Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।
Tata Sons IPO: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को अपर लेयर NBFC (NBFC-UL) की नई लिस्ट जारी की। इसमें टाटा संस का नाम बरकरार रखा गया है। इसका मतलब है कि RBI ने अभी तक टाटा संस को NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है।
RBI ने कहा कि कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए टाटा संस ने जो आवेदन दिया है, वह अभी जांच के दौर में है। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि अपर लेयर लिस्ट में टाटा संस को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि उसकी डीरजिस्ट्रेशन अर्जी खारिज हो गई है। उस पर अलग से फैसला लिया जाएगा।
अपर लेयर NBFC क्या है?
RBI ने कहा कि अपर लेयर में उन NBFC को रखा जाता है, जिन पर ज्यादा नियामकीय निगरानी की जरूरत होती है। फिलहाल इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय है। हालांकि, RBI समय-समय पर इस सीमा की समीक्षा करता है और हर तीन साल में इसे दोबारा देखा जाएगा।
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि अगर कोई NBFC एक बार अपर लेयर में आ जाती है, तो उसे कम से कम 5 साल तक इसी श्रेणी के कड़े नियमों का पालन करना होगा। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे।
किन कंपनियों के नाम हैं लिस्ट में?
नई लिस्ट में REC, PFC, IRFC, PNB Housing Finance, Sammaan Capital समेत कुल 17 NBFC शामिल हैं। RBI ने पहले नियमों में बदलाव करते हुए सरकारी मालिकाना हक वाली योग्य NBFC को भी अपर लेयर में शामिल करने की अनुमति दी थी।
हालांकि, सरकारी NBFC के लिए एक राहत है। उन्हें शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी नहीं होगा। लेकिन निजी कंपनियों को अपर लेयर NBFC बनने के तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।
टाटा संस के लिए यह मामला क्यों अहम?
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस एक Core Investment Company (CIC) के रूप में रजिस्टर्ड है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की एसेट थीं। यानी यह RBI की तय सीमा से काफी ऊपर है।
टाटा संस ने अपना CIC लाइसेंस रद्द कराने के लिए आवेदन किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कंपनी NBFC नहीं रहती, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।
टाटा संस लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है?
टाटा संस को 2022 में पहली बार अपर लेयर NBFC में शामिल किया गया था। नियमों के मुताबिक, उसे 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। इसी वजह से कंपनी ने CIC लाइसेंस रद्द करने का आवेदन दिया था।
जून में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने RBI को पत्र लिखकर संभावित लिस्टिंग का विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अगर टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इससे टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी का लंबी अवधि स्वरूप बदल सकता है। साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के परोपकारी उद्देश्यों पर भी असर पड़ सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।