इस साल ब्लू-चिप शेयरों ने मारी बाजी; स्मॉलकैप, मिडकैप स्टॉक्स रह गए पीछे; आगे के लिए कैसा है आउटलुक
मिडकैप इंडेक्स उन कंपनियों को ट्रैक करता है, जिनकी मार्केट वैल्यू औसतन ब्लू-चिप कंपनियों का पांचवां हिस्सा होती है, जबकि स्मॉलकैप कंपनियां उस यूनिवर्स का लगभग दसवां हिस्सा होती हैं। स साल वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कमाई की विजिबिलिटी वाले लार्जकैप शेयरों पर फोकस किया
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के लिए आउटलुक सावधानी के साथ आशावादी बना हुआ है।
इस साल बढ़त के मामले में छोटे स्टॉक बड़े ब्लू-चिप शेयरों के मुकाबले पीछे रह गए। एनालिस्ट्स ने 2025 में स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के खराब प्रदर्शन का कारण 2023 और 2024 में उनके असाधारण प्रदर्शन के बाद मार्केट का नॉर्मल होना बताया। दो सालों की मजबूत रैली के बाद हाई वैल्यूएशन के कारण छोटे शेयरों में प्रॉफिट-बुकिंग हुई। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रुपये के कमजोर होने, अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड पर बातचीत को लेकर चिंता और विदेशी फंड के लगातार बाहर जाने से भी ब्रॉडर मार्केट में तेज रिस्क-ऑफ रिएक्शन हुआ।
आगे की राह को लेकर मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के लिए आउटलुक सावधानी के साथ आशावादी बना हुआ है। जैसे-जैसे वैल्यूएशन कम होगी और कमाई की विजिबिलिटी बेहतर होगी, भारत की स्थिर GDP ग्रोथ और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी के सपोर्ट से चुनिंदा मौके सामने आएंगे।
इस साल 24 दिसंबर तक BSE मिडकैप गेज मामूली रूप से 360.25 अंक या 0.77 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 3,686.98 अंक या 6.68 प्रतिशत गिर गया। इसके उलट 30-शेयरों वाला BSE सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 7,269.69 अंक या 9.30 प्रतिशत बढ़ा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है, "2024 में BSE स्मॉलकैप इंडेक्स ने 29 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया, जबकि मिडकैप इंडेक्स में 26 प्रतिशत की तेजी आई। यह सेंसेक्स से कहीं बेहतर थी। ऐसी तेज रैलियों ने वैल्यूएशंस को ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया, खासकर छोटी कंपनियों में जहां कमाई में ग्रोथ कीमतों में बढ़ोतरी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई। 2025 में यह असंतुलन ठीक होना शुरू हो गया।"
आगे कहा, "इस साल वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कमाई की विजिबिलिटी वाले लार्जकैप शेयरों पर फोकस किया। स्मॉलकैप और मिडकैप कंपनियों को अधिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा क्योंकि ये फंडिंग लागत, मार्जिन प्रेशर और आर्थिक मंदी के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। नतीजतन पूंजी, ब्लू-चिप शेयरों की ओर शिफ्ट हो गई, जिससे ब्रॉडर मार्केट सेगमेंट्स में रिलेटिव अंडरपरफॉर्मेंस देखने को मिली।" मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, छोटे शेयर आमतौर पर लोकल इनवेस्टर खरीदते हैं, जबकि विदेशी इनवेस्टर ब्लू-चिप शेयरों या बड़ी फर्मों के शेयरों पर फोकस करते हैं।
छोटे शेयरों की अंडरपरफॉर्मेंस हैरान करने वाली नहीं
इक्विटी रिसर्च और एसेट मैनेजमेंट फर्म ट्रस्टलाइन होल्डिंग्स के CEO एन अरुणागिरी का कहना है कि जब मार्केट टाइम करेक्शन से गुजरते हैं, जैसा कि सितंबर 2024 से हो रहा है, तो यह समझा जाता है कि छोटे और मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन खराब रहता है। यह उनके हायर बीटा और लिक्विडिटी, रिस्क लेने की क्षमता के प्रति अधिक संवेदनशीलता को देखते हुए एक स्वाभाविक नतीजा है। इस लिहाज से, इस साल सेंसेक्स और निफ्टी की तुलना में छोटे और मिडकैप शेयरों की रिलेटिव अंडरपरफॉर्मेंस हैरान करने वाली नहीं है।"
अरुणागिरी ने कहा कि अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड पर बातचीत को लेकर चिंता और FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की ओर से लगातार बिकवाली के कारण रुपया अचानक कमजोर हो गया। इससे ब्रॉडर मार्केट में तेज रिस्क-ऑफ रिएक्शन हुआ।
पिछले साल, BSE सेंसेक्स 5,898.75 अंक या 8.16 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निफ्टी 1,913.4 अंक या 8.80 प्रतिशत बढ़ा। पिछले साल BSE स्मॉलकैप गेज 12,506.84 अंक या 29.30 प्रतिशत चढ़ा और मिडकैप इंडेक्स 9,605.44 अंक या 26.07 प्रतिशत बढ़ा।
आगे की राह
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, "स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स के लिए आगे का रास्ता सावधानी भरा लेकिन आशावादी दिख रहा है। जैसे-जैसे वैल्यूएशन नीचे आएगी और कमाई की विजिबिलिटी बेहतर होगी, भारत की स्थिर GDP ग्रोथ और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी के सपोर्ट से चुनिंदा मौके सामने आने चाहिए। लार्जकैप स्टॉक्स स्थिरता देना जारी रख सकते हैं, जबकि ब्रॉडर मार्केट कमाई में रिकवरी पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।"
एनरिच मनी के पोनमुडी के मुताबिक, "2025 में देखी गई गिरावट के बाद क्वालिटी मिडकैप शेयरों में वैल्यूएशंस अपने पीक लेवल की तुलना में ज्यादा सही हो गए हैं। हालांकि, जब तक कमाई की ग्रोथ में अच्छा सुधार नहीं होता, तब तक बड़े पैमाने पर रैली की संभावना नहीं है। मार्केट परफॉर्मेंस का अगला दौर लिक्विडिटी के बजाय फंडामेंटल से चलने की उम्मीद है।"
अरुणागिरी का कहना है, "हमारा मानना है कि यहां से करेंसी मुख्य वेरिएबल बन जाती है। जैसे-जैसे रुपया स्थिर होगा और धीरे-धीरे अपने ऐतिहासिक REER (रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट) एवरेज की ओर नॉर्मल होगा, ब्रॉडर मार्केट वैल्यूएशंस पर दबाव कम होना चाहिए। ऐसे में हमें उम्मीद है कि स्मॉल और मिडकैप में अच्छी रिकवरी होगी, जिससे लार्जकैप के साथ परफॉर्मेंस का अंतर कम होगा।"
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