Market outlook : अगर US-ईरान संघर्ष लंबा खिंचा तो शुरू हो सकता है गिरावट का नया दौर - वालट्रस्ट के राहुल भूतोरिया
Market outlook : वालट्रस्ट के राहुल भूतोरिया का कहना है कि चौथी तिमाही में एविएशन,लॉजिस्टिक्स,पेंट्स और केमिकल्स पर ईरान युद्ध का असर दिख सकता है। अगर US-ईरान संघर्ष लंबा चलता है तो रीप्राइसिंग का दूसरा चरण देखने को मिल सकता जिसकी वजह युद्ध का डर नहीं,बल्कि फंडामेंटल्स में कमजोरी होगी
राहुल भूतोरिया ने कहा कि हेल्थकेयर के वैल्यूशन अच्छे नजर आ रहे हैं। इनमें भी घरेलू फॉर्मूलेशन और हॉस्पिटल चेन ज्यादा अच्छे दिख रहे हैं
Market outlook : मार्केट अभी यह मान कर चल रहा है कि मिडल-ईस्ट में चल रहा तनाव जल्द ही कम होगा। अगर यह अंदाज़ा सही साबित होता है तो बाजार को राहत मिलेगी। अगर US-ईरान संघर्ष लंबा चलता है तो रीप्राइसिंग का दूसरा चरण देखने को मिल सकता जिसकी वजह युद्ध का डर नहीं,बल्कि फंडामेंटल्स में कमजोरी होगी। सेंट्रल बैंक ग्रोथ और इन्फ्लेशन के ट्रेंड पर कैसे प्रतिक्रया करेगा, इसके शुरुआती संकेतों के लिए RBI की अप्रैल पॉलिसी कमेंट्री पर फोकस रहेगा। ये बातें वालट्रस्ट के डायरेक्टर और को-फाउंडर राहुल भूतोरिया ने कही हैं।
मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा अगर क्रूड का एवरेज प्राइस लंबे समय तक 90 डॉलर से ऊपर बनी रहता है तो फिस्कल प्रेशर और आगे मॉनेटरी ढील की कम गुंजाइश के चलते इकोनॉमिक ग्रोथ में 25–30 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। ऐसे में RBI की अप्रैल पॉलिसी कमेंट्री पर करीब नजर रखनी चाहिए, ताकि इस बात के शुरुआती सिग्नल मिल सकें कि सेंट्रल बैंक ग्रोथ-इन्फ्लेशन ट्रेड-ऑफ को कैसे देख रहा है।
क्या आपको लगता है कि फीयर का पीक मार्केट में पहले ही तय हो चुका है,जब तक कि ईरान में कोई ऐसी घटना न हो जाए जिसकी उम्मीद न हो?
मार्केट ने जियोपॉलिटिकल झटके का कुछ हद तक अंदाज़ा लगा लिया है,लेकिन पूरे मैक्रो असर का अंदाजा नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही पर रुकावट से कच्चे तेल में तेजी और इक्विटी जैसे रिस्क एसेट्स में बिकवाली शुरू हो गई। यह तात्कालिक प्रतिक्रिया अब हल्की पड़ गई है। जिस चीज़ का अभी तक पूरी तरह अंदाज़ा नहीं लगाया गया है,वह है कि अगर यह बाधा बनी रहती है तो इसके आर्थिक नतीजे क्या होंगे? इससे भारत के करंट अकाउंट घाटे में बढ़ोतरी हो सकती है,रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और महंगे क्रूड से महंगाई में तेजी आ सकती है।
यह परेशानी सिर्फ क्रूड ऑयल तक ही सीमित नहीं है। ग्लोबल LNG सप्लाई का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी स्ट्रेट से गुज़रता है। इस सप्लाई में अकेले कतर का हिस्सा काफी बड़ा है। भारत के LNG पर निर्भर फर्टिलाइज़र,सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और इंडस्ट्रियल जैसे सेक्टर एक पैरेलल सप्लाई और कॉस्ट रिस्क का सामना कर रहे हैं। मार्केट पर अभी तक इसका पूरा असर नहीं दिखा है।
मार्केट अभी यह मान कर चल रहा है कि मिडल-ईस्ट में चल रहा तनाव जल्द ही कम होगा। अगर यह अंदाज़ा सही साबित होता है तो बाजार को राहत मिलेगी। अगर US-ईरान संघर्ष लंबा चलता है तो रीप्राइसिंग का दूसरा चरण देखने को मिल सकता जिसकी वजह युद्ध का डर नहीं,बल्कि फंडामेंटल्स में कमजोरी होगी।
क्या आपको लगता है कि अगले कुछ हफ़्तों में मार्केट कंसोलिडेट होगा और मार्च के आखिर तक रिकॉर्ड-हाई लेवल से ऊपर चला जाएगा? क्या मार्केट अभी भी CY 2026 में लगभग 15 परसेंट रिटर्न दे सकता है?
