मार्केट फंडामेंटल्स पर बात करने के लिए आज जुड़े HXGON Partners के डायरेक्टर तुषार प्रधान। तुषार इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट में 26 साल से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये HSBC AMC में 14 साल तक CIO रहे हैं। तुषार प्रधान जून 2009 से अप्रैल 2023 तक HSBC AMC से जुड़े रहे। इन्होंने Tata AIG और HDFC AMC में भी सीनियर पद पर काम किया है। आइये उनसे जानते है कि मौजूदा बाजार में उनकी क्या रणनीति है।
तुषार प्रधान ने बाजार पर राय देते हुए कहा कि वे मार्केट को लेकर आशावादी नजरिया रखते हैं। बाजार की कमजोरी के जो भी कारण रहे जैसे एफपीआई की सेलिंग, दूसरी तिमाही के कमजोर नतीजे ये सब अपनी जगह है। हर बार बाजार के मूवमेंट को एक्सप्लेन करने के लिए ऐसे कारणों की खोज करते हैं। लेकिन अंत में हमें ये ध्यान में रखना होगा कि कैपिटल मार्केट में लॉन्ग टर्म में ही पैसा बनता है। इसका मतलब ये है कि हमारे लिए हर समय कोई न कोई ऐसा कारण जरूर रहेगा। जो बाजार पर अपना असर डालेगा और बाजार ऊपर नीचे होता रहेगा।
बाजार में आगे क्या होगा और क्या सबसे बुरा दौर बीत चुका है ये कहना मुश्किल है। लेकिन हम ये जरूर कह सकते है एफपीआई की 80 फीसदी बिकवाली पूरी हो चुकी है। एफपीआई ने अभी भी प्रतिशत को आधार पर उतनी बिकवाली नहीं की है जितनी उन्होंने 2008 में की थी। भारत में ऐसी कोई पैनिक की स्थिति नहीं है। इमर्जिंग मार्केट की बिकवाली की चपेट में भारत भी आ गया था। बाजार में गिरावट के ये सारे अस्थाई कारण हैं। उम्मीद है कि विदेशी फंडों की बिकवाली जल्द ही थम जाएगी।
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि खपत से जुड़े शेयरों में काफी गिरावट हुई है। ऐसे में बहुत महंगं में मिल रहे इस सेक्टर के अच्छे शेयर कुछ सस्ते में मिल रहे हैं। ऐसे में निवेश अब लंबी अवधि के नजरिए इस सेक्टर के शेयरों में निवेश के मौके ढ़ूढ़ सकते हैं।
तुषार ने कहा कि वे बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। इस समय बैंकिंग शेयर बाजार के दूसरे सेक्टरों की तुलना में सस्ते में मिल रहे हैं। बैंकिंग शेयरों में उनकी लंबे नजरिए से निवेश की सलाह है।
ऑटो स्पेस पर बात करते हुए तुषार ने कहा कि ऑटो में डाउन साइकिल की शुरुआत देखने को मिल रही है। अभी इस सेक्टर में वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाने की सलाह होगी। पीएसयू शेयरों पर बात करते हुए तुषार ने कहा कि भारी करेक्शन के बाद भी अभी पीएसयू शेयरों में कूद पड़ने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये अभी भी बहुत महंगे हैं। इन स्टॉक्स की अर्निंग ग्रोथ इनके भाव से एक दम मैच नहीं करती।
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