देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में से एक जीरोधा (Zerodha) सोशल मीडिया पर सोमवार को विवादों में आ गई, जब एक यूजर ने आरोप लगाया कि कंपनी उसके पैसे को “फ्री में इस्तेमाल” कर रही है। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद कंपनी के CEO और को-फाउंडर नितिन कामत ने खुद सामने आकर पूरी तस्वीर साफ की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर डॉ. अनिरुद्ध मलपाणी सोमवार 3 नवंबर को एक पोस्ट कर आरोप लगाया कि जीरोधा ने उनके फंड की निकासी रोक दी है। उन्होंने दावा किया कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें बताया कि एक दिन में निकासी की अधिकतम निकासी की सीमा 5 करोड़ रुपये है, जिसके बाद वे अतिरिक्त पैसा नहीं निकाल सकते।
अनिरुद्ध मालपानी ने अपने पोस्ट में कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए थे। इस स्क्रीनशॉट के मुताबिक, 5 करोड़ रुपये से अधिक राशि निकालने के लिए यूजर को “सपोर्ट टिकट” बनाना पड़ता है। मलपाणी ने अपने पोस्ट में जीरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत को टैग करते हुए सवाल उठाया कि “कंपनी क्या क्लाइंट्स के पैसे से फ्री में कारोबार कर रही है?” यहां तक कि मलपाणी ने इसे 'जीरोधा स्कैम' भी करार दिया था।
इस विवाद पर 4 नवंबर को जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने जबाव दिया और साफ किया कि यह कोई “स्कैम” नहीं है।
कामत ने अपने पोस्ट में लिखा, “हेलो डॉक्टर, आपके पेमेंट रिक्वेस्ट कल ही प्रोसेस कर दिए गए हैं। हमें अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए यह पक्का करना होता है कि जब क्लाइंट पैसे निकालते हैं तो हम कुछ चीजों को चेक कर लें (जैसा कि सभी वित्तीय सेवाओं में होता है)। जैसा कि आप समझ सकते हैं, पैसे निकालने के प्रोसेस के दौरान कई संभावित समस्याएं आ सकती हैं, और एक बार पैसे निकल जाने के बाद हमारे पास उन्हें वापस पाने का कोई तरीका नहीं होता। इसीलिए 5 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी के लिए हम ग्राहकों से सपोर्ट टिकट बनाने को कहते हैं।”
कामत ने साफ किया कि 5 करोड़ रुपये की निकासी सीमा कोई प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा प्रक्रिया है, ताकि बड़ी रकम की निकासी में गलती या धोखाधड़ी की संभावना से बचा जा सके।
नितिन कामत के पोस्ट्स को आप नीचे देख सकते हैं-
जीरोधा की वेबसाइट क्या कहती है?
कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, निवेशक अपने ट्रेडिंग अकाउंट में मौजूद “निकासी के योग्य राश” के मुताबिक किसी भी राशि की निकासी कर सकते हैं। 5 करोड़ रुपये तक की निकासी के लिए ग्राहक सीधे Console से रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। वहीं 5 करोड़ से अधिक राशि निकालने के लिए, ग्राहक को सपोर्ट टिकट बनाकर प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
ऐसी लिमिट्स क्यों लगाई जाती हैं?
जानकारों के मुताबिक, निकासी सीमा को लेकर ऐसे नियम सिर्फ जीरोधा तक ही सीमित नहीं है। बैंकों, ब्रोकरेज फर्मों और दूसरे फाइनेंशियल संस्थानों में भी हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन की प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य संभावित फ्रॉड या गलत ट्रांजैक्शन से बचाव, सिस्टम की स्थिरता बनाए रखना, और ग्राहकों के फंड की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
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