SEBI ने रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट्स को दी राहत, ले सकेंगे एक साल की एडवान्स फीस

सेबी ने 12 फरवरी को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट्स और इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स अपने क्लाइंट्स से अगले एक साल की फीस ले सकते हैं। इससे रजिस्टर्ड RA और IA को काफी राहत मिलेगी

अपडेटेड Feb 13, 2025 पर 1:47 PM
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सेबी के नियमों के मुताबिक, आईए को दो तिमाही यानी छह महीनों से ज्यादा समय की फीस लेने की इजाजत नहीं है।

सेबी ने रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट (आरए) और इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (आईए) को बड़ी राहत दी है। दरअसल सेबी ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि सेबी रजिस्टर्ड आरए और आईए को एक साल की एडवान्स फीस लेने की इजाजत दी जाएगी। मार्केट रेगुलेटर ने 12 फरवरी को इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया। इसमें कहा गया है कि सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स अपने क्लाइंट्स से अगले एक साल की फीस ले सकते हैं।

सेबी नियमों में बदलाव करने को तैयार

इसका मतलब है कि सेबी रजिस्टर्ड आरए और आईए के लिए नियम बदलने जा रहे हैं। इससे पहले सेबी ने आरए के लिए जनवरी में गाइडलाइंस जारी की थी। इसमें एनालिस्ट्स को तीन महीनों से आगे की फीस नहीं लेने को कहा गया था। कई आरए ने इस नियम का विरोध किया था। कुछ बड़े आरए का कहना था कि सेबी के इस नियम का उनकी इनकम पर खराब असर पड़ेगा। उनके लिए अपनी सेवाएं जारी रखनी मुश्किल हो जाएगी।


छह महीने से ज्यादा की फीस लेने की इजाजत नही

सेबी के नियमों के मुताबिक, आईए को दो तिमाही यानी छह महीनों से ज्यादा समय की फीस लेने की इजाजत नहीं है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सेबी का नया प्रस्ताव लागू हो जाता है तो इससे आरए को बड़ी राहत मिल जाएगी। मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी कि आरए को फीस के मामले में बड़ी राहत मिलने जा रही है। माना जा रहा है कि 12 फरवरी को आए कंसल्टेशन पेपर से बड़ी संख्या में आरए और आईए की चिंता खत्म हो जाएगी।

आरए ने सेबी से की थी गुजारिश

12 फरवरी को जारी कंसल्टेशन पेपर मे कहा गया है, "सेबी को आरए की गुजारिश मिली थी, जिसमें मार्केट रेगुलेटर को एडवान्स फीस के नियमों पर फिर से विचार करने को कहा गया था। यह बताया गया था कि एडवान्स फीस को लेकर सेबी के नियम से आरए के लिए लंबी अवधि के रिकॉमेंडेशन देना मुश्किल हो जाएगा। इससे पूरा सिस्टम गड़बड़ हो जाएगा। इसके चलते क्लाइंट और आरए दोनों के लिए कॉस्ट बढ़ जाएगी।"

सेबी को निवेशकों के हितों की चिंता

कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि RAs ने सेबी से अगले एक साल की फीस एडवान्स लेने की इजाजत मांगी थी। इसके लिए सेबी को मौजूदा अवधि को बढ़ाने की गुजारिश की गई थी। कंस्लटेशन पेपर में यह भी कहा गया है कि एनुअल फीस की लिमिट तय होने से निवेशकों के हितों की भी रक्षा होगी। इनवेस्टर्स के पास रिफंड लेने का भी विकल्प होगा।

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