फोर व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में घरेलू मांग में मजबूती बनी हुई है। चुनिंदा पॉकेट्स में 2 व्हीलर में मजबूती नजर आ रही है। लेकिन टू व्हीलर के कुछ सेगमेंट पर रूरल बाजार में आनी वाली रिकवरी का अहम योगदान होगा। ये बातें Ambit Asset Management के सुशांत भानुशाली ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कही हैं। उनका मानना है कि आगे मांग में जबरदस्त मजबूती, महंगाई के घटते दबाव और अर्निंग में बढ़ोतरी के चलते ऑटो सेक्टर में जोरदार तेजी देखने को मिलेगी। कैपिटल मार्केट और असेट मैनेजमेंट का करीब 20 साल का अनुभव रखने वाले सुशांत का मानना है कि निकट के दिनों में ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं और ग्लोबल डिमांड में कमजोरी के कारण एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टरों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
भारत का ग्रोथ आउटलुक शेष दुनिया की तुलना में काफी अच्छा
सुशांत भंसाली का कहना है कि भारत का ग्रोथ आउटलुक शेष दुनिया की तुलना में काफी अच्छा है। निफ्टी लंबी अवधि के औसत वैल्यू के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में निवेशकों को इस समय निवेश का शानदार अवसर मिल रहा है। बैंकिग सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आगे हमें इस सेक्टर के नेट इंट्रेस्ट मार्जिन में थोड़ा दबाव देखने को मिल सकता है। यह वित्त वर्ष 2023 के 3.55 फीसदी से घटकर अगले 5 सालों में औसतन 3.1 फीसदी पर रह सकता है।
रियल एस्टेट एंसिलरी का रिस्क रिवार्ड रेशियो कोर रियलिटी कंपनियों की तुलना में ज्यादा बेहतर
क्या कोर रियल्टी की जगह रियल्टी से जुड़े दूसरे शेयरों ( रियल्टी एंसिलरी) में निवेश करना ज्यादा बेहतर होगा? इस सवाल का जवाब देते हुए भानुशाली ने कहा कि देश में बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, बढ़ते शहरीकरण, बढ़ती खर्च योग्य आय और संगठित क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए आगे हमें बिल्डिंग मैटेरियल, होम इम्प्रूवटमेंट और फर्निशिंग से जुड़े शेयरों में तेजी की उम्मीद है। कोर इंडियन रियल एस्टेट सेक्टर में हमें कोई भी ऐसी कंपनी नजर नहीं आती है जो पैन इंडिया में उपस्थिति रखती है। लेकिन रियल एस्टेट एंसिलरी में ऐसी कई कंपनियां हैं जिनकी पैठ पूरे भारत में है। इनका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो भी काफी मजबूत है। जिसमें सभी तरह के आय वर्ग के लोगों की जरूरतें पूरी हो जाती हैं। ऐसे में रियल एस्टेट एंसिलरी का रिस्क रिवार्ड रेशियो कोर रियलिटी कंपनियों की तुलना में ज्यादा बेहतर है।
बाकी बचे वित्तीय वर्ष में इक्विटी बाजारों और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए सुशांत भानुशाली ने कहा कि आर्थिक विकास में मंदी (विशेष रूप से ग्रामीण भारत में), आगामी मॉनसून में अल-नीनो का असर और इसके बाद महंगाई पर इसके प्रभाव, ग्लोबल मंदी चालू वित्त वर्ष के लिए अहम चुनौतियां हैं। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत में होने वाले राष्ट्रीय चुनाव कुछ हलचल पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा 2023 के अंत में होने वाले कुछ राज्य चुनावों पर बाजार की पैनी नजर रहेगी।
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