SEBI की समिति में हितों के टकराव पर पहली बार हुई चर्चा, जानिए सदस्यों ने दिए क्या-क्या सुझाव

इस मीटिंग में शामिल एक सूत्र ने बताया कि बैठक में कई तरह के सुझाव सामने आए। इसमें ओम्बड्समैन जैसा सिस्टम बनाने का सुझाव भी सामने आया, जो सेबी से स्वतंत्र होगा। पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व चीफ विजिलेंस कमिश्नर प्रत्युष सिन्हा इस कमेटी के चेयरमैन हैं

अपडेटेड May 20, 2025 पर 3:07 PM
स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस और डिपॉजिटरीज के एंप्लॉयीज को उन सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग की इजाजत नहीं है, जिनका रेगुलेशन उनके तहत आता है।

सेबी की एक उच्च-स्तरीय समिति की बैठक में 16 मई को हितों के टकराव के मसले पर चर्चा हुई। बैठक में समिति के सदस्यों ने इस बारे में बातचीत की कि क्या हितों के टकराव से जुड़े नियमों को और सख्त बनाने की जरूरत है। कई सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व चीफ विजिलेंस कमिश्नर प्रत्युष सिन्हा इस कमेटी के चेयरमैन हैं। इस मीटिंग में शामिल एक सूत्र ने बताया कि बैठक में कई तरह के सुझाव सामने आए। इसमें ओम्बड्समैन जैसा सिस्टम बनाने का सुझाव भी सामने आया, जो सेबी से स्वतंत्र होगा।

कई पक्षों के प्रतिनिधि इस बैठक में हुए शामिल

इस बैठक में मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs), इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट्स और दूसरे पक्ष भी शामिल हुए। बैठक में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि चीफ विजिलेंस अफसर (CVO) के मौजूदा स्ट्रक्चर पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, क्योंकि इसमें हितों का टकराव हो सकता है। SEBI के बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों के शेयरों की ट्रेडिंग करने पर पूरी तरह से रोक लगाने के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ। एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका की तरह इंडिया में भी संसद की स्थायी समिति की उच्च-स्तरीय जांच पर विचार होना चाहिए।


विदेश जैसे नियम इंडिया में लागू किए जा सकते हैं

इस बैठक में शामिल कुछ लीगल एक्सपर्ट्स ने हितों के टकराव पर कोड्स को लेकर भी सुझाव दिए। कुछ का कहना था कि ऐसी व्यवस्था विकसित देशों में है। इन देशों में लोगों को रेगुलेटर में जिम्मेदार पदों पर नियुक्त किया जाता है। कुछ देशों में हितों के टकराव से जुड़े मसलों के लिए पेनाल्टी के प्रावधान हैं। एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस के लिए हितों के टकराव का मसला स्टॉक एक्सचेंजेज एंड क्लियरिंग कॉर्पोरेशन (SECC) रेगुलेशंस के तहत आता है।

अभी क्या है हितों के टकराव के नियम

स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस और डिपॉजिटरीज के एंप्लॉयीज को उन सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग की इजाजत नहीं है, जिनका रेगुलेशन उनके तहत आता है। ऐसे प्रतिबंध MIIs के एंप्लॉयीज, उनके पति/पत्नी और बच्चों पर भी लागू होते हैं। एक्सचेंजों और MIIs के एंप्लॉयीज को एंप्लॉयी स्टॉक्स ऑप्शंस (ESOPs) एलॉट नहीं किए जा सकते। हितों से टकराव से जुड़े सेबी के मौजूदा नियमों को दिसंबर 2008 में सेबी के बोर्ड ने मंजूरी दी थी। तब सीबी भावे सेबी के चेयरमैन थे। उसके बाद इन नियमों में संशोधन हुए हैं।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद यह मसला सुर्खियो में है

मौजूदा नियम हितों के टकराव को लेकर सामान्य सिद्धांतों पर आधारित हैं। हालांकि, किसी दूसरे फाइनेंशियल रेगुलेटर में इस तरह का कोड मौजूद नहीं है। सेबी के एंप्लॉयीज पर SEBI (Employess' Service) रेगुलेशंस, 2001 भी लागू होते हैं। इसमें प्राइवेट ट्रेडिंग, निवेश पर प्रतिबंध, शेयरों में सट्टेबाजी और निवेश में अपने पद के दुरुपयोग के बारे में बताया गया है। गिफ्ट स्वीकार करने पर भी प्रतिबंध है। ध्यान में रखने वाली बात है कि हितों के टकराव का मसला हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया था।

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