Stock Market view : कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट के विकास खेमानी की राय है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और तेल की कीमतों के 100 डॉलर से ऊपर जाने के बीच बाज़ार में 10 फीसदी की गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि यह "पैसा लगाने का समय है।" उन्होंने आगे कहा कि ईरान लीडरशिप को बड़े नुकसान के बावजूद जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इससे यह साफ दिखाता है कि उनके पास लड़ाई को जारी रखने का प्लान है। ऐसी स्थितियों से आमतौर पर मार्केट को लॉन्ग टर्म में कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि, कुछ समय के लिए अनिश्चितता जरूर पैदा होती है।
खबरों पर रिएक्ट करेगा बाजार
खेमानी को उम्मीद है कि आने वाले हफ़्तों में इंडियन मार्केट में उठापटक जारी रहेगी और बाजार खबरों पर रिएक्ट करेगा। उन्होंने कहा,"कोई एक खबर मार्केट को नीचे धकेल सकती है और दूसरी उसे तेज़ी से ऊपर उठा सकती है।" उन्होंने बताया कि जियोपॉलिटिकल संकट के दौरान मिल रही जानकारियों पर भरोसा अक्सर कम होता है,जिससे उन पर होने वाले शॉर्ट-टर्म मार्केट रिएक्शन का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
घरेलू इकोनॉमी से जुड़े शेयरों में निवेश के मौके
हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि अगर मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ते हैं तो इन्वेस्टर्स को अपनी खरीदारी धीरे-धीरे करनी चाहिए, एकमुश्त बड़े निवेश से बचना चाहिए। खेमानी को इस समय बैंक,फार्मा और कंजम्प्शन जैसे घरेलू इकोनॉमी से जुड़े शेयरों में निवेश के मौके दिख रहे हैं। ऐसे समय में उनकी ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़े सेक्टर्स से दूर रहने की सलाह है।
कच्चा तेल बाजार के लिए अहम फैक्टर है। इसकी वजह से यह लड़ाई भारत पर असर डाल सकती है,क्योंकि देश एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भर है। लेकिन उनका यह भी मानना है कि सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त से कोई बहुत बड़ा आर्थिक असर होने की संभावना नहीं है
इस हफ़्ते की शुरुआत में मनीकंट्रोल FiDEX 2026 में खेमानी ने कहा था कि जियोपॉलिटिकल रिस्क इन्वेस्टिंग की दुनिया की एक बड़ी सच्चाई है। उन्होंने अपने करियर में मार्केट को बार-बार चुनावों,ग्लोबल झगड़ों और इकोनॉमिक झटकों का सामना करते देखा है। इसके साथ ही बाजार ने लॉन्ग टर्म में मज़बूत रिटर्न भी दिया है।
उन्होंने भारत के मज़बूत मैक्रोज़ पर ज़ोर देते हुए कहा"भारत की इकॉनमी बहुत मज़बूत है। हमारा क़र्ज़ GDP रेश्यो अच्छी स्थिति में है,हमारा बैंकिंग सिस्टम अच्छा है,महंगाई कंट्रोल में है,हमारा फ़िस्कल डेफ़िसिट कंट्रोल में है,हमारा करंट अकाउंट डेफ़िसिट कंट्रोल में है,कॉर्पोरेट फ़ंडिंग ठीक हो रही है,हम फ़िस्कल स्टिमुलस और मॉनेटरी स्टिमुलस पर बैठे हैं। असल में,इकॉनमी बहुत अच्छी चल रही है।"
उन्होंने चुनाव और दूसरी ग्लोबल उथल-पुथल जैसी पिछली घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा "मुझे अपने करियर में ऐसा कोई समय नहीं दिखा जब किसी इन्वेस्टर के मन में कोई रिस्क या अनिश्चितता न हो। दुनियाभर में हमेशा कुछ न कुछ ऐसा होता रहता है, जिससे बाजार में अनिश्चितता होती है।"
खेमानी ने भारत के ट्रैक रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए कहा "भारत ने 17-18% CAGR रिटर्न दिया है,जो मेरी राय में दुनिया के उन दो मार्केट में से एक है जो डेवलप हो रहे हैं। इसलिए,भारत में एक बहुत ही दिलचस्प और इन्वेस्ट करने लायक मौका दिख रहा है।"
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