बाजार पर एक साथ ज्यादा अच्छी खबरों का असर दिख रहा है। इनमें सबसे ताजा खबर क्रूड ऑयल (Crude Oil) के प्राइस में तेज गिरावट है। फिलहाल स्टॉक्स की वैल्यूएशन पर बात नहीं हो रही। म्यूचुअल फंड्स की स्मॉलकैप और मिडकैप स्कीम में शानदार निवेश जारी है। ऑपरेटर्स अपने पसंदीदा स्टॉक्स को सपोर्ट करने में व्यस्त हैं। ऐसे में यह समय काफी ज्यादा सावधानी बरतने का भी है।
Siemens India के स्टॉक्स में पिछले दो दिन से तेजी दिखी है। इसकी वजह यह खबर है कि पेरेंट कंपनी Siemens AG अपनी इंडियन सब्सिडियरी में अपनी हिस्सेदारी 18 फीसदी करने के बारे में सोच रही है। उसे यह हिस्सेदारी सीमेंस एनर्जी से मिलेगी। सीमेंस इंडिया में अपने एनर्जी बिजनेस की रिस्ट्रक्चरिंग करने जा रही है। यह प्रक्रिया 2025 में पूरी हो जाने की उम्मीद है। सीमेंस इंडिया का स्टॉक पहले ही अच्छी तेजी दिखा चुका है। इससे वैल्यूएशन बढ़ी है। लेकिन, लंबी अवधि में इस स्टॉक की दोबारा रेटिंग हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधार का कहना है कि यह रिस्ट्रक्चरिंग पॉजिटिव है। यह इंडियन बिजनेस को चुस्तदुरुस्त बनाने की कोशिश है। इसका असर कंपनी के वैल्यूएशन पर पड़ेगा, क्योंकि अब वह ज्यादा प्रोडक्ट-फोकस्ड कंपनी बन जाएगी। इस डीमर्जर से सीमेंस इंडिया के मुनाफे के रास्ते की बाधाएं हटेंगी क्योंकि सीमेंस एनर्जी के लॉस का असर इस पर पड़ता है।
कैपिटल गुड्स में जारी रह सकती है तेजी
अगर आप यह सोचते हैं कि कैपिटल गुड्स कंपनियों के स्टॉक्स महंगे हैं तो आपको केंद्रीय बैंकों की कमेंट्री पर गौर करना चाहिए। Alchemy Capital Management के सीआईओ हिरेन वेद के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट के मामले में 'हायर फॉर लॉन्गर' के जिस फ्रेज का इस्तेमाल करते हैं वह कैपिटल गुड्स कंपनियों के स्टॉक्स पर भी लागू हो सकता है। वेद का मानना है कि इनवेस्टर्स को यह समझना होगा कि इन स्टॉक्स की अपसाइकिल जारी रहेगी और अर्निंग्स बढ़ने के साथ खुद वैल्यूएशन मल्टीपल करेक्ट होता रहेगा। उन्होंने ABB India का संकेत दिया, जो बहुत सस्ता स्टॉक नहीं है। इसने पिछली दो तिमाही में अच्छा रिटर्न दिया है।
पावर सेक्टर में सेंटिमेंट मजबूत
पिछले कुछ सालों में पावर की बढ़ती मांग का फायदा REC और PFC जैसी कंपनियां उठाती रही हैं। IIFL के हर्षवर्द्धन डोले का कहना है कि पावर की अच्छी डिमांड अगली कुछ तिमाही तक जारी रहने की उम्मीद है। कुछ एनालिस्ट्स को इस बात का संदेह है कि बिजली की बढ़ती खपत का फायदा लंबी अवधि में इन कंपनियों (REC, PFC जैसी) को मिलेगा। लेकिन, इस मामले में डोले आशावान नजर आते हैं। पिछली तिमाही में REC और PFC दोनों का ही प्रदर्शन अच्छा रहा है।
TCS ने 25 नवंबर को अपने बायबैक प्रोग्राम के लिए रिकॉर्ड तारीख तय की है। यह छह साल में कंपनी का पांचवां शेयर बायबैक है। बायबैक मैनेजमेंट के स्ट्रॉन्ग कॉन्फिडेंस के बारे में बताता है। इससे शॉर्ट टर्म में टीसीसीएस के स्टॉक में तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, अमेरिका और यूरोप में खर्च में सुस्ती की वजह से स्टॉक्स में ज्यादा तेजी की संभावना नहीं दिखती। बायबैक के लिए 4,150 रुपये का प्राइस तय है, जो 16 नवंबर के स्टॉक के क्लोजिंग प्राइस से 18 फीसदी ज्यादा है।