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अदाणी समूह के स्टॉक्स में निवेश करने वाले विदेशी फंडों के सेटलमेंट अप्लिकेशन पर सेबी क्या फैसला ले सकता है?

आठ फॉरेन पोर्फफोलियो इनवेस्टर्स ने SEBI के पास सेटलमेंट अप्लिकेशन फाइल किया है। इसमें उनके खिलाफ चल रही जांच को बंद करने की गुजारिश की गई है। ये अप्लिकेशंस सेबी की एक हाई-पावर्ड कमोटी को भेजे जाएंगे। कमेटी इन अप्लिकेशंस पर विचार करेगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 29, 2024 पर 4:52 PM
अदाणी समूह के स्टॉक्स में निवेश करने वाले विदेशी फंडों के सेटलमेंट अप्लिकेशन पर सेबी क्या फैसला ले सकता है?
मामले से जुड़े 7 फंडों ने अपना करीब 90 फीसदी निवेश अदाणी समूह की कंपनियों में किया था।

अदाणी ग्रुप कंपनियों में भारी निवेश वाले 8 फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआई) ने सेटलमेंट के लिए SEBI के पास अप्लिकेशन फाइल किए हैं। अप्लिकेशन में सेबी से उनके खिलाफ चल रही जांच को बंद कर देने की गुजारिश की गई है। ये मामले अदाणी ग्रुप की कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी से जुड़े हैं। सेबी इस बात की जांच कर रहा है कि अदाणी समूह की कंपनियों में निवेश में उन्होंने नियमों का उल्ल्घन किया है या नहीं। इस खबर का अदाणी समूह की कंपनियों पर ज्यादा असर नहीं दिखा है। 22 अप्रैल से अब तक अदाणी समूह की कंपनियों के स्टॉक्स बगैर किसी खास बदलाव के बंद हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मार्केट इस मामले को पीछे छोड़ चुका है। आइए इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।

ये फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स मामलों का सेटलमेंट क्यों चाहते हैं?

सेटलमेंट एक ऐसा प्रोसेस है, जिसके जरिए मार्केट के नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों को जुर्माना चुकाने के बाद बंद कर दिया जाता है। इसमें आरोपी न तो गुनाह को स्वीकार करता है और न उसे खारिज करता है। किसी एनटिटी के सेटलमेंट अप्लिकेशन फाइल करने के बाद मामला हाई-पावर्ड एडवायजरी कमेटी (HPAC) को भेज दिया जाता है। यह कमेटी यह तय करती है कि सेटलमेंट अप्लिकेशन को स्वीकार करना है या नहीं। अप्लिकेशन स्वीकार हो जाने पर कमेटी तय करती है कि आरोपी को कितना जुर्माना चुकाना होगा।

अगर SEBI एफपीआई के अप्लिकेशंस को स्वीकार कर लेता है तो क्या होगा?

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