बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिल रही है। बाजार फिलहाल दिन के निचले स्तरों पर दिख रहा है। आज लगातार दूसरे दिन की गिरावट में निफ्टी 225 अंक गिरकर 17900 के नीचे आ गया है। निफ्टी बैंक में भी करीब 400 अंकों की कमजोरी देखने को मिल रही है।IT और फाइनेंशियल शेयरों की सबसे ज्यादा पिटाई होती नजर आ रही है। सेंसेक्स निफ्टी करीब 1 फीसदी फिसल गए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल, ग्लोबल बाजारों आई गिरावट और अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना ने भारतीय बाजारों पर भी दबाव बनाया है। बता दें कि 18 जनवरी यानी कल के कारोबार में Nifty 1.07 फीसदी और Sensex 0.9 फीसदी टूटा था।
आइए डालतें हैं आज की गिरावट के कारणों पर एक नजर
अमेरिकी ट्रेजरी ईल्ड में बढ़ोत्तरी और यूएस में ब्याज दरों में बढ़त की संभावना को बीच ग्लोबल स्तर पर बिकवाली आती दिखी है। US 10-year बॉन्ड ईल्ड 2 साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है जो इस बात का संकेत है कि निवेशक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों में और कड़ाई का सामना करने की तैयारी में है। बता दें कि यूएस फेड की मीटिंग 25-26 जनवरी को है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त
पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने और पहले से ही टाइट मार्केट में सप्लाई की दिक्कतें और बढ़ने की संभावना के चलते कच्चे तेल की कीमतें 7 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई हैं। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि 2022 की पहली तिमाही में ब्रेंट की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल और दूसरी तिमाही में 95 प्रति बैरल तक जा सकती है जबकि साल 2022 की आखिरी 2 तिमाहियों में ब्रेंट का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
गोल्डमैन सैक्स ने 2022 के लिए अपना ब्रेंट ऑयल फॉर कॉस्ट 96 रुपये प्रति बैरल और 2023 के लिए 105 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है जो कि पहले 81 और 85 डॉलर प्रति बैरल थे
भारत और पूरी दुनिया में कोविड के मामले बढ रहे है जिससे ग्लोबल इकोनॉमी के दौर पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। 24 घंटे में भारत में कोरोना के 282,970 नए मामले मिले हैं जबकि इससे 441 लोगों की मौत हो गई हैं।
नतीजों के मौसम के शुरुआती रुझान से पता चलता है कि अभी तक कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरुप ही रहा है। हालांकि कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डालती नजर आई है। एनालिस्ट का कहना है कि कोविड के बढ़ते मामलों और कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी अगले तिमाहियों में कंपनी के मार्जिन पर असर डाल सकती है।
3 जनवरी से 6 जनवरी तक करीब 65 करोड़ डॉलर की खरीदारी के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक ग्लोबल इक्विटी बाजारों में बिकवाली के बीच भारतीय बाजारों में भी बिकवाली करते नजर आ रहे हैं। 7 जनवरी से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों में 80 करोड़ डॉलर की बिकवाली की है।
1 फरवरी को आने वाले बजट के पहले निवेशक चौंकन्ने नजर आ रहे हैं। कोविड के बढ़ते मामलों के बीच सरकार 6.3 से 6.5 फीसदी के कम महत्तवाकांक्षी वित्तीय घाटे का लक्ष्य रख सकती है। एनालिस्ट का मानना है कि सरकारी खर्च में कटौती से ग्रोथ की संभावना पर असर पड़ सकता है।