सेबी कैश मार्केट में वॉल्यूम बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहा है। रेगुलेटर डेरिवेटिव सेगमेंट की जगह कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाना चाहता है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि सेबी ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन, ब्रोकर्स और दूसरे लोगों से राय मांगी थी। रेगुलेटर को इस बारे में सुझाव मिल गए हैं। सुझावों को सेबी की एडवायजरी कमेटी या एक सब-ग्रुप के पास भेजा जा सकता है। एडवायजरी कमेटी या सब-ग्रुप से फीडबैक मिल जाने के बाद रेगुलेटर इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर पेश कर सकता है।
पिछले तीन सालों में कैश सेगमेंट में वॉल्यूम तीन गुना हुआ
SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़नी चाहिए। 21 अगस्त को फिक्की कैपिटल मार्केट समिट में उन्होंने कहा था, "हम इक्विटी मार्केट के कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाना चाहते हैं। यह कैपिटल फॉर्मेशन की सही बुनियाद है।" उन्होंने कहा था कि अगर रोजाना के ट्रेडिंग वॉल्यूम की बात की जाए तो पिछले तीन सालों में यह बढ़कर दोगुना हो गया है। लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है।
कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए सेबी को मिले कई सुझाव
सूत्र ने बताया कि सेबी को कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाने के बारे में कई सुझाव मिले हैं। इनमें कैश सेगमेंट ट्रेड्स पर मार्जिन में कमी, स्टॉक लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म (SLBM), एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स को बढ़ावा, सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में कमी जैसे सुझाव शामिल हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक दूसरे सूत्र ने कहा, "हर सुझाव पर ध्यान दिया जा रहा है। हरेक के कुछ पॉजिटिव और कुछ निगेटिव नतीजे हो सकते हैं। जैसे मार्जिन में कमी का सुझाव अच्छा है, लेकिन रिस्क मैनेजमेंट के लिहाज से यह अच्छा नहीं माना जाएगा।"
कैश सेगमेंट और डेरिवेटिव सेगमेंट के बीच संतुलन चाहता है सेबी
सूत्र ने कहा कि कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए SLBM भी एक विकल्प हो सकता है। लेकिन, इसके लिए इसे ट्रेडर्स के बीच लोकप्रिय बनाने के उपाय करने होंगे। पिछले कुछ सालों में कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ा है। लेकिन, डेरिवेटिव सेगमेंट के मुकाबले यह काफी कम है। सेबी कैश सेगमेंट और डेरिवेटिव सेगमेंट के वॉल्यूम के बीच एक संतुलन चाहता है। कोविड की शुरुआत के बाद डेरिवेटिव सेगमेंट में वॉल्यूम में तेज इजाफा देखने को मिला था। इसमें डेरिवेटिव सेगमेंट में नए इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ने का बड़ा हाथ है।
सितंबर में कैश सेगमेंट में वॉल्यूम 1.06 लाख करोड़
SEBI के डेटा के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में कैश मार्केट में औसत रोजाना टर्नओवर 39,148 करोड़ रुपये था। फाइनेंशियर ईयर 2020-21 में यह बढ़कर 66,007 करोड़ रुपये हो गया। FY22 में यह 72,368 करोड़ रुपये हो गया। FY23 में इसमें थोड़ी गिरावट आई। यह गिरकर 57,666 करोड़ रुपये पर आ गया। FY24 में यह बढ़कर 87,978 करोड़ और FY25 में 1,20,782 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 30 सितंबर, 2025 को NSE और BSE के कैश सेगमेंट में औसत रोजाना टर्नओवर 1.06 लाख करोड़ रुपये था।
एसटीटी घटाने से कैश सेगमेंट में बढ़ सकता है वॉल्यूम
केजरीवाल रिसर्च एंड इनवेस्टमेंट सर्विसेज (KRIS) के डायरेक्टर अरुण केजरीवाल ने कहा कि कैश सेगमेंट में वॉल्यूम बढ़ाने का आसाना तरीका एसटीटी में बदलाव हो सकता है। उन्होंने कहा, "सेबी और सरकार को मिलकर डिलवरी ट्रेड को अट्रैक्टिव बनाने की जरूरत है। कैपिटल फॉर्मेशन में इसकी बड़ी भूमिका होती है। सबसे अच्छा यह होगा कि सेबी वित्त मंत्रालय से कैश सेगमेंट के डिलीवरी ट्रेड्स पर एसटीटी घटाने का अनुरोध करे। डिलीवरी लेना इनवेस्टर्स के लिए सजा जैसा है।"
अभी एसटीटी के रेट्स इस तरह हैं
अभी कैश सेगमेंट के सेल साइड के इंट्रा-डे ट्रेड्स पर प्रत्येक एक लाख रुपये वैल्यू के ट्रेड पर 25 रुपये का एसटीटी लगता है। बाय एंड सेल दोनों साइड के डिलीवरी ट्रेड्स में प्रति एक लाख रुपये की ट्रेड वैल्यू पर 100 एसटीटी लगता है। इस बारे में प्रतिक्रिया जानने के लिए सेबी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।