Stock market news: रिटेल निवेशकों ने अप्रैल और मई में की जमकर खरीदारी, क्या बना रहेगा यह जोश?

Stock market news: अकेले अप्रैल महीने में ही,रिटेल निवेशकों ने 18,222 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह अक्टूबर 2024 के बाद से उनकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी थी। NSE के आंकड़ों के अनुसार,यह रफ़्तार मई में भी जारी है। इस महीने अब तक रिटेल निवेशकों ने 4,800 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे हैं

अपडेटेड May 14, 2026 पर 7:44 AM
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Market Outlook : एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे बाजार की दिशा तय करने में मध्य-पूर्व की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों की अहम भूमिका होगी। हमें इन पर नजर रखनी चाहिए

Stock Market News : महीनों तक हासिए पर रहने के बाद,रिटेल निवेशक अब भारतीय इक्विटी बाजार में वापस लौट रहे हैं। अप्रैल की शुरुआत से ही इनकी खरीदारी की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। यह लंबे समय तक बरती गई सावधानी के बाद निवेशकों के रुख में बदलाव का संकेत है।अकेले अप्रैल महीने में ही,रिटेल निवेशकों ने 18,222 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह अक्टूबर 2024 के बाद से उनकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी थी। NSE के आंकड़ों के अनुसार,यह रफ़्तार मई में भी जारी है। इस महीने अब तक रिटेल निवेशकों ने 4,800 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे हैं।

पिछले वित्त वर्ष हुई थी भारी बिकवाली

खरीदारी का यह नया दौर पिछले वित्त वर्ष के दौरान लगातार हुई बिकवाली के बाद सामने आया है। रिटेल निवेशकों ने FY25 में 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए थे। यह FY24 के मुकाबले एक बड़ा बदलाव था,जब उन्होंने बाजार में 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया था।


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रिटेल निवेशक दे रहे भारतीय इक्विटीज़ में वापसी के संकेत

चॉइस वेल्थ (Choice Wealth) के CEO निकुंज सराफ ने कहा कि रिटेल निवेशक साफ तौर पर भारतीय इक्विटीज़ में वापसी के संकेत दे रहे हैं। अप्रैल-मई में खरीदारी का ट्रेंड'बाय-ऑन-डिप'(गिरावट पर खरीदारी) का एक क्लासिक उदाहरण लगता है।

करेक्शन के बाद मार्केट में वैल्यूएशन सही स्तर पर आया

जनवरी में बाजार में अपने अब तक के हाई से तेज से गिरावट आई थी। पहले टैरिफ से जुड़ी चिंताओं और बाद में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण बाजार पर बिकवाली का दबाव पड़ा। इस करेक्शन से बड़े शेयरों और Nifty 500 स्टॉक्स के वैल्यूएशन फिर से सही स्तर पर आ गए थे। इसके चलते निवेश के अच्छे मौके बने। Q4FY26 के अच्छे नतीजों (खासकर खपत पर आधारित सेक्टरों में) और ब्याज दरों में कटौती ने खुदरा निवेशकों की भागीदारी में आई तेजी को और भी सहारा दिया है।

मार्केट एक्सपर्ट दीपक जसानी का कहना है कि एक तेज गिरावट के बाद (खासकर स्मॉल और मिड-कैप में) वैल्यूएशन आकर्षक स्तरों पर पहुंच गए हैं,जिससे रिटेल निवेशकों ने अपनी डायरेक्ट इक्विटी होल्डिंग्स में और निवेश किया है।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा लगता है कि कई निवेशकों ने अपने पसंदीदा स्टॉक पहचान लिए हैं और उन्हें खरीद लिया है,जबकि अन्य लोगों ने ऊंची कीमतों पर खरीदे गए अपने स्टॉक की एवरेजिंग कर ली होगी। उन्होंने एक और पहलू की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि SIP या म्यूचुअल फंड के ज़रिए किए गए एकमुश्त निवेश से उम्मीद के मुताबिक रिटर्न न मिलने से कुछ निवेशक निराश हुए होंगे और शायद इसी वजह से उन्होंने सीधे इक्विटी में निवेश करना शुरू कर दिया होगा।

अच्छी क्वालिटी के दिग्गज शेयरों में हो सकता है फोकस

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज के डायरेक्टर और CEO अजय गर्ग ने कहा कि इस समय बाजार का स्ट्रक्चर बेहतर हो गया है। घरेलू बाजार में अच्छी लिक्विडिटी,SIP में लगातार निवेश और कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी बाजार के सेंटिमेंट को सपोर्ट दे रही हैं। हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि यह रिकवरी व्यापक होने के बजाय चुनिंदा शेयरों तक ही सीमित रह सकती,जिसमें निवेशक अच्छी क्वालिटी वाले लार्ज-कैप और फंडामेंटली मज़बूत सेक्टर्स पर फोकस करेंगे।

बाजार में अभी भी जोखिम कायम

इस उत्साहजनक रुझान के बावजूद, बाजार में अभी भी जोखिम बना हुआ है। हम अभी भी फीयर जोन में काम कर रहे हैं। वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX 19 के आस-पास घूम रहा है,जो बढ़ी हुई अनिश्चितता का संकेत है। निकट भविष्य का सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल का $100 प्रति बैरल से ऊपर बने रहने का डर है। अगर ऐसा लंबे समय तक चलता है तो इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और GDP ग्रोथ में 25 से 75 बेसिस पॉइंट्स की कमी आ सकती है।

जसानी ने कहा कि अगर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है,तो खरीदारी जारी रह सकती है। लेकिन अगर बाजार एक ही दायरे में बने रहते हैं तो यह खरीदारी शायद ज्यादा समय तक न टिक पाए।

आगे बाजार की दिशा तय करने में मध्य-पूर्व की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों की अहम भूमिका होगी। हमें इन पर नजर रखनी चाहिए। सराफ और जसानी दोनों का ही कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो इससे रुपया स्थिर हो सकता है और भारतीय शेयर बाजारों में ज़ोरदार रिकवरी देखने को मिल सकती है।

टेक्निकल आउटलुक

निकुंज सराफ ने कहा कि तकनीकी नजरिए से देखें तो Nifty 50 को 24,200 से 24,400 के स्तरों के आसपास एक अहम रेजिस्टेंस जोन का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि,एक पॉजिटिव स्ट्रक्चरल ट्रेंड अभी भी बरकरार है। SIP इनफ्लो अभी भी मज़बूत है और इसमें तेजी बने रहने की संभावना है। यह शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी के बावजूद रिटेल निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता और दीर्घकालिक भागीदारी को दर्शाता है।

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