इस्तेमाल के लोकेशन का मिलान पारेख के ट्रेवल हिस्ट्री से की। इसमें यह पाया गया का इन नंबरों का इस्तेमाल उन होटलों से कॉल करने के लिए किया गया, जहां केतन पारेख अलग-अलग समय पर ठहरा था। तब सेबी ने होटल के स्टाफ से पूछताछ की। इससे यह साफ हो गया कि पारेख उन होटलों में उन तारीखों को रुका था, जिन तारीखों में उन नंबरों का इस्तेमाल कॉल करने के लिए किया गया था। ये सबूत पारेख को घाटाले का दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त थे।

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