Short Call: अमेरिका में इंटरेस्ट रेट्स घटने की उम्मीद से मार्केट में उत्साह, जानिए Vodafone Idea और पिरामल एंटरप्राइजेज क्यों सुर्खियों में हैं

अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने के डर और येन कैरी ट्रेड अनवाइंडिंग की वजह से बड़ी गिरावट के एक हफ्ते बाद मार्केट में रौनक लौट आई है। अमेरिका में इनफ्लेशन घटा है। इधर, इंडिया में भी कई साल बाद रिटेल इनफ्लेशन 4 फीसदी से नीचे आ गया है। इससे मार्केट में उत्साह है

अपडेटेड Aug 19, 2024 पर 9:56 AM
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वोडाफोन आइडिया के शेयर 16 अगस्त को 0.57 फीसदी चढ़कर 15 रुपये पर बंद हुए। कंपनी के लॉस में कमी आई है।

अमेरिकी इकोनॉमी के मंदी में जाने के डर और ये कैरी ट्रेड की वाइंडिंग से आई बड़ी गिरावट के एक हफ्ते बाद ही मार्केट्स की तस्वीर बदल गई है। अमेरिका में महंगाई घटने और रोजगार के अच्छे आंकड़ों ने निवेशकों का डर दूर कर दिया है। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ा है। इधर, इंडिया में भी कई साल बाद रिटेल इनफ्लेशन 4 फीसदी से नीचे आ जाने से मार्केट का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है। बीते हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही एक-एक फीसदी तेजी आई। सवाल है कि क्या इससे बाजार में बिकवाली पर ब्रेक लग जाएगा? कई मार्केट एक्सपर्ट्स का जवाब हां है।

अमेरिकी इकोनॉमी से जुड़े डेटा बेहतर आने से इंटरेस्ट रेट में कमी की संभावना बढ़ गई है। CME-FedWatch टूल के मुताबिक, फेडरल रिजर्व की 17-18 सितंबर को होने वाली बैठक में इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट कमी की 55 फीसदी संभावना है। इंडिया में भी तस्वीर अच्छी दिख रही है। Macquarie के मुताबिक, रिटेल इनवेस्टर्स के लगातार अच्छे निवेश से मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है। म्यूचुअल फंडों में भी उत्साह दिख रहा है। उन्होंने कई थिमैटिक और इंडेक्स आधारित फंड्स लॉन्च किए हैं। हालांकि, Kotak Institutional Equities ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसका कहना है कि इंडियन मार्केट्स की हाई वैल्यूएशन खेल बिगाड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को 1 अप्रैल, 2005 से माइनिंग कंपनियों पर बकाया टैक्स की वसूली करने की इजाजत दी है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि इसका ज्यादा कंपनियों पर मामूली असर पड़ने की संभावना है। अच्छी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंपनियां बकाया टैक्स 12 साल की अवधि में चुका सकती हैं। Tata Steel ने इमर्जेंसी स्थितियों के लिए 17,400 करोड़ रुपये रखा है। SAIL के पास 3,000 करोड़ रुपये है। इसलिए बकाया टैक्स चुकाने का कंपनियों के मुनाफे पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। 16 अगस्त को मेटल कंपनियों के शेयरों पर शुरू में दबाव दिखा। लेकिन, बाद में NMDC, SAIL, Tata Steel, Vedanta, Hindalco, JSW Steel और Coal India के शेयरों में 3 फीसदी तक उछाल दिखा।


Vodafone Idea

वोडाफोन आइडिया के शेयर 16 अगस्त को 0.57 फीसदी चढ़कर 15 रुपये पर बंद हुए। कंपनी के लॉस में कमी आई है। बुल्स का कहना है कि Vodafone Idea के सब्सक्राइबर्स घटने की रफ्तार में कमी आई है। अब फोकस 4जी सर्विसेज में इम्प्रूवमेंट और 5जी सेवाओं की लॉन्चिंग पर है। कैश और बैंक बैलेंस बढ़ने की वजह से जून तिमाही में कंपनी की इंटरेस्ट इनकम बढ़ी है। बेयर्स की दलील है कि वोडाफोन आइडिया के कुछ ग्राहक BSNL पर पोर्ट हुए हैं। इससे हाल में टैरिफ में वृद्धि में उनका कंट्रिब्यूशन नहीं रहा है। 5G सेवाओं की लॉन्चिंग में देर से कंपनी के और ग्राहक दूसरी टेलीकॉम कंपनियों का रुख कर सकते हैं।

Gujarat Fluorochemicals

कंपनी का शेयर 16 अगस्त को 2.46 फीसदी चढ़कर 3,406 रुपये पर बंद हुआ था। चीन से सस्ता माल इंडिया आने से Gujarat Fluorochemicals पर दबाव दिखा है। सप्लाई में बाधा बनी हुई है, जिसका असर मार्जिन पर पड़ रहा है, जो पहले से कमजोर है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सेक्टर से जुड़े नए-एज प्रोडेक्स में निवेश का फायदा मिलने में लंबी समय लगता है। साथ ही सख्त कंप्लायंस को देखते हुए एप्रूवल्स मिलने में देर हो सकती है, जिसका असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ेगा। नुवामा ने अपनी रिपोर्ट में इस बारे में बताया है। बुल्स का कहना है कि ओवरऑल फ्लोरोकेमिकल्स की सेल्स फ्लैट बनी हुई है। लेकिन नए फ्लोरोकेमिकल्स की डिमांड अच्छी है। इसमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की ग्रोथ का हाथ है।

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Piramal Enterprises

पिरामल एंटरप्राइसज के स्टॉक्स 16 अगस्त को 7.43 फीसदी उछळकर 946 रुपये पर बंद हुए। जून तिमाही के नतीजों पर तेज गिरावट के बाद शेयरों में रिकवरी आई है। Piramal Enterprises को श्रीराम लाइफ एंड जनरल इंश्योरेंस में हिस्सेदारी बेचने से अच्छा पैसा मिल सकता है। इससे कंपनी पर क्रेडिट कॉस्ट का कम बोझ पड़ेगा। उधर, बेयर्स का कहना है कि कंपनी के लिए बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ रही है। ग्रोथ बढ़ाने वाले फैक्टर्स नहीं दिख रहे हैं, जिसका असर मार्जिन, मार्जिन और वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ सकता है। इससे शेयरों की कीमतों में स्थिरता दिख सकती है।

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