Stock market news: NSE ने फिन निफ्टी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए क्वांटिटी फ्रीज़ लिमिट में बदलाव किया है। नई लिमिट 1 दिसंबर, 2025 से लागू होंगी। फिन निफ्टी के लिए बदला हुआ क्वांटिटी फ्रीज़ अब 1800 के बजाय 1200 है। शुक्रवार को जारी एक सर्कुलर में, एक्सचेंज ने कहा कि ये बदलाव 30 अप्रैल, 2025 के उसके F&O कंसोलिडेटेड सर्कुलर में बताए गए कैलकुलेशन मेथड को फॉलो करेंगे।
क्वांटिटी फ़्रीज़ लिमिट एक सेफ़गार्ड (जोखिम रोकने के उपाय) के तौर पर काम करती है। इसका मकसद गलत या बहुत ज़्यादा बड़े ऑर्डर को रोकना है। ऐसे ऑर्डरों के चलते मार्केट की स्टेबिलिटी बिगड़ सकती है।
नई क्वांटिटी फ़्रीज़ लिमिट
बैंक निफ्टी के लिए नई क्वांटिटी फ़्रीज़ लिमिट 600 होगी। निफ्टी के लिए 1,800, फिन निफ्टी के लिए 1,200, मिडकैप निफ्टी के लिए 2,800 और निफ्टी नेक्स्ट 50 के लिए 600 होगी। बता दें कि क्वांटिटी फ़्रीज़ लिमिट का इस्तेमाल गलत और बड़े ट्रेड को रोकने के लिए एक ऑर्डर की मैक्सिमम साइज़ को नियंत्रित करती है।
क्या है क्वांटिटी फ्रीज़ लिमिट
एक्सचेंज समय-समय पर क्वांटिटी फ्रीज़ लिमिट में बदलाव करते रहते हैं। क्वांटिटी फ्रीज़ लिमिट गलत या बहुत बड़े ऑर्डर को रोकने के लिए एक सुरक्षा उपाय के तौर पर काम करती हैं। इससे मार्केट में स्टेबिलिटी बनाए रखने में सहायता मिलती है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट में अधिकतम ऑर्डर साइज़ की लिमिट लगाकर, एक्सचेंज “फैट फिंगर” ट्रेड के जोखिम को कम करता है और डेरिवेटिव मार्केट का काम आसान बनाता है।
अगर ट्रेडर एक्सचेंज द्वारा तय किए गए लॉट साइज़ से ज़्यादा लॉट साइज़ डालते हैं, तो एक्सचेंज का सिस्टम ऐसे ऑर्डर को तब तक रिजेक्ट कर देता है, जब तक ब्रोकर सिस्टम ऐसे ट्रेड को कई हिस्सों में बांटकर तय लिमिट के अंदर नहीं ले आता।