शेयर बाजार में हाल में जोरदार गिरावट देखने को मिली है। चूंकि बाजार में करेक्शन के साथ-साथ तेजी का भी ट्रेंड नजर आता है, लिहाजा 'गिरावट पर निवेश' की रणनीति रिटेल इनवेस्टर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है। कई रिटेल इनवेस्टर्स उन कंपनियों के ज्यादा शेयर खरीदने के लिए मार्केट करेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जो पहले से उनके पास मौजूद रहता है। इस रणनीति को एवरेजिंग कहते हैं। हम आपको यहां एवरेजिंग के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
स्टॉक मार्केट में एवरेजिंग क्या होता है?
आसान शब्दों में कहें, तो एवरेजिंग का मतलब अलग-अलग समय में अलग-अलग कीमतों पर शेयरों की खरीद है, ताकि शेयरों की औसत कॉस्ट कम करने में मदद मिले।
एवरेजिंग का सिद्धांत इस आधार पर काम करता है कि बाजार के मूवमेंट के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता है। यहां तक कि सबसे ज्यादा कौशल वाले निवेशकों को भी इस बात का अहसास रहता है कि सबसे निचले स्तर पर शेयरों को खरीदना और उन्हें सबसे ऊंचे स्तर पर बेचना तकरीबन नामुमिकन है। नतीजतन, एक ही बार में निवेश करने के बजाय अलग-अलग निवेश करना बेहतर रहता है।
एवरेजिंग पर विचार करने से पहले शेयरों का चुनाव क्यों जरूरी है?
सही स्टॉक्स का चुनाव या पोर्टफोलियो तैयार करना बेहद अहम है और एवरेजिंग पर विचार करने या परचेज से जुड़े किसी भी फैसले से पहले ऐसा करना जरूरी है। सबसे अहम बात निवेशकों के लिए सावधानीपूर्वक सही शेयरों का चुनाव करना है। इस चुनाव के बाद निवेशकों को अपनी पूंजी का एक हिस्सा चुने गए शेयरों में आवंटित करना चाहिए और एक बार निवेश करने के बजाय अलग-अलग समय में निवेश करना चाहिए। इस रणनीति से आपको जोखिम से बचने में मदद मिल सकती है।
स्टॉक की खरीदारी में एवरेजिंग का इस्तेमाल किस तरह करना चाहिए?
म्यूचुअल फंडों में सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) की तरह निवेशकों को अलग-अलग चरणों में अलग-अलग कीमतों पर शेयर खरीदना चाहिए। इस तरीके से आप बेहतर एवरेज एंट्री प्राइस पर खरीदारी कर सकते हैं। अलग-अलग लेवल पर खरीद की वजह से निवेश बाजार में उतार-चढ़ाव का फायदा भी उठा सकते हैं और इस तरह उनकी औसत कॉस्ट कम होगी।