कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों में अब तक कुछ बहुत खराब नहीं दिखा है। खासकर स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में ऐसा नहीं देखने को मिला है। शायद यही वजह है कि गिरते बाजार में सेकेंड लाइन स्टॉक्स का प्रदर्शन लार्ज कैप के मुकाबले बेहतर बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) जितनी खरीदारी कर रहे हैं, उससे ज्यादा बिकवाली कर रहे हैं। लेकिन, सवाल है कि क्या इससे फर्क पड़ता है? हाल में Devina Mehra ने ट्वीट किया था कि FIIs एक्टिविटी और मार्केट के परफॉर्मेंस में कोई सीधा संबंध नहीं है। Poplycab के दूसरी तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं। हालांकि, स्टॉक्स पर इसका असर नहीं दिखा। सात महीनों से कम समय में इस शेयर की कीमत दोगुनी हो गई है। कंपनी के मैनेजमेंट ने CNBC-TV18 को बताया है कि कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ से ज्यादा रहेगी।
Polycab और Havells में कौन बेहतर?
पॉलीकैब के अच्छे प्रदर्शन से उसके शेयरों का प्रीमियम वैल्यूएशन कुछ हद तक सही लगता है। लेकिन, सवाल है कि यह प्रीमियम कितना होना चाहिए? जिस तरह से बैंकिंग सेक्टर में HDFC Bank Vs ICICI Bank है, आईटी में TCS Vs Infosys है, उसी तरह से वायर्स सेक्टर में Polycab Vs Havells है। क्या इनवेस्टर्स हैवेल्स का रुख कर सकते हैं? इस स्टॉक ने इस साल 22 फीसदी रिटर्न दिया है। मौजूदा मार्केट में यह रिटर्न पर्याप्त लगता है। Havells के साथ मसल यह है कि इसका वैल्यूएशन पॉलीकैब से भी ज्यादा है। पिछली कुछ तिमाहियों में कंपनी की अर्निंग्स ग्रोथ बहुत भरोसा जगाने वाली नहीं रही है। Polycab के मैनेजमेंट ने कहा है कि कंपनी FY26 से पहले 20,000 करोड़ रेवेन्यू के टारगेट को हासिल कर लेगी। इसलिए फिलहाल पॉलीकैब का स्टॉक अट्रैक्टिव दिख रहा है।
Voltas के लिए मुश्किल है रास्ता
वोल्टास ने एक बार फिर अपने तिमाही नतीजों से निराश किया है। इसके मार्जिन पर लगातार दबाव बना हुआ है। जुलाई मध्य से सितंबर मध्य के बीच इस स्टॉक में 21 फीसदी तेजी आई है। इससे यह 900 रुपये के ऊपर पहुंच गया है। इस स्टॉक के बेहतर प्रदर्शन का भरोसा रखने वाले कुछ एनालिस्ट्स की दलील है कि वोल्टास के दूसरे बिजनेसेज के प्रदर्शन में इम्प्रूवमेंट से इसके मुख्य कूलिंग बिजनेस पर दबाव कम होगा। लेकिन, दूसरी तिमाही के नतीजों को देखने से ऐसा लगता है कि कंपनी के लिए अपनी बाजार हिस्सेदारी को फिर से हासिल करना मुश्किल होगा।
ITC के दूसरे तिमाही ने नतीजे अच्छे हैं। लेकिन, इसके सिगरेट बिजनेस की ग्रोथ सुस्त पड़ती दिख रही है। एनालिस्ट्स का कहना है कि पेपर और एग्री बिजनेस भी पिछड़ते दिख रहे हैं। ITC के स्टॉक्स की दोबारा रेटिंग की उम्मीद जताई जा रही थी। इसकी उम्मीद अब कम दिख रही है। कम से कम तब तक ऐसा होने की उम्मीद कम है, जब तक कंपनी अपने बिजनेस की रिस्ट्रक्चिरंग नहीं करती। हालांकि, सितंबर तिमाही के नतीजे अच्छे हैं, लेकिन इस स्टॉक को खरीदने की जल्दबाजी नहीं दिख रही। HUL के नतीजों को देखने से पता चलता है कि रूरल बिजनेस की ग्रोथ कमजोर है। कंपनी को जबर्दस्त प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में हालात में धीरे-धीरे सुधार आने की उम्मीद है। इसलिए वॉल्यूम में रिकवरी के लिए भी इंतजार करना होगा।