एक साल से गिर रहा महारत्न PSU स्टॉक, अब आ सकती है 42% की तेजी, मार्केट खुलते ही भागा शेयर
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने सितंबर तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जो अनुमान से कई गुना आगे है। इसके बाद नोमुरा ने Buy रेटिंग के साथ 185 रुपये का टारगेट दिया है, जो 42.2% अपसाइड दिखाता है। सोमवार को शेयर 3% ऊपर खुला।
पिछले 12 महीनों में 22% से ज्यादा गिर चुके IOC शेयर पर नोमुरा ने 185 रुपये का टारगेट दिया है।
महारत्न PSU स्टॉक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) के शेयर लगभग एक साल से निवेशकों को रुला रहे हैं. पिछले एक साल में स्टॉक लगभग 22% गिर चुका है. हालांकि, अब शेयर में तेजी की उम्मीद है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने IOC के तिमाही नतीजों के बाद स्टॉक पर अपनी रिपोर्ट जारी की है और Buy रेटिंग के साथ शेयर पर 42% अपसाइड का बड़ा टारगेट प्राइस भी दिया है. बड़ी बात ये है कि आज जैसे ही शेयर बाजार खुला, स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और स्टॉक अपने पिछले बंद भाव (130 रुपये) से 3% ऊपर खुला.
नोमुरा को 185 रुपये तक जाता दिख रहा शेयर
नोमुरा ने नतीजों के बाद IOC पर अपनी Buy रेटिंग कायम रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि दूसरी तिमाही में कंपनी की कमाई उम्मीद से कहीं बेहतर रही और इसके पीछे मजबूत ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) और इन्वेंट्री गेन का बड़ा हाथ है।
ब्रोकरेज के मुताबिक नतीजों के अनुमान से आगे निकलने की सबसे बड़ी वजह 6,950 करोड़ रुपये का इन्वेंट्री गेन रहा। इसके साथ ही फ्यूल मार्केटिंग में होने वाला घाटा और LPG पर अंडर-रिकवरी भी अनुमान से कम रही। तीनों चीजें एक साथ कंपनी के पक्ष में गईं और नतीजों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
नोमुरा के हिसाब से कंपनी का 21,600 करोड़ रुपये का मुनाफा उसके अपने अनुमान 7,500 करोड़ रुपये और कंसेंसस अनुमान 5,900 करोड़ रुपये, दोनों से काफी ज्यादा रहा। मतलब बाजार जितना सोच रहा था, कंपनी उससे कई कदम आगे निकल गई।
GRM को लेकर भी नोमुरा ने अपना आकलन दिया है। GRM वो कमाई है जो रिफाइनरी कच्चे तेल के हर बैरल को प्रोसेस करके निकालती है। नोमुरा के आकलन में तिमाही का रिफाइनिंग GRM 36.7 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि ब्रोकरेज ने 38 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया था। IOC ने इस तिमाही का GRM अलग से जारी नहीं किया है।
एक साल की गिरावट के बाद लौटी उम्मीद
IOC के शेयरधारकों के लिए पिछला एक साल अच्छा नहीं रहा। पिछले 12 महीनों में स्टॉक 22% से ज्यादा टूट चुका है। जो निवेशक इस दौरान शेयर पकड़े बैठे रहे, उनके पोर्टफोलियो में ये स्टॉक लगातार लाल निशान में दिखता रहा।
शुक्रवार को नतीजों से पहले भी शेयर 0.2% फिसलकर 130.15 रुपये पर बंद हुआ था। लेकिन सोमवार की सुबह माहौल बदला हुआ था। नतीजे और नोमुरा की रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर 3% की बढ़त के साथ खुला। एक साल से दबाव झेल रहे स्टॉक के लिए ये शुरुआत निवेशकों को राहत देने वाली है।
मुनाफे ने अनुमानों को काफी पीछे छोड़ा
सितंबर तिमाही यानी Q2 FY27 में IOC ने 21,630 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया। CNBC-TV18 के पोल में ये आंकड़ा सिर्फ 4,062 करोड़ रुपये आंका गया था। अंदाजा लगाइए, बाजार जितने मुनाफे की उम्मीद लगाए बैठा था, कंपनी ने उससे पांच गुना से भी ज्यादा कमाकर दिखाया।
