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F&O स्टॉक्स में मैनिपुलेशन रोकने के लिए क्या है SEBI का पूरा प्लान?

SEBI ने एफएंडओ स्टॉक्स में मैनिपुलेशन को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। देर से ही सही लेकिन मार्केट रेगुलेटर की यह कोशिश स्वागतयोग्य है। इसके लिए सेबी ने स्टॉक एफएंडओ में ओपन इंटरेस्ट यानी OI के कैलकुलेशन का तरीका बदलने का फैसला किया है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Feb 27, 2025 पर 4:46 PM
F&O स्टॉक्स में मैनिपुलेशन रोकने के लिए क्या है SEBI का पूरा प्लान?
सेबी ने ओपन इंटरेस्ट के कैलकुलेशन के लिए फ्यूचर्स इक्विवैलेंट या डेल्टा आधारित तरीके के इस्तेमाल का प्रस्ताव पेश किया है।

सेबी कैश मार्केट में गलत प्रैक्टिसेज रोकने वाले उपायों को लागू करने के बाद अब फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर फोकस कर रहा है। हालांकि, यह हैरान करने वाली बात है कि एफएंडओ स्टॉक्स में मैनिपुलेशन को रोकने में सेबी को इतना समय क्यों लगा। एफएंडओ में मैनिपुलेशन का तरीका सीधा था। ऑपरेटर्स के लिए डेरिवेटिव मार्केट में अपनी सीमित गतिविधियों के जरिए स्टॉक एफएंडओ सेगमेंट में मैनिपुलेशन करना आसान था।

डेरिवेटिव्स लिवरेज्ड प्रोडक्ट्स होते हैं, जिससे ट्रेडर्स को ऐसा लगता था कि डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग से प्रॉफिट बढ़ जाएगा। हालांकि, डेरिवेटिव मार्केट खासकर ऑप्शंस मार्केट में उनके ट्रेडिंग एक्शंस से अंडरलाइंड कैश मार्केट में काफी उतारचढ़ाव होता था, जिससे मैनिपुलेशन काफी मुश्किल हो जाता था। इस उतारचढ़ाव को कम करने के लिए ऑपरेटर्स मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) का इस्तेमाल करते हैं। स्टॉक एक्सचेंज यह लिमिट तय करते हैं। यह लिमिट किसी खास अंडरलाइंग स्टॉक में ओपन एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट की मैक्सिमम संख्या होती है।

MWPL की गाइडलाइंस में कहा गया है कि इसका निर्धारण दो डेटा में से जो कम होता है, उसके हिसाब से होती है। यह पिछले कैलेंडर महीने में कैश सेगमेंट में किसी स्टॉक की ट्रेडेड औसत संख्या का 30 गुना होगा या नॉन-प्रमोटर्स के पास रखे शेयरों का 20 फीसदी होगा। यह 20 फीसदी कंपनी के शेयरों के फ्लोटिंग शेयरों का होगा। सेबी इसमें बदलाव करना चाहता है। वह फ्री-फ्लोच मार्केट कैपिटलाइजेशन का 15 फीसदी या कैश मार्केट में एवरेज डेली डिलीवरी वॉल्यूम के 60 गुना में से जो कम हो उसे लागू करना चाहता है। जब कोई स्टॉक बैन हो जाता है तो ट्रेडर्स के उस स्टॉक में नई पोजीशन लेने पर रोक लग जाती है।

सेबी ने इस मसले के निपटारे के लिए ओपन इंटरेस्ट (OI) के कैलकुलेशन के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। अभी ऑप्शंस मार्केट में OI के कैलकुलेशन के लिए डेरिवेटिव सेगमेंट के हर पोजीशन को ध्यान में रखा जाता है। ऑपरेटर की कोशिश सिर्फ यह होती है कि किसी तरह MWPL 95 फीसदी से ज्यादा हो जाए, क्योंकि यह स्टॉक पर बैन के लिए लिमिट है।

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