Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ती दूरियों ने दुनिया भर के अधिकतर बाजारों में ऐसी उथल-पुथल मचाई कि इसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई। सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी 22900 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का भारी दबाव दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉल कैप 100, दोनों 1-1% से अधिक टूट गए।
अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स की बात करें फिलहाल 09:45 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 897.30 प्वाइंट्स यानी 1.21% की गिरावट के साथ 72998.44 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 278.25 प्वाइंट्स यानी 1.20% की फिसलन के साथ 22862.25 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 914.63 प्वाइंट्स टूटकर 72,981.11 और निफ्टी भी 285.05 प्वाइंट्स गिरकर 22,855.45 तक आ गया था।
Share Market Crash: ये है वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों से इस बात की उम्मीद जताई है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी। इससे वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल मच गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदें फीकी पड़ी तो कच्चा तेल उबल पड़ा, जिससे मार्केट सहम गया। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलक $98 के पार चला गया।
अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड उछलकर 5% के पार बनी हुई है, जिससे शेयर मार्केट में हलचल फीकी हुई है।
एक कारोबारी दिन पहले 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने लगातार दूसरे दिन ताबड़तोड़ भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली की, जिसका दबाव आज दिख रहा है। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने ₹3,693.93 करोड़ की नेट बिक्री की जबकि एक दिन पहले गुरुवार 24 सितंबर को एफआईआई ने 5,027.36 करोड़ के नेट शेयर बेचे थे।
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव
फिलहाल सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स लाल हैं लेकिन बैंकिंग शेयरों की बिकवाली ने मार्केट को बुरी तरह तोड़ दिया है। सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी कमजोर हुए हैं। इसमें मेटल और रियल्टी सेक्टर ने भी काफी साथ दिया और इनके भी निफ्टी इंडेक्स डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक कमजोर हुए हैं।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने के मुताबिक बढ़ती जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर पड़ा है। उनका कहना है ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती उभरते बाजारों के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, तो FII की लगातार बिकवाली इस दबाव को बढ़ा रही है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी लगातार 'लोअर हाई' और 'लोअर लो' बना रहा है और अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के कमजोर होने का संकेत मिल रहा है। रूपक का कहना है कि वीकली चार्ट पर RSI बेयरेश हो गया है, जिससे लगातार गिरावट का संकेत मिल रहा है। लेवल्स की बात करें तो रूपक के मुताबिक नीचे की तरफ 23,000 पर तात्कालिक सपोर्ट मिल सकता है, जिसके बाद 22,700 के लेवल पर सपोर्ट मिलेगा। वहीं ऊपर की तरफ 23,200–23,300 का रेंज अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,300 के ऊपर लगातार बना रहता है तो टेक्निकल सेटअप मज़बूत हो सकता है, जबकि 23,000 के नीचे जाने पर गिरावट का ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है।
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