सेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी और भ्रामक कंटेट के 8,890 मामलों की पहचान की है। इनसे जुड़े अकाउंट्स के खिलाफ झूठे दावों के लिए कार्रवाई की जाएगी। मार्केट रेगुलेटर ने इस बारे में संबंधित प्लेटफॉर्म्स और ऐप्स के बारे में आधाकारिक जानकारी दी है। इनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब आदि शामिल हैं। स्टॉक मार्केट के बारे में झूठे दावों को प्रचारित करने के लिए इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
फिनफ्लूएंसर्स के खिलाफ सेबी ने बढ़ाई सख्ती
इस बारे में सरकार की तरफ से राज्यसभा में दी गई जानकारी में कहा गया है, "17 जुलाई, 2024 तक SEBI ने स्टॉक मार्केट से जुड़े 8,890 गैरकानूनी/भ्रामक सोशल मीडिया कंटेंट से संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लीगल एक्शन के बारे में जानकारी दी है।" पिछले एक साल से सेबी ऐसे भ्रामक या गैरकानूनी सलाह पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहा है जो फाइनेंशियल इनफ्लूएंसर्स या फिनफ्लूएंसर्स की तरफ से दिए जाते हैं।
सेबी में बगैर रजिस्ट्रेशन इनवेस्टमेंट टिप्स दे रहे
इनमें से ज्यादातर इनफ्लूएंसर्स स्वघोषित हैं जो बगैर रजिस्ट्रेशन के निवेशकों को स्टॉक्स के बारे में टिप्स और निवेश की सलाह देते आ रहे हैं। इससे निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ जाता है। सेबी ने कहा है कि निवेशकों को गारंटीड रिटर्न का वादा किया जाता है। उन्हें कनफ्यूज करने के लिए तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। सोशल मीडिया और विज्ञापनों में भ्रामक प्रमाण पेश किए जाते हैं।
शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी का फायदा उठाने की कोशिश
सेबी ने इस बारे में तब अपनी सख्ती बढ़ाई है जब शेयरों में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। मार्च 2024 में डीमैट अकाउंट्स की संख्या बढ़कर 15.1 करोड़ पहुंच गई। सोशल मीडिया इनफ्लूएंसर्स अब बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर में भी दाखिल हो गए हैं। Kofluence की 2024 इनफ्लूएंसर मार्केटिंग रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया के इनफ्लूएंसर मार्केटिंग स्पेस में बीएफएसआई सेक्टर की करब 15.4 फीसदी हिस्सेदारी है।
यह भी पढ़ें: क्या किसी शेयर को खरीदने और बेचने के गलत फैसले के लिए Mutual Fund Manager को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
सेबी ने 27 मई को जारी किया था ड्रॉफ्ट सर्कुलर
फाइनेंशियल एडवाइस के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता को देखते हुए सेबी ने 27 मई को एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया था। इसमें इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (AI) को सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी के बारे में डिटेल जानकारी देने को कहा गया था। उन्हें अपने अकाउंट्स, पेजेज और चैनल के बारे में भी बताने को कहा गया था। उन्हें साल में दो बार यह जानकरी देनी है।