Suzlon Energy: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Suzlon Energy एक बार फिर निवेशकों के रडार पर है। हाल ही में कंपनी ने अपने इनवेस्टर डे में आने वाले वर्षों की रणनीति पेश की। कंपनी अब सिर्फ विंड टरबाइन बनाने वाली कंपनी नहीं रहना चाहती। वह खुद को एक बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी के तौर पर तैयार कर रही है।
इसी के बाद Motilal Oswal और JM Financial दोनों ने शेयर पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। दोनों ब्रोकरेज ने 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 12% की संभावित तेजी दिखाता है। मंगलवार, 16 जून को सुजलॉन का शेयर 4.25% की बढ़त के साथ 57.93 रुपये पर बंद हुआ।
क्यों बुलिश है मोतीलाल ओसवाल
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि कंपनी की नई 'Suzlon 2.0' रणनीति नए मौके खोल सकती है। कंपनी अब सिर्फ विंड टरबाइन बिजनेस तक सीमित नहीं रहना चाहती। वह विंड, सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को मिलाकर इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस देना चाहती है। कंपनी का टरागेट FY31 तक ऑर्डर बुक को 5.5 GW से बढ़ाकर 15 GW करना है। सालाना बिक्री को 2.5 GW से बढ़ाकर 10 GW तक ले जाने की भी योजना है।
ब्रोकरेज ने कंपनी की लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी बड़ी ताकत बताया है। भारतीय विंड इंडस्ट्री में औसतन 60% लोकलाइजेशन है। Suzlon का लोकलाइजेशन स्तर 80-85% तक है। इससे सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम होते हैं। मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि 2030 तक भारत की विंड पावर क्षमता 100 GW के पार जा सकती है। इसका फायदा Suzlon को मिल सकता है।
JM Financial की नजर किस पर है?
JM फाइनेंशियल भी Suzlon को लेकर बुलिश है। लेकिन उसका कहना है कि अब सबसे अहम बात प्लान नहीं, बल्कि उसे पूरा करना है। ब्रोकरेज के मुताबिक एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज (AMS) कारोबार आने वाले समय में ग्रोथ का बड़ा इंजन बन सकता है। सुजलॉन FY31 तक अपने मैनेजमेंट के तहत मौजूद एसेट्स को 18 GW से बढ़ाकर 70 GW से ज्यादा करना चाहती है।
कंपनी DevCo मॉडल पर भी काम कर रही है। इसके तहत वह पहले जमीन हासिल करेगी। ग्रिड कनेक्टिविटी और जरूरी मंजूरियां लेगी। इसके बाद ग्राहकों को तैयार प्रोजेक्ट साइट देगी। इससे कंपनी सिर्फ टरबाइन सप्लायर नहीं रहेगी। वह पूरी रिन्यूएबल एनर्जी चेन में काम करने वाली कंपनी बन सकती है। JM फाइनेंशियल के मुताबिक सुजलॉन FY31 तक 3 GW से ज्यादा एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल करने का लक्ष्य भी रखती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
हालांकि सुजलॉन के साथ कुछ जोखिम भी हैं। जमीन हासिल करना चुनौती हो सकता है। ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी हो सकती है। सरकारी मंजूरियां समय ले सकती हैं। DevCo मॉडल में ज्यादा पूंजी की जरूरत भी पड़ सकती है।
दोनों ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत है। सर्विस बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी नए क्षेत्रों में भी कदम रख रही है। लेकिन आगे शेयर का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि Suzlon अपने बड़े प्लान को कितना सफल करके दिखाती है।
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