विनिवेश के मोर्चे पर सरकार ला सकती है और तेजी, आधे दर्जन से ज्यादा कंपनियों के OFS की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक शॉर्ट टर्म के तहत कंपनियों के OFS पर फोकस है। हाई लेवल कमेटी की सिफारिश के तहत OFS लाए जाएंगे। जल्द ही 6 सरकारी कंपनियों के OFS आ सकते हैं। अब तक 4 कंपनियों के OFS से 13,389.42 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 5:31 PM
सूत्रों के मुताबिक मीडियम,लॉन्ग टर्म में सरकार का स्ट्रैटेजिक विनिवेश पर जोर होगा। यहां पर सरकार को बहुत सारे पहलुओं पर ध्यान देना होता है

विनिवेश के मोर्चे पर सरकार और तेजी ला सकती है। CNBC आवाज़ को मिली जानकारी के मुताबिक सरकार जल्द आधे दर्जन से ज्यादा कंपनियों के OFS ला सकती है। हालांकि स्ट्रैटेजिक विनिवेश के मोर्चे पर रफ्तार धीमी रह सकती है। पूरी खबर बताते हुए सीएनबीसी-आवाज के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर कहा कि सरकार विनिवेश की रफ्तार तेज कर सकती है। हर हफ्ते विनिवेश को लेकर समीक्षा बैठक हो रही। इसके लिए सरकार की शॉर्ट टर्म,मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्लानिंग है।

हाई लेवल कमेटी की सिफारिश के तहत लाए जाएंगे OFS 

सूत्रों के मुताबिक शॉर्ट टर्म के तहत कंपनियों के OFS पर फोकस है। हाई लेवल कमेटी की सिफारिश के तहत OFS लाए जाएंगे। जल्द ही 6 सरकारी कंपनियों के OFS आ सकते हैं। अब तक 4 कंपनियों के OFS से 13,389.42 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। सेंट्रल बैंक,कोल इंडिया,NHPC,NLC इंडिया का OFS आ चुका है। GIC का भी 3100 करोड़ रुपए का OFS खुला है। सूत्र बता रहे हैं कि OFS का सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है। इसका मतलब है कि शॉर्ट टर्म में सरकार सरकारी कंपनियों में OFS के जरिए और छोटी-छोटी हिस्सेदारियां बेचेगी।


पूरे साल में आ सकते हैं 6 ऑफर फॉर सेल

सरकार इस बारे में मर्चेंट बैंकरों से चर्चा कर रही है। इसमें यह तय करने परा चर्चा हो रही है। की ओएफएस में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी कितनी होनी चाहिए। ऑफर की फ्लोर प्राइस क्या होनी चाहिए और इसकी टाइमिंग क्या होनी चाहिए। यह सब तय हो जाने के बाद इन प्रस्तावों को अल्टरनेट मैकेनिज्म यानी मंत्रियों समूह के पास ले जाया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद सरकार एक-एक करके ओएफएस लाना शुरू करेगी। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक एक-आध महीने में ही एक ओएफएस आ सकता है। यहीं पूरे साल में 6 OFS आ सकते हैं।

मीडियम से लॉन्ग टर्म में सरकार का होगा स्ट्रैटेजिक विनिवेश पर जोर 

सूत्रों के मुताबिक मीडियम से लॉन्ग टर्म में सरकार का स्ट्रैटेजिक विनिवेश पर जोर होगा। यहां पर सरकार को बहुत सारे पहलुओं पर ध्यान देना होता है। ऐसे में यहां पर कुछ सुस्ती देखने को मिल सकती है। इसमें अब तक कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त कंपनियों पर ही फोकस होगा। स्ट्रैटेजिक विनिवेश में नई कंपनियां रहने की संभावना कम है। मिडिय टर्म में सरकार का फोकस एसेट मोनेटाइजेशन पर होगा। इसके जरिए अब तक 6,367 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं।

 

 

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