Share Markets: अब इन 3 फैक्टर्स से चलेगा शेयर बाजार? निवेशकों को रखना होगा खास ध्यान

शेयर बाजार इस समय एक काफी अहम मोड़ पर खड़ा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में कम से कम 3 ग्लोबल फैक्टर्स शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व बैंक की पॉलिसी में बदलाव, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के GDP अनुमानों में उछाल और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ अपनाई जा रही कठोर व्यापार नीति शामिल हैं

अपडेटेड Jul 31, 2025 पर 7:32 PM
ट्रंप ने भारत के खिलाफ 25% टैरिफ लगाने की नीति का ऐलान कर दिया है

Share Markets:  शेयर बाजार इस समय एक काफी अहम मोड़ पर खड़ा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में कम से कम 3 ग्लोबल फैक्टर्स शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व बैंक की पॉलिसी में बदलाव, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के GDP अनुमानों में उछाल और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ अपनाई जा रही कठोर व्यापार नीति शामिल हैं। जहां एक ओर निवेशकों के मन में फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप के 25% टैरिफ और जुर्माने की धमकी ने बाजार को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है।

इन तीनों फैक्टर्स का मार्केट की चाल पर कैसा असर पड़ सकता है, आइए इसे विस्तार से जानते हैं-

1. फेडरल रिजर्व की पॉलिसी में बदलाव

फेडरल रिजर्व बैंक की एक दिन पहले बुधवार को ब्याज दरों को लेकर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 4.25-4.5% के स्तर पर बनाए रखा। लेकिन फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने संकेत दिए कि आगे सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है।


ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि अमेरिका की GDP ग्रोथ इस साल के पहले छमाही में घटकर 1.2 फीसदी पर आ गई, जो पिछले साल इसी समय 2.5 फीसदी थी। ऐसे में अगर अमेरिका को अपनी GDP ग्रोथ बढ़ाना है तो उसे इसके लिए ब्याज दरें घटाने पड़ेगी। अगर ब्याज दरें नहीं घटती है तो अमेरिकी इकोनॉमी के स्टैगफ्लेशन में फंसने का खतरा है।

इसके अलावा, अमेरिका का लेबर मार्केट भी कमजोर हुआ है। नए रोजगार पैदा करने की दर में गिरावट और मजदूरी में स्थिरता से यह संकेत मिलता है कि फेडरल रिजर्व को अब प्राइस स्टैबिलिटी की तुलना में रोजगार को प्राथमिकता देनी पड़ सकती है।

फेडरल रिजर्व की इस बैठक में दो गर्वनर अपनी असहमति जताई और ब्याज दरों में 0.25 फीसदी के कटौती की वकालत की। ये 1993 के बाद पहली बार हुआ है जब FOMC में इस स्तर की असहमति देखने को मिली है। ब्याज दरों के घटने से मार्केट में ज्यादा पैसा आता है, जो शेयर बाजार के पॉजिटिव माना जाता है।

2. IMF का GDP ग्रोथ अपग्रेड

आईएमएफ ने हाल ही में भारत, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के GDP अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया है, जो बताता है कि अप्रैल में ग्लोबल ट्रेड को लेकर जो तनाव देखा गया था, वह अब काफी हद तक शांत हो चुका है। भारत की इकोनॉमी को मॉनिटरी और फिस्कल पॉलिसी दोनों का समर्थन मिला है।

ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ने और मानसून सीजन के अच्छे रहने के चलते घरेलू कंज्म्पशन को सपोर्ट मिला है। चीन को अमेरिका से व्यापार नीति में नरमी का लाभ मिला, जिससे उसकी बाजार में रिकवरी दिखी। S&P 500 भी अब बेहतर कॉरपोरेट नतीजों, इकोनॉमी के स्थिर आकड़ों और पॉलिसी पर स्पष्टता के चलते तेजी में है।

हालांकि भारत में विदेशी निवेशकों ने जुलाई महीने के दौरान शेयर बाजार से करीब 17,500 करोड़ की बिकवाली की, जो पिछले तीन महीनों में 38,000 करोड़ रुपये की खरीदारी के उलट ट्रेंड है। फिर भी, बड़ी तस्वीर देखें तो ग्लोबल लेवल पर रिस्क लेने के सेंटीमेंट में सुधार देखा जा रहा है।

3. ट्रंप का भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ 25% टैरिफ लगाने की नीति का ऐलान कर दिया है। साथ ही यह भी कहा कि रूस से तेल और हथियार सैन्य उपकरण खरीदने के चलते भारत को अतिरिक्त पेनाल्टी भी देना पड़ेगा। इस कदम ने बाजार में अचानक से अनिश्चितता बढ़ा दी है।

ट्रंप ने अभी तक ये नहीं बताया कि अतिरिक्त पेनाल्टी की दर कितनी होगी, जो कि मार्केट के लिए एक संभावित खतरा बना हुआ है। इससे सबसे ज्यादा असर भारत के एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर्स पर पड़ सकता है। खासकर ऑटो पार्ट्स, फार्मा, और टेक्सटाइल्स पर।

ट्रंप की नीति से वियतनाम जैसे देश को भारत पर कॉम्पिटिटीव बढ़त मिल सकती है। भारत और चीन के बीच अमेरिका के साथ टैरिफ का अंतर पहले 17% था, जो अब 26% हो गया है।

हालांकि भारतीय रुपये में गिरावट और चाइनीज युआन में मजबूती ने भारतीय एक्सपोर्टरों को कुछ राहत दी है, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकता है। कुल मिलाकर ये तीनों फैक्टर्स आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

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