ये बदलाव इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इससे ठीक पहले जून तिमाही में कंपनी को 2,661 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ था। यानी तीन महीने पहले जो कंपनी घाटे में थी, वो अगली ही तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये के मुनाफे पर पहुंच गई।
रेवेन्यू के मोर्चे पर भी कंपनी अनुमान से आगे रही। तिमाही में रेवेन्यू 2.50 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि अनुमान 2.42 लाख करोड़ रुपये का था। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो रेवेन्यू 4.6% घटा है। जून तिमाही में ये 2.62 लाख करोड़ रुपये था।
EBITDA और मार्जिन में जबरदस्त उछाल
कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट ने सबसे ज्यादा चौंकाया। सितंबर तिमाही में EBITDA 30,297 करोड़ रुपये रहा। पोल में इसका अनुमान 10,194 करोड़ रुपये था, मतलब असल आंकड़ा अनुमान का करीब तीन गुना निकला।
पिछली तिमाही से तुलना करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। जून तिमाही में EBITDA सिर्फ 1,947 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 30,297 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 0.7% से उछलकर 12% हो गया। इसे ऐसे समझिए कि पहले कंपनी हर 100 रुपये की कमाई पर ऑपरेशंस से 1 रुपये भी नहीं बचा पा रही थी, अब वही आंकड़ा 12 रुपये पर पहुंच गया है।
इन नतीजों को सहारा देने में मजबूत रिफाइनिंग प्रदर्शन, इन्वेंट्री गेन, फ्यूल मार्केटिंग में अनुमान से कम घाटा और LPG पर अनुमान से कम अंडर-रिकवरी की बड़ी भूमिका रही।
रिफाइनरी से लेकर बिक्री तक, दोनों मोर्चों पर बढ़त
कंपनी का कामकाज भी तिमाही में तेज रहा। IOC का रिफाइनिंग थ्रूपुट, यानी रिफाइनरियों में प्रोसेस हुए कच्चे तेल की मात्रा, सितंबर तिमाही में 18.1 मिलियन टन रहा। ये पिछले साल की इसी तिमाही से 3% ज्यादा है।
बिक्री के मोर्चे पर भी कंपनी आगे बढ़ी। तिमाही में मार्केटिंग सेल्स 4% बढ़कर 25.2 मिलियन टन पर पहुंच गई। रिफाइनरी ज्यादा तेल प्रोसेस करे और बाजार में ज्यादा माल बिके, तो कंपनी की कमाई का पहिया दोनों तरफ से घूमता है। इस बार IOC के साथ यही हुआ।
OMC में सबसे बड़ा फायदा IOC को
नोमुरा का मानना है कि रिफाइनिंग सेक्टर में चल रहे अपसाइकल का सबसे ज्यादा फायदा तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) में IOC को मिलेगा। मतलब रिफाइनिंग का ये अच्छा दौर जितना लंबा चलेगा, उसकी सबसे बड़ी लाभार्थी IOC बन सकती है।
ब्रोकरेज ने आगे के लिए एक बात पर नजर रखने को भी कहा है। नोमुरा को उम्मीद है कि कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर, यानी नए प्रोजेक्ट्स पर होने वाला खर्च, ऊंचा बना रहेगा। इसकी वजह पेट्रोकेमिकल्स और रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार में हो रहा निवेश है। राहत की बात ये है कि नोमुरा को कंपनी का कर्ज का स्तर आरामदायक रहने की उम्मीद है। यानी खर्च बढ़ने के बावजूद बैलेंस शीट पर कर्ज का बोझ ज्यादा भारी होता नहीं दिख रहा।
बाकी एनालिस्ट्स क्या कह रहे हैं
नोमुरा अकेला ब्रोकरेज नहीं है जो IOC को लेकर पॉजिटिव है। Bloomberg के एनालिस्ट रिकमेंडेशन डेटा के मुताबिक IOC पर कुल 32 एनालिस्ट्स की राय मौजूद है। इनमें से 21 ने Buy, 5 ने Hold और 6 ने Sell की सलाह दी है। स्टॉक की कंसेंसस रेटिंग 3.81 है।
इन एनालिस्ट्स का 12 महीने का कंसेंसस टारगेट प्राइस 159.20 रुपये है। शुक्रवार के 130.15 रुपये के भाव से देखें तो ये 22.3% के संभावित रिटर्न की ओर इशारा करता है। नोमुरा का 185 रुपये का टारगेट इस कंसेंसस से भी काफी ऊपर है। एक साल से गिरावट झेल रहे शेयर के लिए ज्यादातर एनालिस्ट्स का Buy की तरफ झुकाव बताता है कि बाजार के बड़े जानकार अब इसमें रिकवरी की गुंजाइश देख रहे हैं।
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