Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 7 कारणों से तबाही, सेंसेक्स 2300 अंक टूटा, निफ्टी 23,800 के नीचे

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार आज 9 मार्च को खुलते ही क्रैश हो गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 2300 अंक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 23,800 से भी नीचे चला गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल का दाम 115 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद शेयर बाजार में आज हाहाकार की स्थिति रही

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 4:41 PM
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Stock Market Crash: सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार आज 9 मार्च को खुलते ही क्रैश हो गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 2300 अंकों तक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 23,700 से भी नीचे चला गया। यह सेंसेक्स और निफ्टी का पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल का दाम 115 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद शेयर बाजार में आज हाहाकार की स्थिति रही। ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों से भी निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566.16 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 76,424.55 तक गिर गया था। वहीं निफ्टी भी दिन के निचले स्तर 23,697.80 से कुछ संभलते हुए 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,028.05 पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 7 बड़े कारण रहे-


1. क्रूड ऑयल के दाम में तेज उछाल

शेयर बाजार में आज की यह भारी बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर $115 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह पूरे ग्लोबल मार्केट्स के लिए एक बड़ा झटका है और इससे फिर से महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए बड़ा असर डाल सकता है। उन्होंने कहा, “ब्रेंट क्रूड $115 से ऊपर पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों को बड़ा 'क्रूड शॉक' लगा है। अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबे समय तक चलता रहा और तेल की कीमतें ऊंची रहीं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका भारी असर पड़ेगा। बाजार इस तेल झटके के आर्थिक परिणामों को अपनी कीमतों में शामिल करना शुरू कर देगा।”

वीके विजयकुमार ने कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई पर पड़ सकता है, चाहे इसकी पूरी कीमत उपभोक्ताओं पर डाली जाए या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई कितने समय तक चलेगी, इसको लेकर बनी अनिश्चितता विदेशी निवेशकों (FII) के सेंटीमेंट पर भी दबाव बना सकती है।एनालिस्ट्स का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है। इसके कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकते हैं, जिससे फाइनेंशियल मार्केट्स में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।

ग्लोबल मार्केट्स से भी आज भारतीय बाजार को कोई सपोर्ट नहीं मिला। एशियाई शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में तेजी से गिर गए। जापान का निक्केई इंडेक्स 6% से ज्यादा टूट गया, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ नीचे आया। अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की आशंका से चिंतित दिखे, जिसकी वजह से बाजारों में बिकवाली बढ़ गई।

मजबूत होता अमेरिकी डॉलर भी बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं रहा। खासकर मेटल सेक्टर के शेयरों के लिए। यूएस डॉलर इंडेक्स लगभग 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। वहीं भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92.20 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के पास खुला। डॉलर के मजबूत होने और रुपये के कमजोर होने से बाजार पर दबाव बढ़ा है, खासकर उन सेक्टरों पर जो ग्लोबल कीमतों और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से ज्यादा प्रभावित होते हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी लगातार शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने लगभग 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। डॉ वीके विजयकुमार ने कहा कि फरवरी में जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने खरीदारी दिखाई थी, वह मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण उलट गई है। मार्च के पहले चार कारोबारी दिनों में FPIs ने 21,829 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के चलते बनी अनिश्चितता, बाजार में लगातार गिरावट, तेल की कीमतों में तेज उछाल और रुपये में गिरावट, इन सब कारणों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं।

शेयर बाजार में मौजूद अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX इंडेक्स 18% से ज्यादा उछलकर 23.52 पर पहुंच गया। यह निवेशकों की बढ़ती चिंता और घबराहट को दिखाता है।

7. चौतरफा बिकवाली

निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा गिरने वाला सेक्टर रहा और इसमें 4.8% की गिरावट आई। वहीं निफ्टी बैंक इंडेक्स करीब 3.8% नीचे चला गया। इसके अलावा निफ्टी ऑटो इंडेक्स लगभग 3.3% गिरा, जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई। दूसरे प्रमुख सेक्टरोल इंडेक्स भी काफी नीचे कारोबार करते दिखे।

इसके अलावा निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग 2.9% तक गिर गया। वहीं निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 2.8% की गिरावट आई और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.7% नीचे कारोबार करता दिखा

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