एक मल्टीबैगर जो आपको सिर्फ 7 दिनों में करोड़पति बना देगा। या फिर एक दिन में 1000 रुपए के शेयर लाख रुपए के बन जाएंगे... यूट्यूब स्क्रॉल करते हुए कई बार आप ऐसी हेडलाइन देखकर ठहरे जरूर होंगे। इन बातों से दिमाग भले ही चकरा जाए लेकिन दिल तो यही कहता होगा कि काश कोई ऐसा शेयर हमें भी सजेस्ट कर दे। और इस चक्कर में आप तमाम यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया वाले मार्केट गुरु और झोला छाप एक्सपर्ट्स की बातों पर भरोसा कर लेते हैं और अपना पूरा पैसा गंवा देते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि सेबी ने इस मामले में कड़ा एक्शन लिया है।
मार्केट की तेजी से बौराए रिटेल इनवेस्टर्स Fomo के चक्कर में फंस गए हैं। और कभी सोशल मीडिया पर पढ़कर या कभी यूट्यूब देखकर पैसा लगा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों का नुकसान ही होता है। कुछ ऐसे खुशनसीब लोग हैं जिन्हें थोड़ा बहुत प्रॉफिट हो जाता है तो अगली बार और जोश से पैसा लगाते हैं। और फिर पूरा पैसा डूबाकर मार्केट से बाहर निकल जाते हैं। रिटेल इनवेस्टर्स के साथ ऐसा ना हो इसलिए सेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी और भ्रामक कॉन्टेंट के 8,890 मामलों की पहचान की है। इनसे जुड़े अकाउंट्स के खिलाफ झूठे दावों के लिए कार्रवाई की भी जाएगी। मार्केट रेगुलेटर के मुताबिक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब पर स्टॉक मार्केट के बारे में झूठे दावे किए जा रहे हैं। और ऐसा प्रचार करने वालों के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई होगी।
इस बारे में सरकार की तरफ से राज्यसभा में दी गई जानकारी में कहा गया है कि 17 जुलाई, 2024 तक SEBI ने स्टॉक मार्केट से जुड़े 8,890 गैरकानूनी और भ्रामक सोशल मीडिया कंटेंट से संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लीगल एक्शन के बारे में जानकारी दी है।" पिछले एक साल से सेबी ऐसे भ्रामक या गैरकानूनी सलाह पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहा है जो फाइनेंशियल इनफ्लूएंसर्स या फिनफ्लूएंसर्स की तरफ से दिए जाते हैं।
दिलचस्प तो ये है कि रिटेल इनवेस्टर्स को मार्केट पर ज्ञान देने वाले ज्यादातर एक्सपर्ट्स स्वयंभू हैं। यानि ये बिना सेबी में रजिस्ट्रेशन करवाए ही इनवेस्टमेंट टिप्स दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर शेयर मार्केट की बातें करने वाले फिनफलूएंसर्स बड़े आत्मविश्वास से स्टॉक्स के बारे में टिप्स और निवेश सलाह तो दे देते हैं लेकिन इससे आम निवेशकों का रिस्क बढ़ जाता है। सेबी ने कहा है कि निवेशकों को गारंटीड रिटर्न देने का वादा किया जाता है। उन्हें कनफ्यूज करने के लिए टेक्निकल शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
दरअसल पिछले कुछ समय से यह मामला इसलिए सेबी की नजरों में आया है क्योंकि बाजार लगातार नया हाई बना रहा है। ऐसे में शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है और इसी का फायदा उठाकर फिनफ्लूएंसर्स रिटेल इनवेस्टर्स को बरगला रहे हैं। सेबी ने इस मामले में तब सख्ती बढ़ाई है जब शेयरों में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। रिटेल इनवेस्टर्स के जोश का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि मार्च 2024 में डीमैट अकाउंट्स की संख्या बढ़कर 15.1 करोड़ पहुंच गई थी। सोशल मीडिया इनफ्लूएंसर्स अब बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर में भी दाखिल हो गए हैं। Kofluence की 2024 इनफ्लूएंसर मार्केटिंग रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया के इनफ्लूएंसर मार्केटिंग स्पेस में BFSI सेक्टर की करब 15.4 फीसदी हिस्सेदारी है।
सेबी ने इस मामले में 27 मई को जारी किया था ड्रॉफ्ट सर्कुलर। फाइनेंशियल एडवाइस के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता को देखते हुए सेबी ने इस साल 27 मई को एक ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया था। इसमें इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स को सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी के बारे में डिटेल जानकारी देने को कहा गया था। उन्हें अपने अकाउंट्स, पेजेज और चैनल के बारे में भी बताने को कहा गया था। उन्हें साल में दो बार यह जानकरी देनी है।
इसीलिए मनीकंट्रोल बार-बार अपने दर्शकों और पाठकों को सचेत करता है कि सही फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेकर ही इनवेस्ट करें। ।