Sugar Stocks : चीनी कीमतों में तेजी से शुगर शेयर उछले, अवध शुगर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग को लगे पंख
Sugar Stocks : बाजार में चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। नए सीजन में डेफिसिट का जोखिम बढ़ा। El Nino से भारत में उत्पादन गिरने का खतरा बढ़ा है। ब्राजील, भारत और थाईलैंड में कम उत्पादन संभव है
Sugar Stocks : मोनार्क PMS का कहना है कि भारत का शुगर मार्केट अब एक ज्यादा मुश्किल दौर में पहुंच गया है। उम्मीद से कम उत्पादन के कारण निकट भविष्य में सप्लाई कम होने की उम्मीद है
Sugar Stocks : इंटरनेशनल मार्केट में चीनी कीमतें 2 साल की ऊंचाई पर पहुंचने से मंगलवार के ट्रेडिंग सेशन में शुगर शेयरों में मिठास बढ़ी है। शुगर स्टॉक्स में 9 प्रतिशत तक की तेजी आई है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों,मजबूत मांग और निकट भविष्य में सप्लाई में कमी की आशंका के कारण धामपुर शुगर मिल्स और शक्ति शुगर्स ने इस बढ़त में सबसे सबसे ज्यादा योगदान किया है। अवध शुगर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग में अच्छी तेजी आई है। उधर श्री रेणुका और बलरामपुर चीनी में भी 3 फीसदी तक की तेजी है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर धामपुर शुगर मिल्सके शेयर 8.56 फीसदी बढ़कर ₹192 पर पहुंच गए,जबकि शक्ति शुगर्स के शेयर 8.7% की बढ़त के साथ ₹19.35 पर आ गए। डालमिया भारत शुगर के शेयर 8.5% बढ़कर ₹466.95, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर 7.8% बढ़कर ₹47.59 और श्री रेणुका शुगर के शेयर 4.5% बढ़कर ₹22.84 पर पहुंच गए। बलरामपुर चीनी मिल्स,अवध शुगर एंड एनर्जी,बजाज हिंदुस्तान शुगर और उत्तम शुगर मिल्स के शेयरों में भी 2-3% की बढ़त देखी गई।
चीनी बिगाड़ेगी बजट?
इंटरनेशनल मार्केट में शुगर कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। एक दिन में कीमतों में 4% से ज्यादा की तेजी आई है। दो दिन में कीमतों में 10% की तेजी आई है। इंटरनेशनल मार्केट में शुगर के भाव 21 डॉलर प्रति Lbs के करीब पहुंच गए है। शुगर के भाव फरवरी 2025 के बाद के ऊपरी स्तरों पर हैं। इसके दाम 2026 में अब तक 38% चढ़ चुके हैं।
चीनी में तेजी के कारण
बाजार में चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। नए सीजन में डेफिसिट का जोखिम बढ़ा। अल नीनो से भारत में उत्पादन गिरने का खतरा बढ़ा है। ब्राजील, भारत और थाईलैंड में कम उत्पादन संभव है।
चीनी पर StoneX
StoneX का कहना है कि 2026/27 में ग्लोबल डेफिसिट रहने की आशंका है। ग्लोबल शुगर डेफिसिट 9 लाख टन रह सकता है। थाईलैंड का उत्पादन कम से कम 17% घटने की आशंका है। कम बारिश से भारत में गन्ने की पैदावार पर चिंता कायम है। ब्राजील में ज्यादा बारिश से कटाई प्रभावित हुई है। सेंटर-साउथ में हार्वेस्टिंग और क्रशिंग में देरी हुई है।
एक्सपर्ट्स की राय
जानकारों का मानना है कि शुगर शेयरों में मौजूदा तेजी की वजह ग्लोबल मार्केट में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। US में चीनी के फ़्यूचर्स एक दिन में 4%, एक महीने में 14% और एक साल में 23% से ज़्यादा बढ़े हैं।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फ़ाउंडर जी चोक्कालिंगम का कहना है कि चीनी की कीमतों में काफी मजबूती दिखी है और मांग भी बहुत जबरदस्त बनी हुई है,जिससे इन शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। हालांकि,उन्होंने यह भी कहा कि सरकार घरेलू स्तर पर चीनी की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए और भी कई पाबंदियां लगा सकती है और कीमतें अब अपने सबसे ऊंचे स्तर के करीब हैं।
इस बीच,तेजी पकड़ा होता अल नीनो चीनी के बड़े उत्पादकों को नुकसान पहुंचा रहा है। चीनी के प्रमुख उत्पादकों में शामिल ब्राज़ील में बहुत ज्यादा बारिश की वजह से गन्ने की कटाई धीमी हो गई है।
जी चोक्कालिंगम ने आगे कहा कि शुगर शेयरों में तेजी की वजह चीनी की कीमतों में उछाल और कच्चे तेल की कीमत का लगभग $100 प्रति गैलन पर बने रहना है। अधिकांश चीनी कंपनियों की अपनी डिस्टिलरी हैं,जो इन कंपनियों के लिए एक अच्छी बात है।
मोनार्क PMS का कहना है कि भारत का शुगर मार्केट अब एक ज्यादा मुश्किल दौर में पहुंच गया है। उम्मीद से कम उत्पादन के कारण निकट भविष्य में सप्लाई कम होने की उम्मीद है। हालांकि सरकारी दखल की वजह से कीमतों में तेजी सीमित रही है।
15 सितंबर को जारी एक नोट में मोनार्क PMS ने कहा है कि कीटों की बीमारी और जलभराव के कारण 2025/26 के लिए चीनी का उत्पादन अब 30.6 मिलियन टन (MT) रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 34.3 MT था। अक्टूबर की शुरुआत में मिलों के पास लगभग 3 से 3.5 MT का स्टॉक है, जबकि मासिक खपत करीब 2.2 MT है। यह स्थिति तंग तो है,लेकिन इससे शुगर की कमी का संकेत नहीं मिलता।
त्योहारी सीजन से पहले मांग भी चीनी की कीमतों पर असर डालने वाला एक अहम फैक्टर है। घरेलू मांग को पूरा के लिए सरकार ने 31 अक्टूबर तक 1 MT चीनी के बिना ड्यूटी वाले आयात, डीलरों और थोक ग्राहकों के लिए स्टॉक की सीमा,15 अक्टूबर के आसपास जल्दी पेराई सीज़न शुरू करने और सितंबर से हर दो हफ्तो में बिक्री का कोटा तय करने जैसे उपायों का एलान किया है।
मोनार्क PMS के असिस्टेंट फंड मैनेजर ध्रुव जोगलेकर ने कहा कि इन्वेस्टर्स को ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदने चाहिए जिन पर कम कर्ज हो, जिनका डिस्टिलरी मिक्स अच्छा हो और जो कैश कमा रही हों। सिर्फ़ सुर्खियों में रहने वाली कंपनियों से दूर रहें।
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