सेबी की कमेटी ने कैश ट्रांजेक्शन पर मार्जिन घटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे मार्केट में कैश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि अब इस मामले में सेबी को अंतिम फैसला करना है।
सेबी की कमेटी ने कैश ट्रांजेक्शन पर मार्जिन घटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे मार्केट में कैश ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि अब इस मामले में सेबी को अंतिम फैसला करना है।
मौजूदा सिस्टम का रिव्यू भी करेगा सेबी
एक सूत्र ने बताया, "पैनल ने कैश सेगमेंट में मार्जिन घटाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। उसने मौजूदा सिस्टम के रिव्यू पर भी अपनी सहमति जताई है।" पैनल ने रिस्क को अच्छी तरह से कवर करने के लिए सही मार्जिन कलेक्ट करने की सलाह दी है। हालांकि, पैनल का कहना है कि यह 12.5 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए। अब सेबी इस मसले पर अंतिम फैसला लेगा।
वीएआर और ईएलएम मार्जिन का मतलब
अभी ज्यादातर स्टॉक्स के लिए वैल्यू एट रिस्क (VaR) और एक्सट्रीम लॉस मार्जिन (ELM) 12.5 से 20 फीसदी के बीच है। मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से मैक्सिमम पॉसिबल लॉस कवर करने के लिए वीएआर मार्जिन लगाया जाता है। इसी तरह, ईएलएम वह अतिरिक्त मार्जिन है, जिसे एक्सचेंज नॉर्मल मार्जिन के अतिरिक्त लगाते हैं।
मामले से जुड़े पक्षों की राय लेगा सेबी
एक दूसरे सूत्र ने कहा, "सेबी को इस बारे में डेटा की और टेस्टिंग करनी होगी। उसके बाद वह क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस, एक्सचेंज और दूसरे पक्षों की राय लेने के बाद इस बारे में अंतिम फैसला लेगा। " मार्जिन से सिस्टम में रिस्क घटता है। अगर क्लाइंट पेमेंट करने या बेचे गए शेयर उपलब्ध कराने में नाकाम रहता है तो मार्जिन से रिक्स कवर करने में मदद मिलती है।
कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ने पर सेबी का फोकस
सेबी का फोकस कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने पर है। पिछले तीन सालों में कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम दोगुना हो गया है। लेकिन, यह इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट के वॉल्यूम के मुकाबले काफी कम बढ़ा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कई बार कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं।
FY25 में एवरेज डेली टर्नओवर 1,20,782 करोड़ रुपये
सेबी के डेटा के मुताबिक, FY20 में कैश मार्केट में एवरेज डेली टर्नओवर 39,148 करोड़ रुपये था। यह FY21 में बढ़कर 66,007 करोड़ रुपये हो गया। FY22 में यह बढ़कर 72,368 करोड़ रुपये हो गया। FY23 में यह घटकर 57,666 करोड़ रुपये पर आ गया। FY24 में यह 87,978 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। FY25 में यह उछलकर 1,20,782 करोड़ रुपये हो गया। इस फाइनेंशियल ईयर में यह डेटा और बढ़ सकता है।
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कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए सेबी को मिले कई सुझाव
सेबी को इक्विटी कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए कई सुझाव मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि इसमें स्टॉक लेंडिंग और बॉरोइंग फ्रेमवर्क को मजबूत बनाने, ईटीएफ में पार्टिसिपेशन बढ़ाने और इंट्रा-डे कैश मार्केट ट्रेड्स में एसीटीटी खत्म करने या इसमें कम करने के प्रस्ताव शामिल है। सेबी स्टॉक लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM) को लोकप्रिय बनाने के लिए चर्चा शुरू कर चुका है। एक वर्किंग ग्रुप इस मसले पर विचार कर रहा है। इस बारे में सेबी को भेजे ईमेल का जवाब नहीं मिला।
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