कोविड की महामारी के बाद से इंडिया में डेरिवेटिव ट्रेडिंग काफी बढ़ी है। आज एक्टिव करीब 80 फीसदी डीमैट अकाउंट्स अप्रैल 2020 के बाद खुले हैं। इससे डेरिवेटिव ट्रेंडिंग के मामले में इंडियन मार्केट दुनिया में पहले पायदान पर आ गया है। दुनिया में एक्सचेंजों में होने वाली कुल डेरिवेटिव ट्रेडिंग में इंडिया की हिस्सेदारी 30-50 फीसदी तक पहुंच गई है। रेगुलेटर्स ने इससे जुड़े रिस्क पर कई बार चिंता जताई है। इस हफ्ते सेबी ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया। रिटेल इनवेस्टर्स को बड़े नुकसान से बचाने के लिए सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया है।
सेबी के पास स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग के ठोस सबूत
सेबी का मानना है कि पिछले कुछ सालों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivative Trading) के बढ़ते वॉल्यूम में इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट (Index Options Contracts) का बड़ा हाथ है। इसके अलावा नोशनल और प्रीमियम टर्नओवर और वोलैटिलिटी के डेटा के आधार पर सेबी ने यह साबित किया है कि इंडेक्स-ऑप्शंस में बढ़ती एक्टिविटी में एक्सपायरी डे ट्रेडिंग का बड़ा हाथ है। एक्सपायरी से कुछ मिनट पहले ओपन इंटरेस्ट (OI) का हाई वॉल्यूम इस बात का संकेत है कि पार्टिसिपेंट्स कुछ ही मिनट के अंदर पॉजिशन एनिशिएट और क्लोज करते हैं। यह स्पेकुलेटिव ट्रेड है।
'जीरो टू हीरो स्ट्रेटेजी' का इस्तेमाल करते हैं ट्रेडर्स
एक्सपायरी के दिनों में डीप-ओटीएम ऑप्शंस में इस तरह की स्पेकुलेटिव स्ट्रेटेजी को आम तौर पर 'जीरो टू हीरो स्ट्रेटेजी' कहा जाता है। यह स्ट्रेटेजी एक तरह से गैंबलिंग (जुआ) की तरह है। इसमें सफलता की संभावना काफी कम होती है, इसलिए एंट्री कॉस्ट भी कम होती है। मोटा मुनाफा कमाने की गुंजाइस और एंट्री कॉस्ट कम होने से नए ट्रेडर्स के बीच यह स्ट्रेटेजी बहुत लोकप्रिय हो चुकी है।
F&O के हर 10 में 9 रिटेल ट्रेडर्स को लॉस
आम तौर पर यह माना जाता है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग से प्राइस डिस्कवरी, मार्केट लिक्विडिटी और रिस्क मैनेजमेंट में मदद मिलती है। लेकिन, SEBI ने यह पाया है कि एक्सपायरी के दिन हुई कमाई से पूरी तरह से सट्टेबाजी (Speculative) है। इससे डेरिवेटिव मार्केट का किसी तरह से भला नहीं होता है। दरअसल, ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स इस तरह की स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रांजेक्शन कॉस्ट पर गौर करने के बाद यह पाया गया है कि F&O के हर 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स लॉस उठाते हैं, जबकि हाई-फ्रीक्वेंसी एल्गो आधारित प्रॉपरायटरी ट्रेडर्स और एफपीआई उनकी (रिटेल इनवेस्टर्स) कीमत पर मुनाफा कमाते हैं।
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एक्सपायरी के दिन एक्टिविटी बहुत ज्यादा बढ़ने से बड़े खतरे की आशंक
FY24 में एफएंडओ ट्रेडिंग करने वाले रिटेल ट्रेडर्स को 50,000 करोड़ से ज्यादा लॉस हुआ है। यह FY24 में ग्रोथ और इक्विटी आधारित म्यूचुअस फंडों में कुल शुद्ध निवेश का करीब एक-तिहाई है। एक्सपायरी के दिन कमाई के मकसद से ट्रेडिंग पॉजिशन लेने वाले रिटेल इनवेस्टर्स से मार्केट की स्टैबिलिटी को भी रिस्क है। एक्सापयरी के दिन काफी ज्यादा एक्टिविटी की वजह से ऑप्शन सेलर अपनी पॉजिशन हेज या क्लोज करने में जल्दबाजी दिखा सकते हैं, जिसके खतरनाक नतीजे हो सकते हैं।