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निफ्टी की मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव, जानिए अब कहां है बाजार की नजर

डिफेंस,फार्मा और कैपिटल मार्केट शेयरों में सबसे तगड़ी खरीदारी आई है। तीनों इंडेक्स दो परसेंट से ज्यादा ऊपर हैं। फार्मा में 8% उछाल के साथ मैनकाइंड फार्मा वायदा के टॉप गेनर्स में शामिल है। अच्छे नतीजों के बाद सोना BLW में 10% का अपर सर्किट लगा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 27, 2026 पर 3:14 PM
निफ्टी की मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव, जानिए अब कहां है बाजार की नजर
भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल महत्वपूर्ण साबित होगी। यूएस फेड का सख्त रुख (hawkish stance) वैश्विक वित्तीय स्थितियों को तंग कर सकता है

निफ्टी की मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। क्रूड के 116 डॉलर के पार जाने से ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली आई है। निफ्टी हाई से करीब 100 अंक फिसलकर 22700 के करीब आ गया है। बैंक निफ्टी करीब 300 अंक नीचे है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आज जोरदार तेजी है। वोलैटिलिटी इंडेक्स INDIA VIX थोड़ा ठंडा पड़ा है। उम्मीद के मुताबिक नतीजों के बाद टाटा कंज्यूमर पांच फीसदी उछलकर निफ्टी का टॉप गेनर बना है। वहीं रक्षा खरीद की मंजूरी से HAL, BEL, BDL में जोश है। साथ ही GE वर्नोवा, हिताची और CG पावर 4 फीसदी तक उछले हैं। एथर एनर्जी में आज भी टॉप गियर लगा है।

डिफेंस,फार्मा और कैपिटल मार्केट शेयरों में सबसे तगड़ी खरीदारी आई है। तीनों इंडेक्स दो परसेंट से ज्यादा ऊपर हैं। फार्मा में 8% उछाल के साथ मैनकाइंड फार्मा वायदा के टॉप गेनर्स में शामिल है। अच्छे नतीजों के बाद सोना BLW में 10% का अपर सर्किट लगा है। लेकिन रिजल्ट के बाद AEQUS में तगड़ा एक्सिडेंट हुआ है। यह शेयर 10 परसेंट टूटा है। डालमिया भारत भी 6 परसेंट नीचे है। ग्लेनमार्क और फेडरल बैंक में तेजी है। उधर इंडियन होटल्स, लॉरेस लैब्स में खरीदारी आई है।

कर्मा कैपिटल के पोर्टफोलियो मैनेजर, थॉमस प्रिजु (Thomas Priju) का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले से पहले बाजार सतर्क रह सकता है। निवेशक महंगाई के अनुमान और ब्याज दरों की भविष्य की दिशा से जुड़े संकेतों पर करीबी नजर रखे हुए हैं। उम्मीद है कि फेड अक्टूबर में दरों को जस का तस रखेगा, लेकिन बाजार की नजरें उसके बयानों और दिसंबर में और सख्ती (tightening) किए जाने की संभावना पर होगा। लगातार बनी हुई महंगाई और ऊर्जा की ऊंची कीमतें मौद्रिक नीतियों में नरमी (monetary easing) की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं।

भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल महत्वपूर्ण साबित होगी। यूएस फेड का सख्त रुख (hawkish stance) वैश्विक वित्तीय स्थितियों को तंग कर सकता है,उभरते बाजारों में आने वाले विदेशी पूंजी प्रवाह पर दबाव डाल सकता है और निफ्टी में शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है। इसके विपरीत,मुद्रास्फीति और विकास दर का अधिक संतुलित आकलन जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) को सपोर्ट कर सकता है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के करीब आने के साथ,बाजार नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक घटनाओं को लेकर भी चौकन्ने रहेंगे। इसलिए, निवेशकों को ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसले के बजाय,इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि इससे आने वाले महीनों में ग्लोबल लेवल पर पूंजी की लागत और तरलता (liquidity) के बारे में क्या संकेत मिलता है।

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