SEBI News: सेबी चीफ के खिलाफ किसी तरह की कोई जांच नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि जांच की बात पूरी तरह गलत है। इससे पहले मंगलवार को इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में, सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि बाजार रेगुलेटर सेबी (SEBI) की प्रमुख माधबी या उनके परिवार के खिलाफ सरकार को जांच में कुछ नहीं मिला है। लेकिन ये खबर पूरी तरफ अफवाह साबित हुई है। और वित्त मंत्रालय की प्रवक्ता ने साफ कर दिया है कि सेबी चीफ के खिलाफ कोई जांच नहीं हुई थी।
SEBI Chief जूझ रही हैं कई आरोपों से
पिछले कुछ महीनों में सेबी प्रमुख माधुबी पुरी बुच को कई आरोपों का सामना करना पड़ा है। पहले तो अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने उन पर आरोप लगाए और और बाद में कांग्रेस पार्टी ने। ये आरोप अदाणी ग्रुप से जुड़े ऑफशोर फंडों में उनके निवेश और कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन से जुड़े हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ था, जब हिंडनबर्ग रिसर्च ने हितों के टकराव और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों पर सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच की चुप्पी पर सवाल उठाए। हिंडनबर्ग का कहना था कि बुच के अदाणी ग्रुप के साथ अघोषित वित्तीय संबंध हो सकते हैं, जिसकी जांच भी चल रही है।
यह विवाद उस वक्त और बढ़ गया, जब कांग्रेस ने हमले तेज कर दिए। कांग्रेस नेता पवन खेरा ने 2 सितंबर 2024 को बुच पर सेबी चीफ बनने के बाद भी ICICI बैंक से इनकम हासिल करने का आरोप लगाया था। खेरा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि बुच ने 2017 से 2024 के दौरान ICICI बैंक से 17 करोड़ रुपये की सैलरी हासिल की। इसके अलावा सेबी के कुछ एंप्लयीज ने माधबी पर ऑफिस में खराब माहौल बनाने वाला बताया लेकिन अब यह मामला सुलझ चुका है।
माधबी का क्या कहना है आरोपों पर?
आरोपों के जवाब में माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट में किए गए दावों को निराधार और बेबुनियाद बताया था। दोनों का कहना था कि उनके वित्तीय रिकॉर्ड पारदर्शी हैं और इन आरोपों का मकसद 'चरित्र हनन' करना है। बुच दंपति ने इस सिलसिले में संयुक्त बयान जारी कर हिंडनबर्ग के दावों को खारिज किया था। दंपति का कहना था कि फंड में उनका निवेश दो साल पहले किया था, जब बुच ने सेबी नहीं ज्वाइन किया था।