SEBI का ट्रांजैक्शन चार्ज पर नया सर्कुलर आया है। सेबी ने कहा कि डिस्काउंट ब्रोकरों के ट्रांजैक्शन चार्ज में पारदर्शिता आनी चाहिए। एक्सचेंज का ट्रांजैक्शन चार्ज में भेदभाव नहीं करना चाहिए। एक्सचेंज सभी ग्राहकों के लिए एक जैसा फीस स्ट्रक्चर बनाएं। सेबी का कहना है कि दरों में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को मिलना चाहिए। सेबी ने कहा है कि मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूट्स (MIIs) टर्नओवर के आधार पर डिस्काउंट ना दें। बता दें कि MIIs में स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन आते हैं। इस खबर के चलते आज Angel One सहित , 5paisa,IIFL Securities और ICICI Securities जैसे स्टॉक दबाव में दिख रहे हैं।
Angel One भारी दबाव में कारोबार कर रहा है। फिलहाल एनएसई पर ये शेयर 217.45 अंक यानी 8.43 फीसदी की कमजोरी के साथ 2360 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। आज का स्टॉक का दिन का हाई 2,448.85 रुपए और दिन का लो 2,312.55 रुपए का है। स्टॉक का 52 वीक हाई 3,896.00 रुपए और 52 वीक लो 1,452.00 रुपए का है। स्टॉक का ट्रेडिंग वॉल्यूम 3,983,267 शेयरों के आसपास है।
5paisa 6.05 रुपए यानी 1.19 फीसदी की कमजोरी के साथ 501 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज का इसका दिन का हाई 502.40 रुपए और दिन का लो 482.35 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 758.45 रुपए है।
IIFL Securities 6.98 रुपए यानी 3.30 फीसदी की तेजी के साथ 204 रुपए के आसपास नजर आ रहा है। वहीं, ICICI Securities 6.95 रुपए यानी 0.91 फीसदी की कमजोरी के साथ 756 रुपए के आसपास दिख रहा है।
अभी कैसे होता है ट्रांजैक्शन चार्ज?
अभी कई ब्रोकर्स को टर्नओवर स्लैब के हिसाब से डिस्काउंट देते हैं। सूत्रों के मुताबिक डिस्काउंट ब्रोकर्स की 15-30 फीसी कमाई ट्रांजैक्शन चार्ज डिस्काउंट से होती है। सूत्रों के मुताबिर डीप डिस्काउंट ब्रोकर्स का 50-70 फीसदी रेवेन्यू ट्रांजैक्शन चार्ज डिस्काउंट से आता है। ग्राहकों से रोज ट्रांजैक्शन चार्ज लिया जाता है। लेकिन ब्रोकर एक्सचेंज को महीने के हिसाब से देते हैं।
SEBI चाहता है कि ट्रांजैक्शन चार्ज में पारदर्शिता आए। एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज में भेदभाव ना करें एक्सचेंज सभी ग्राहकों के लिए एक जैसा फीस स्ट्रक्चर बनाएं। दरों में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को मिले। ये नए नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू होंगे।
जैसा कि मैंने पहले ही कहा था कि किसी भी रेग्युलेटेड कारोबार के लिए रेग्युलेटरी जोखिम सबसे बड़ा जोखिम होता है। हम आप्शन ट्रेडिंग के उफान के दौर के बीच में हैं। इंडेक्स ऑप्शन में वॉल्यूम 2018 में 4.6 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में 138 लाख करोड़ हो गया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि इसमें रिटेल का हिस्सा 2 फीसदी से बढ़कर 41 फीसदी हो गया है। ऑप्शन ट्रेडिंग के बढ़ते वॉल्यूम का सबसे ज्यादा फायदा हमें मिला लेकिन हमें पता है रेगुलेशन की वजह से आय में कभी भी बहुत बड़ी गिरावट आ सकती है। ब्रोकिंग इंडस्ट्री के लिए आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं क्योंकी सभी का बिजनेस मॉडल ऑप्शन से होने वाली आय पर निर्भर है। कल हो ना हो इस बात को कहने का एक अच्छा तरीका है!