सेबी टेकओवर से जुड़े नियमों में बदलाव कर सकता है। इसके तहत जिस कंपनी का अधिग्रहण हो रहा है, उसके लिए अधिग्रहण करने वाली कंपनी के बारे में मु्ख्य जानकारियां शेयर करना जरूरी हो सकता है। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। टेकओवर कोड रेगुलेशंस के रिव्यू के दौरान इस मसले को शामिल किया जा सकता है।
टेकओवर रेगुलेशंस के तहत जो कंपनी अधिग्रहण कर रही है, उसे यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि पब्लिक अनाउंसमेंट से जुड़ी जानकारियां और पोस्ट-ऑफ एडवर्टाइजमेंट सही, फेयर और पर्याप्त होने चाहिए। इनमें किसी तरह की भ्रामक जानकारी नहीं होनी चाहिए। ये जानकारियां भरोसेमंद स्रोतों पर आधारित होनी चाहिए और जहां जरूरी हो वहां स्रोत की जानकारी दी जानी चाहिए। लेकिन, अभी जो नियम है, उसमें जिस कंपनी का अधिग्रहण किया जा रहा है उसके लिए ओपन ऑफर के बारे में अधिग्रहण करने वाली कंपनी के साथ सहयोग करने या जानकारी देना जरूरी नहीं है।
ज्यादातर मामलों में समस्या नहीं
अधिग्रहण के सामान्य मामलों में इससे दिक्कत नहीं होती है। ऐसे मामलों में शेयर पर्चेज एग्रीमेंट की वजह से ओपन ऑफर जरूरी हो जाता है। कई बार सेलर मौजूदा प्रमोटर होता है या अधिग्रहण करने वाली और अधिग्रहित होने वाली कंपनी में सहमित होती है। प्रॉब्लम ऐसे मामलों में आती है जब अधिग्रहण करने वाली कंपनी को उस कंपनी का सहयोग नहीं मिलता है, जिसका अधिग्रहण किया जा रहा है। ऐसे मामलों में जिस कंपनी का अधिग्रहण किया जा रहा है, उसके बारे में जानकारी हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कुछ मामलों में आती है दिक्कत
ऐसे मामले देखने में आ चुके हैं, जिनमें जिस कंपनी का अधिग्रहण हो रहा था, उसने अधिग्रहण करने वाली कंपनी के साथ सहयोग नहीं किया। ऐसे एक मामले में लंबी कानूनी लड़ाई चली, क्योंकि जिस कंपनी का अधिग्रहण हो रहा था, वह एक एनबीएफसी थी और उसने संबंधित रेगुलेटर से जरूरी एप्रूवल के लिए पहल नहीं की। यह ओपन ऑफर की शर्त के लिहाज से जरूरी थी। अधिग्रहण करने वाली कंपनी के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद एनबीएफसी आरबीआई के पास अप्लाई करने में नाकाम रही। आखिर में सेबी को एक समयसीमा तय करते हुए कंपनी को निर्देश जारी करना पड़ा।
कुछ देशों में टेकओवर कोड में यह प्रावधान शामिल
दुनिया में कुछ देशों में टेकओवर रेगुलेशन में ऐसा प्रावधान शामिल है। इसके तहत जिस कंपनी का अधिग्रहण हो रहा है, उसके लिए उस कंपनी को जानकारियां देना या उसके साथ सहयोग करना जरूरी हो जाता है, जो अधिग्रहण कर रही है। इंग्लैंड में टेकओवर कोड में इस तरह का प्रावधान शामिल है। मामले की जानकारी रखने वाले एक लीगल सोर्स ने कहा, "कमेटी का यह मानना था कि टारगेट कंपनी के लिए कुछ जिम्मेदारियां टेकओवर रेगुलेशंस में शामिल की जानी चाहिए। इससे टारगेट कंपनी को ओपन ऑफर के लिए सहयोग करना पड़ेगा।"