SEBI ने जेन स्ट्रीट के खिलाफ कराई थी बड़ी जांच, सभी डॉक्यूमेंट्स नहीं देने के पीछे हैं कानूनी आधार
शेयर बाजार की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने अमेरिकी ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट (Jane Street) के खिलाफ जो अंतरिम आदेश जारी किया था, वह केवल एक आंतरिक समीक्षा पर नहीं बल्कि काफी व्यापक जांच पर आधारित था। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि SEBI ने नियमों के तहत सभी जरूरी डेटा जेन स्ट्रीट को उपलब्ध कराया था
Jane Street case: SAT ने सेबी से तीन हफ्तों में यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन डॉक्यूमेंट्स को साझा नहीं किया जा सकता
शेयर बाजार की रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने अमेरिकी ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट (Jane Street) के खिलाफ जो अंतरिम आदेश जारी किया था, वह केवल एक आंतरिक समीक्षा पर नहीं बल्कि काफी व्यापक जांच पर आधारित था। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि SEBI ने नियमों के तहत सभी जरूरी डेटा जेन स्ट्रीट को उपलब्ध कराया था। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि SEBI के पास सभी आंतरिक नोट नहीं शेयर का अधिकार है और सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के कई पुराने फैसलों से भी यह बात साबित होती है।
इस बारे में जेन स्ट्रीट और SEBI को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया था।
Jane Street ने सेबी के अंतरिम आदेश को SAT में चुनौती दी है। जेन स्ट्रीट का तर्क है कि सेबी ने अपने ही सर्विलांस डिपार्टमेंट की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी को किसी तरह की हेराफेरी से मुक्त बताया गया था। 11 सितंबर 2024 को सौंपी गई यह प्रारंभिक रिपोर्ट, सीमित ट्रेड्स पर आधारित थी और इसमें मामले को आगे न बढ़ाने की सिफारिश की गई थी।
यह रिपोर्ट 13 नवंबर 2024 को आई NSE की एनालिसिस रिपोर्ट पर आधारित थी, जिसमें 15 जुलाई 2023 से 31 जनवरी 2024 के बीच के पहले एक घंटे के कैश सेगमेंट ट्रेड्स की जांच की गई थी। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से फ्रंटरनिंग के किसी भी संकेत की जांच पर फोकस किया गया था।
कैसे बदला SEBI का रुख
हालांकि SEBI ने 31 दिसंबर 2024 को एक इंटर-डिपार्टमेंटल टीम (IDT) बनाई। मनीकंट्रोल को मिली जानकारी के मुताबिक इस टीम ने पूरे दिन के कैश, फ्यूचर्स और ऑप्शंस के ट्रेड्स का मिनट-टू-मिनट विश्लेषण किया। ताकि जेन स्ट्रीट के स्ट्रैटजी की पूरी तस्वीर सामने आ सके। इसी रिपोर्ट के आधार पर सेबी ने 3 जुलाई 2025 को अंतरिम आदेश जारी किया।
Jane Street ने इंटर-डिपार्टमेंटल टीम (IDT) के इस गठन को “पूरी तरह पलटी मारना” बताया है। ट्रेडिंग फर्म ने SAT में दाखिल अपनी याचिका में कहा, "ISD रिपोर्ट के बाद, कुछ अज्ञात कारणों से, प्रतिवादी ने पूरी तरह से पलटी मार ली। सेबी ने 31 दिसंबर 2024 को एक इंटर-डिपार्टमेंटल टीम (IDT) के गठन का आदेश दिया, जिसका उद्देश्य कथित तौर पर 'एक्सपायरी के दिन इंडेक्स ऑप्शंस में ट्रेडिंग पैटर्न और उससे जुड़े मामलों से संबंधित चिंताओं' की जांच करना था।"
सूत्रों ने बताया कि ISD रिपोर्ट को आंतरिक रूप से पूरी तरह से अनुमोदित नहीं किया गया था और विभाग के प्रमुख ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण सेबी को जांच का दायरा बढ़ाना पड़ा।
सेबी ने क्या साझा किया?
