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SEBI के एफएंडओ ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने से डब्बा ट्रेडिंग का रुख कर सकते हैं रिटेल इनवेस्टर्स

SEBI ने इस हफ्ते की शुरुआत में एक कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इसमें फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स के पार्टिसिपेशन पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रस्ताव हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इन प्रस्तावों के लागू होने से रिटेल इनवेस्टर्स ट्रेडिंग के अवैध चैनल का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 02, 2024 पर 5:18 PM
SEBI के एफएंडओ ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने से डब्बा ट्रेडिंग का रुख कर सकते हैं रिटेल इनवेस्टर्स
डब्बा ऑपरेटर्स बुकीज की तरह काम करते हैं। इसमें शेयरों की दिशा क्या होगी, इस पर सट्टा लगाया जाता है।

फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में रिटेल ट्रेडर्स के पार्टिसिपेशन पर अंकुश लगाने की सेबी की कोशिशों का गलत असर पड़ सकता है। रिटेल इनवेस्टर्स डब्बा ट्रेडिंग या गैंबलिंग साइट्स का रुख कर सकते हैं। डब्बा ट्रेडिंग अवैध है। डब्बा ट्रेडिंग में शेयरों की खरीदफरोख्त के लिए स्टॉक एक्सचेंज का इस्तेमाल नहीं होता है। सौदों का निपटारा डब्बा ट्रेडिंग की सुविधा देने वाला व्यक्ति के जरिए होता है। कोई व्यक्ति बगैर डीमैट अकाउंट या केवायसी शेयरों या सूचकांकों पर दांव लगा सकता है।

डब्बा ट्रेडिंग का मतलब क्या है?

डब्बा ऑपरेटर्स (Dabba Operators) बुकीज की तरह काम करते हैं। इसमें शेयरों की दिशा क्या होगी, इस पर सट्टा लगाया जाता है। इसमें अपफ्रंट मार्जिन जैसी कोई चीज नहीं होती है। प्रॉफिट पर टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है। कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि डब्बा ट्रेडिंग का आकार काफी बड़ा हो गाय है। इसकी वजह स्टॉक मार्केट में पिछले कई महीनों से जारी तेजी है। बिगुल के सीईओ अतुल पारेख ने कहा कि सेबी ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन ट्रेडिंग में कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाने का प्लान बनाया है। इससे डेरिवेटिव मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स का पार्टिसिपेशन घटेगा। लेकिन, इससे डब्बा ट्रेडिंग में वॉल्यूम बढ़ सकता है। रिटेल इनवेस्टर्स मुनाफे के लिए डब्बा ट्रेडिंग का रुख कर सकते हैं।

 

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