सेबी के होल टाइम मेंबर अनंत नारायण ने कहा है फ्यूचर्स एंड ऑप्शन ट्रेडिंग से जुड़े प्रस्तावों के संभावित असर पर रेगुलेटर विचार करेगा। दरअसल, सेबी ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन में रिटेल इनवेस्टर्स के पार्टिसिपेशन पर अंकुश लगाने के लिए कुछ प्रस्ताव पेश किए हैं। उसने एक कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया है। कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है अगर ये प्रस्ताव लागू किए जाते हैं तो एफएंडओ ट्रेडिंग का वॉल्यूम कमोडिटी मार्केट्स या डब्बा ट्रेडिंग में शफ्ट हो सकता है।
सेबी के कुछ उपायों का गलत असर पड़ने की आशंका
2 अगस्त को FICCI के 21वें एनुअल कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में नारायण ने कहा, "कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने इस बारे में चिंता जताई है। हम डेटा पर विचार करेंगे और कमोडिटी मार्केट्स और इक्विटी एफएंडओ मार्केट के बीच समानता पर गौर करेंगे। अगर डेटा से पता चलता है कि इस बारे में जताई जा रही चिंता सही है तो हम उसके हिसाब से कदम उठाएंगे।" मनीकंट्रोल ने इस बार में खबर दी है कि सेबी के कुछ उपायों से रिटेल इनवेस्टर्स के ट्रेडिंग के अवैध चैनल की तरफ जाने का डर है।
रिटेल ट्रेडर्स के डब्बा ट्रेडिंग का रुख करने का अनुमान
बिगुल के सीईओ अतुल पारेख ने कहा कि सेबी के प्रस्तावों में कॉन्ट्रैक्ट का न्यूनतम साइज बढ़ाने का प्रस्ताव भी है। इसके लागू होने पर एफएंडओ ट्रेडिंग में रिटेल पार्टिसिपेशन घटेगा। लेकिन, इससे डब्बा ट्रेडिंग का वॉल्यूम बढ़ सकता है। इसकी वजह है कि फटाफट मुनाफा कमाने के लिए रिटेल ट्रेडर्स डब्बा ट्रेडिंग का रुख कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह मानता हूं कि सेबी के कुछ प्रस्ताव अच्छे हैं। लेकिन, अगर सभी प्रस्ताव लागू किए जाते हैं तो इससे चिंता पैदा सकती है।
डब्बा ट्रेडिंग अवैध है। इसमें ट्रेड स्टॉक एक्सचेंज के दायरे से बाहर होता है। सौदों का निपटारा डब्बा ऑपरेशन चलाने वाला व्यक्ति करता है। इसमें बगैर डीमैट अकाउंट और केवायसी ट्रेडर्स को शेयरों की दिशा पर दांव लगाने का मौका मिलता है। डब्बा ट्रेडर बुकीज की तरह काम करता है। इसमें होने वाले मुनाफे पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता है। कोई अपफ्रंट मार्जिन भी नहीं होता है।
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सेबी के उपायों का मकसद क्या है?
सेबी के कंसल्टेशन पेपर का मकसद मार्केट स्टैबिलिटी और एफएंडओ में रिटेल पार्टिसिपेशन पर अंकुश लगाना है। पिछले कुछ सालों खासकर कोविड की महामारी शुरू होने के बाद से एफएंडओ में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि, सेबी की स्टडी से यह जाहिर हो चुका है कि इसें ज्यादातर रिटेल इनवेस्टर्स को नुकसान होता है। इसके बावजूद एफएंडओ ट्रेडिंड का वॉल्यूम लगातार बढ़ रहा है।