सेबी ने जेन स्ट्रीट को NSE रिपोर्ट, उस विश्लेषण पर आधारित ISD रिपोर्ट और अंतरिम आदेश को आधार देने वाली IDT रिपोर्ट उपलब्ध कराई। मामले से वाकिफ लोगों ने बताया कि IDT रिपोर्ट में बताया गया था कि सेबी ने पहले के निष्कर्षों को क्यों खारिज कर दिया था।
SAT में सेबी के वकील ने कहा, “हमने उन्हें अपनी पूरी फाइलें दे दी हैं। हम ऐसे दस्तावेज नहीं देंगे जिन पर हमने भरोसा नहीं किया है। हमें जो देना था, उससे कहीं ज्यादा हम पहले ही दे चुके हैं। हमने उन्हें सभी रिपोर्ट दे दी हैं। हमने उन्हें 10 जीबी डेटा दिया है।"
कानूनी मिसालें
कुछ पुराने फैसले भी सेबी के रुख को मजबूती देते हैं। मध्यम एग्रोवेट इंडस्ट्रीज बनाम सेबी मामले में, SAT ने कारण बताओ नोटिस तक की जांच की अनुमति दी थी, लेकिन इंटरन कम्युनिकेशंस और फॉरेंसिक ऑडिटरों के साथ हुए पत्राचार की मांगों को अस्वीकार दिया था। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वहीं कवि अरोड़ा बनाम सेबी मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने फॉरेंसिक ऑडिटर की रिपोर्ट के उन हिस्सों को रोकने के सेबी के फैसले को बरकरार रखा था, जिसके बारे में सेबी का दावा था कि वह उस पर भरोसा नहीं करता।
Jane Street की दलील
कंपनी का कहना है कि उसे सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स नहीं मिले। उसने 61 डॉक्यूमेंट्स (ईमेल्स, मूल शिकायत और ‘स्वीकार्य डेल्टा एक्सपोजर’ की परिभाषा) मांगे हैं। Jane Street ने बताया कि उसने ₹4,843.5 करोड़ एस्क्रो में जमा किए हैं, लेकिन पाबंदियां समय पर नहीं हटाई गईं।
जेन स्ट्रीट ने शुरुआत में जवाब देने से पहले भारी-भरकम फाइलों का अध्ययन करने के लिए और समय मांगा। लेकिन बाद में तर्क दिया कि सेबी ने उसे कई जरूरी रिपोर्टें उपलब्ध नहीं कराई हैं। हालांकि SEBI ने इसका खंडन किया है। सेबी ने सैट को बताया, "उन्होंने समय मांगा, हमने मना कर दिया, इसलिए उन्होंने यह याचिका दायर की।"
जेन स्ट्रीट ने इसके जवाब में कहा कि वह 4,800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ, सुनवाई से भयभीत नहीं है। इसके बाद सेबी ने उससे जवाब दाखिल करने और पूछे गए ट्रेड्स के बारे में स्पष्टीकरण देने की अपील की।
सेबी का आरोप
3 जुलाई के आदेश में सेबी ने Jane Street पर आरोप लगाया कि उसने अपने वित्तीय और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर इंडेक्स ऑप्शंस में हेराफेरी की और एक्सपायरी डे पर फ्यूचर्स व कैश मार्केट को प्रभावित किया। आदेश में कहा गया कि “इससे बाजार की निष्पक्षता और पारदर्शिता को गंभीर नुकसान पहुंचा और खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।”
आगे क्या होगा?
SAT ने सेबी से तीन हफ्तों में यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन डॉक्यूमेंट्स को साझा नहीं किया जा सकता। इसके बाद Jane Street तीन हफ्तों में अपना जवाब दाखिल करेगी। अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
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