शॉर्ट कॉल : Angle One का शानदार प्रदर्शन, HDFC Bank की डिपॉजिट ग्रोथ, तेजी के बावजूद मार्केट ऑपरेटर्स क्यों हैं निराश?

Angel One के चौथी तिमाही के नतीजे अच्छे आए हैं। कंपनी के प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। हालांकि, पिछली कुछ तिमाहियों से ब्रोकिंग कंपनियों के स्टॉक्स में निवेशकों की ज्यादा दिलचस्पी नहीं रही है

अपडेटेड Apr 18, 2023 पर 10:08 AM
पिछले तीन हफ्तों में मार्केट के कुल सेंटिमेंट में इम्प्रूवमेंट है। लेकिन, इनवेस्टर्स निवेश करने में किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं दिख रहे।

टेक्नोलॉजी शेयरों से फिलहाल दूर रहने में समझदारी है। Infosys के चौथी तिमाही के नतीजों ने मार्केट को निराश किया है। हालांकि, पिछले तीन हफ्तों में मार्केट के कुल सेंटिमेंट में इम्प्रूवमेंट है। लेकिन, इनवेस्टर्स निवेश करने में किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं दिख रहे। ब्रोकिंग फर्म Angel One के चौथी तिमाही के नतीजे अच्छे आए हैं। साल दर साल आधार पर प्रॉफिट 30 फीसदी बढ़ा है। रेवेन्यू 21 फीसदी ज्यादा रहा है। ऑपरेटिंग मार्जिन 310 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा है। इससे एक बात साफ हो जाती है कि इनवेस्टर्स मुनाफा कमाए या नहीं, ब्रोकर्स जरूरत मुनाफा कमाते हैं। हालांकि, कुछ तिमाही पहले से ब्रोकिंग स्टोरी को लेकर निवेशकों का उत्साह ठंडा रहा है। ब्रोकिंग शेयरों की लोअर वैल्यूएशंस से इस बात की पुष्टि होती है।

Angel One का शानदार प्रदर्शन

पिछली 9 तिमाहियों में से 8 में एंजेल के प्रॉफिट और रेवेन्यू में ग्रोथ देखने को मिली है। लेकिन, यह शेयर 12 गुना के ट्रेलिंग प्राइस अर्निग्स मल्टीपल पर उपलब्ध है। पिछले साल की इसी अवधि में यह 25 गुना था। यह शेयर अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से 34 फीसदी दूर रह गया है। यह लेवल पिछले साल अप्रैल में देखने को मिला था। ब्रोकिंग स्टॉक्स को लेकर बेरुखी की एक वजह यह है कि रिटेल इनवेस्टर्स मार्केट में उस तरह की सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं जैसा वे कुछ महीनों पहले तक दिखा रहे थे। नए अकाउंट्स ओपनिंग की रफ्तार सुस्त पड़ी है। पिछले एक साल में शेयरों से मिले कम रिटर्न को देखते हुए इस ट्रेंड के बने रहने की उम्मीद है।


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ब्रोकिंग फर्मों की बढ़ेगी मुश्किल

एक बड़ी चिंता यह है कि रेगुलेटरी चेंजेज की वजह से ब्रोकिंग इंडस्ट्री के लिए पिछले कुछ सालों में हासिल ग्रोथ रेट को दोहराना मुश्किल लगता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि SEBI कैश मार्केट ट्रांजेक्शंस के लिए सेकेंडरी मार्केट के ASBA को F&I ट्रांजेक्शंस में भी इस्तेमाल करने को जल्द मंजूरी दे सकता है। ऐसा होने पर क्लाइंट्स के ट्रेडिंग अकाउंट में बेकार पड़े पैसे पर इंटरेस्ट का फायदा उठाने वाले ब्रोकिंग फर्मों को नुकसान होगा।

HDFC Bank के शेयर पर दबाव

HDFC Bank के शेयरों में सोमवार को 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इसकी वजह यह है कि बैंक के चौथी तिमाही के नतीजे मार्केट के अनुमान से कमजोर रहे हैं। हालांकि, बैंक के लोन की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रही है। डिपॉजिट और एसेट क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट देखने को मिला है। ज्यादातर बैंकों के लिए कम डिपॉजिट ग्रोथ एक बड़ी प्रॉब्लम रही है। ग्रीन एज वेल्थ के दिगंत हरिया ने बताया कि जिन बैंकों की डिपॉजिट ग्रोथ अच्छी रही है, उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है।

बैंकिंग सेक्टर का आउटलुक बेहतर

उन्होंने कहा कि एचडीएफसी बैंक को भी डिपॉजिट ग्रोथ के लिए कीमत चुकानी पड़ी है। पिछले 12-13 साल में एचडीएफसी बैंक दूसरे बैंकों के मुकाबले पहली बार ज्यादा इंरेस्ट रेट्स ऑफर कर रहा है। दूसरे सेक्टर के मुकाबले बैंकिंग सेक्टर के लिए नियम टर्म आउटलुक बेहतर दिख रहा है। इनवेस्टर्स की नजरें नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर होंगी। इसके आधार पर ही वे फैसला करेंगे कि बैंकिंग शेयरों के लिए उन्हें कितनी कीमत चुकानी चाहिए।

रैली के बावजूद मार्केट ऑपरेटर्स नाखुश

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई हालिया तेजी से बड़े ट्रेडर्स (मार्केट ऑपरेटर्स) को बहुत खुशी नहीं मिली है। इसकी वजह यह है कि कम लिक्विडिटी की वजह से उनके लिए लार्ज पॉजिशंस से जल्द मूव करना आसान नहीं है। बताया जाता है कि कई बड़े ट्रेडर्स का हाई पॉजिशन शुगर और रेलवे जैसे मिडकैप शेयरों में बना हुआ है।

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