नियर टर्म में कंसोलिडेशन की संभावना है। अभी के लिए सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें है। अगर कच्चे तेल की वजह से होने वाली महंगाई फिर से बढ़ती है तो मॉनीटरी पॉलिसी में इसका असर दिख सकता है। अगर ब्रेंट अगले दो हफ़्तों में 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आता है घरेलू मैक्रो जैसे अर्निंग साइकिल,सरकारी कैपेक्स और ग्रामीण खपत में रिकवरी हो सकती है। इसके चलते मार्च के आखिर तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर वापसी संभव है। लेकिन इसके लिए जियोपॉलिटिकल रिस्क के कम होने की जरूरत है। लेकिन अभी के माहौल में CY2026 में 15 परसेंट रिटर्न की उम्मीद कम है। हालांकि, यह असंभव भी नहीं है।
क्या आपको लगता है कि भारतीय IT कंपनियों पर AI का असर काफी ज़्यादा होगा और अभी तक स्टॉक्स पर इसका पूरा असर नहीं दिखा है?
AI भारतीय IT सर्विसेज़ के लिए शॉर्ट टर्म रिस्क है और आगे चलकर यह एक अच्छा ग्रोथ ड्राइवर बन सकता है। अभी इसके असर का अंदाजा लगाना मुश्किल है। मार्केट ने इससे जुड़े कुछ रिस्क का अंदाज़ा लगाया है,लेकिन AI से होने वाले फायदे का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।
टॉप-टियर आईटी कंपनियां जैसे TCS, इंफ़ोसिस और HCL टेक्नोलॉजीज़ AI कैपेबिलिटी में भारी निवेश कर रही हैं। फिर भी GenAI रेवेन्यू का कंट्रीब्यूशन कुल रेवेन्यू का एक छोटा सा हिस्सा ही है। दुनिया भर में डिस्क्रिशनरी खर्च में कमी और US टैरिफ़ की अनिश्चितता को देखते हुए क्लाइंट की सावधानी बरत रहे हैं। इसका मतलब है कि नियर टर्म की अर्निंग विज़िबिलिटी कमजोर है।
ऐसे में आईटी के वैल्यूएशन पर करीब से नज़र रखने की जरूरत। अगर सेक्टर में और गिरावट आती है,तो मार्जिन ऑफ़ सेफ़्टी काफ़ी बढ़ सकता है। इस स्थिति में एक्टिव IT फ़ंड, IT ETF, या चुनिंदा डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट के ज़रिए निवेश के अच्छे मौके होंगे।
खास बात यह है कि मौजूदा डेटा इस बात को चुनौती दे रहा है कि AI टेक्नोलॉजी में रोज़गार को बहुत कम कर देगा। पिछले कुछ सालों में AI-स्किल्ड प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ी है और कंपनियां एआई स्किल्स के लिए अच्छी सैलरी दे रही हैं। कई तरह से, AI टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ के लिए मौके बढ़ा रहा है,उन्हें खत्म नहीं कर रहा है। भारतीय IT कंपनियां अपने मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट पूल के साथ एआई अपनाने में तेज़ी आने से फ़ायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।
क्या आपको डिफेंस और हेल्थकेयर सेगमेंट के वैल्यूएशन अच्छे दिख रहे हैं?
हेल्थकेयर के वैल्यूशन अच्छे नजर आ रहे हैं। इनमें भी घरेलू फॉर्मूलेशन और हॉस्पिटल चेन ज्यादा अच्छे दिख रहे हैं। इनकी कमाई की विज़िबिलिटी ज़्यादा है और हाल ही में मार्केट में गिरावट के बाद इनके वैल्यूएशन ठीक-ठाक लेवल पर आ गए हैं।
डिफेंस शेयरों पर ज़्यादा बारीक नजर रखने की जरूर है। इनके स्ट्रक्चरल ऑर्डर इनफ्लो मज़बूत हैं,लेकिन से कई शेयरों के वैल्यूएशन अभी भी लगभग परफेक्ट एग्ज़िक्यूशन सिनेरियो में हैं। हम प्योर-प्ले थीमैटिक बेट्स के बजाय डायवर्सिफाइड ऑर्डर बुक और प्रूवन डिलीवरी ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को पसंद करते हैं। ऐसे में हमें इस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए।
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