शेयर मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने IIFL सिक्योरिटीज पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशंस) रूल्स के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में की गई है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने 21 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि ब्रोकर ने 'फंड आधारित समझौते' को आगे बढ़ाने के लिए 136 क्लाइंट्स को 17.43 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जिसमें क्लाइंट्स से पैसे उधार लेने का मामला भी शामिल है।
सेबी के मुताबिक, ब्रोकर दो लेजर मेंटेन कर रहा था-मार्जिन डिपॉजिट लेजर और ट्रेडिंग लेजर। सेबी के अधिकारियों ने पहले लेजर और 20 क्लाइंट्स के सैंपल की जांच करते हुए पाया कि ब्रोकर इन सभी क्लाइंट्स से पैसे इकट्ठा कर रहा था और इन पर तय दर से ब्याज दे रहा था। ऑर्डर में कहा गया है कि 15.51 करोड़ का भुगतान सैंपल में शामिल 20 क्लाइंट्स को किया गया था और इस पर ब्याज दर 4-5 पर्सेंट सालाना थी।
जांच में यह भी पता चला कि क्लाइंट, ब्रोकर से फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने का निर्देश दे रहा था। हालांकि, लेजर्स के मुताबिक, ऐसा कोई भी डिपॉजिट नहीं बनाया गया है। ट्रेडिंग फंड में जमा किए क्लाइंट्स के फंड का इस्तेमाल ट्रेडिंग और मार्जिन की शर्तों को पूरा करने में किया गया और ब्रोकर इस रकम के इस्तेमाल के लिए क्लाइंट्स का भुगतान कर रहा था।
यह भी पाया गया कि कुछ क्लाइंट्स IIFL फाइनेंस (NBFC) से फंड हासिल कर रहे थे और ये यही रकम ब्रोकर को भुगतान कर रहे थे। सेबी के आदेश में कहा गया है कि ब्रोकर इन फंडों के इस्तेमाल के बदले तकरीबन 11 पर्सेंट ब्याज दे रहे थे। बाकी उल्लंघनों में क्लाइंट के लेजर बैलेंस की गलत रिपोर्टिंग, मार्जिन ट्रेडिंग फंड के लिए तय सीमा का उल्लंघन, कुछ क्लाइंट्स को गलत लेजर बैलेंस की रिपोर्टिंग आदि शामिल हैं।