पिछले 18 महीनों से मिडकैप स्टॉक्स में जारी तेजी की वजह समझ से परे है। सवाल है कि क्या यह तेजी मजबूत फंडामेंटल्स पर आधारित है? जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजय कुमार ने एक बड़ी बात बताई है। उन्होंने कहा है कि स्मॉलकैप फंड्स बड़ा निवेश करने से परहेज कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड्स आम तौर पर कमीशन इनकम के लिए नए निवेश का स्वागत करते हैं। अगर, वे निवेशकों से नए निवेश नहीं ले रहे हैं तो इसका मतलब है कि बड़े निवेश के लिए वैल्यूएशन अभी ठीक नहीं है। बीएसई मिडकैप इंडेक्स का पी/ई 33 से ऊपर निकल गया है। आम तौर पर 25 से ज्यादा के पी/ई को काफी ज्यादा माना जाता है।
इधर, रेलिगेयर ब्रोकिंग (Religare Broking) के अजीत मिश्रा ने मनीकंट्रोल से बातचीत में मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) स्टॉक्स को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह इस बात का संकेत है कि दोनों सेगमेंट्स में वैल्यूएशन काफी ज्यादा है। कोटक सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में दिलचस्प बात बताई है। उसने कहा है कि पिछले 12 महीनों के रिटर्न में निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स के टॉप 25 शेयरों का करीब 50 फीसदी योगदान है। करीब 36 शेयरों ने इस दौरान 10 फीसदी से कम रिटर्न दिया है।
Garden Reach Shipbuilders and Engineers
जीएमआर पावर के शेयर 3 सितंबर को 5 फीसदी चढ़कर 141 रुपये पर बंद हुए। Authum Investments & Infra ने कंपनी में 1.2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। बुल्स का कहना है कि इंडिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में GMR Power की ग्रोथ की अच्छी संभावना दिखती है। खासकर यह एयरपोर्ट्स पर ईवी के लिए सुविधाएं शुरू कर सकती है, जो ग्रुप की कंपनियों की तरफ से ऑपरेट की जा सकती हैं। कंपनी ग्रीन एनर्जी में विस्तार कर रही है। यह स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट के टेंडर में भी बोली लगाने वाली है। इससे इसके शेयरों की फिर से रेटिंग हो सकती है। उधर, बेयर्स की दलील है कि कोयले की उपलब्धता से जुड़े किसी मसले का असर कंपनी की उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है। गैस आधारित पावर प्लांट्स को लेकर भी कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
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केंस टेक्नोलॉजी इंडिया के शेयर 3 सितंबर को 4 फीसदी के उछाल के साथ 4,848 रुपये पर बंद हुए। कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर पैकेजिंग प्लांट बनाने के कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह प्लांट 3,300 करोड़ रुपये में बनेगा। कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा है कि इससे इस सेगमेंट से रेवेन्यू FY26 की चौथी तिमाही तक शुरू हो जाने की उम्मीद है। FY28 तक इस सेगमेंट का रेवेन्यू में 1,500 करोड़ रुपये का कंट्रिब्यूशन होगा। FY30 तक सेमीकंडक्टर यूनिट का रेवेन्यू 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस हाई मार्जिन वाले सेगमेंट से कंपनी को मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी। उधर, बेयर्स की दलील है कि कोई देश इंडिया से सेमीकंडक्टर चिप पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है तो इसका असर कंपनी के रेवेन्यू पर पड़ेगा। इसके अलावा OSAT शुरू करने में एप्रूवल प्रोसेस में सरकार की तरफ से कोई देर होती है तो उसका असर भी रेवेन्यू पर पड़ेगा।