Sensex 1300 अंक लुढ़का, इनवेस्टर्स के 5 लाख करोड़ डूबे, क्यों फिसला मार्केट?

Sensex Falls 1000 Points: गुरुवार को आई गिरावट से बीएसई का मार्केट कैप 4.73 लाख करोड़ रुपये गिरकर 251 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। दिन में 11:10 बजे सेंसेक्स 1,020 अंक यानी 1.88 फीसदी गिरकर 53,192 अंक पर था

अपडेटेड May 19, 2022 पर 3:37 PM
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बीते एक महीने में निफ्टी 6 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान सेंसेक्स में 5.81 फीसदी की गिरावट आई है।

स्टॉक मार्केट में इतना उतार-चढ़ाव शायद ही पहले कभी दिखा हो। एक दिन सेंसेक्स 1000 अंक चढ़ता है तो अगले दिन 1000 अंक गिर जाता है। गुरुवार को स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आई। पहले यह 1000 अंक गिरा। फिर दोपहर तक गिरावट बढ़कर 1300 अंक से ज्यादा हो गई। इससे इनवेस्टर्स के कुछ ही देर में करीब 5 लाख करोड़ रुपये  से ज्यादा डूब गए। स्टॉक मार्केट इन दिनों इनवेस्टर्स के लिए पहेली बन गया है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा आखिर मार्केट कहां जा रहा है।

गुरुवार को आई गिरावट से बीएसई का मार्केट कैप कारोबार शुरू होने के करीब दो घंटे बाद 4.73 लाख करोड़ रुपये गिरकर 251 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। बाद में गिरावट और बढ़ गई। दिन में 13:21 बजे सेंसेक्स 1,370 अंक यानी 2.43 फीसदी गिरकर 52,889 अंक पर था। NSE का निफ्टी 50 भी 2.49 फीसदी यानी 403 अंक गिरकर 15,836 अंक पर था। बीते एक महीने में निफ्टी 6 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। इस दौरान सेंसेक्स में 5.81 फीसदी की गिरावट आई है।

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इंडियन मार्केट में आई गिरावट की बड़ी वजह बुधवार को अमेरिकी स्टॉक मार्केट की कमजोरी है। बुधवार को अमेरिकी स्टॉक मार्केट का प्रमुख सूचकांक S&P 500 इंडेक्स 4 फीसदी फिसलाा। यह पिछले दो साल में इस इंडेक्स में सबसे बड़ी गिरावट है। अमेरिकी मार्केट में गिरावट का असर दुनियाभर के मार्केट्स पर पड़ता है। यही वजह है कि गुरुवार को एशियाई बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडियन इकोनॉमी के लिए कई तरह के चैलेंजेज दिख रहे हैं। रिलायंस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मितुल शाह ने कहा, "डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे लो लेवल पर आ गया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली जारी रहने पर बाजार की मु्श्किलें और बढ़ेंगी। बढ़ते इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दुनियाभर के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहे हैं। इससे इकोनॉमिक रिसेशन की आशंका बढ़ी है।"

अमेरिका में बुधवार को डाओ जोंस 1,000 अंक से ज्यादा गिर गया। टारगेट कॉर्प के शेयर में 26 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन बढ़ रहा है, रिसेशन का डर दिख रहा है और अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख और सख्त होने की उम्मीद है। इस वजह से आने वाले दिनों में अमेरिकी बाजार का सेंटिमेंट कमजोर बना रहेगा।

RBI ने बुधवार को MPC की इमर्जेंसी मीटिंग के मिनट्स जारी किए। इससे पता चलता है कि एमपीसी के एक सदस्य ने रेपो में 100 बेसिस प्वॉइंट्स वृद्धि की सलाह दी थी। हालांकि, दूसरे सदस्य रेपो में इतनी ज्यादा वृद्धि के पक्ष में नहीं थे। हालांकि, सभी का मानना था कि महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए फौरन रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत है। नोमुरा रिसर्च ने कहा है कि अप्रैल 2023 तक रेपो रेट 6.25 फीसदी पहुंच जाने का अनुमान है।

फॉरेन फंडों की बिकवाली से रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसका असर इंडियन इकोनॉमी पर पडे़गा। पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया सबसे लो लेवल पर पहुंच गया था। फॉरेन फंडों की बिकवाली जारी रहती है तो रुपया भी दबाव में रहेगा। उधर, डॉलर इंडेक्स में मजबूती है। यह दो दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर भी रुपया पर पड़ा है।

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