सेबी ने डुप्लीकेट सिक्योरिटीज सर्टिफिकेट्स इश्यू करने की प्रक्रिया आसान बना दी है। रेगुलेटर ने इनवेस्टर्स राइट्स की सुरक्षा और निवेश में आसानी के लिए ऐसा किया है। रेगुलेटर ने इस बारे में 24 दिसंबर को एक सर्कुलर इश्यू किया। इसमें डॉक्युमेंट्स से जुड़े आसान नियमों का इस्तेमाल 10 लाख रुपये तक के शेयरों के लिए किया जा सकेगा। पहले इसके लिए 5 लाख रुपये तक की सीमा तय थी। ऐसे रिक्वेस्ट के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स के स्टैंडर्ड्स भी तय किए गए हैं।
कम वैल्यू के मामलों में नोटोराइजेशन की जरूरत खत्म
संशोधित फ्रेमवर्क के तहत, ऐसे इनवेस्टर्स जिनके सिक्योरिटीज की वैल्यू 10 लाख रुपये तक है, उन्हें अब स्टैंडर्ड ऐफिडेविट-कम-इंडेमनिटी बॉन्ड सब्मिट करना होगा। 10,000 रुपये तक की वैल्यू वाले सिक्योरिटीज पर सिर्फ प्लेन पेपर पर अंडरटेकिंग देना होगा। कम वैल्यू के सिक्योरिटीज के मामलों में नोटोराइजेशन को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
10 लाख रुपये से ज्यादा के मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा
10 लाख रुपये से ज्यादा की सिक्योरिटीज के मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा के उपाय किए गए हैं। इनमें एफआईआर या कोर्ट से संबंधित डॉक्युमेंट्स पहले की तरह जरूरी होंगे। साथ ही लिस्टेड कंपनी की तरफ से न्यूजपेपर एडवर्टाइजमेंट भी जरूरी होगा। सेबी ने इस बारे में एक ड्राफ्ट सर्कुलर पेश किया था। इसमें नियमों में बदलाव को जरूरी बताया गया था।
सेबी ने इस बारे में पहले पेश किया था सर्कुलर
सेबी के ड्राफ्ट सर्कुलर में कहा गया था, "दो अलग-अलग फॉर्म के इस्तेमाल और अलग-अलग स्टैंप ड्यूटी के पेमेंट्स से एक ही काम दो बार करना पड़ता है। इससे इनवेस्टर्स को असुविधा होती है। कई बार सिक्योरिटीज की वैल्यू स्टैंप ड्यूटी की वैल्यू से कम होती है। ऐसे मामलों में दो अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स पर स्टैंप ड्यूटी का पेमेंट सही नहीं हो सकता।"
पहले से किए गए रिक्वेस्ट्स पर भी लागू होंगे नए नियम
सेबी ने सर्कुलर में शेयर गुम होने के बारे में एडवर्टाइजिंग के इंडस्ट्री के प्रैक्टिसेज को भी शामिल किया था। सर्कुलर में कहा गया था कि लिस्टेड कंपनीज को इनवेस्टर्स की तरफ से न्यूजपेपर में एडवर्टाइजमेंट देना होगा। संशोधित नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। ये पहले लंबित रिक्वेस्ट्स पर भी लागू होंगे। रेगुलेटर ने कहा है कि ये बदलाव प्रोसेस को ज्यादा प्रभावी और इनवेस्टर फ्रेंडली बनाने के लिए किए गए है।